*क्या सच है कि मोदी और शाह विपक्षी ट्रैप में फंस गए और दिल्ली में प्रायोजित दंगा हो गया.?*

*क्या सच है कि मोदी और शाह विपक्षी ट्रैप में फंस गए और दिल्ली में प्रायोजित दंगा हो गया.?*

मुझे आश्चर्य है कि जो सब कुछ नंगी आंखों से दिख रहा है.... उसे विद्वान मित्रों को दूरबीन लगाकर देखने की भला क्या जरूरत है ?

उनकी तैयारियाँ देखकर अब यह स्पष्ट है कि उन्हें ये तैयारियाँ करने में काफी समय लगा होगा....!

लेकिन कितना समय ???

दंगे की तैयारियाँ आखिर कब से की जा रही थी ???

इसका जबाब बहुत ही सीधा और आसान सा है कि.... 

दंगों की पूरी तैयारी करने के बाद ही ... 
उन्होंने शाहीन बाग में अपनी औरतों और बच्चों को बिठाया...!

मोदी और शाह के सख्त छवि को देखते हुए उन्हें ये पूरा अनुमान था कि.... मोदी और शाह हफ्ते-दस दिन में ही पुलिस की सहायता से शाहीन बाग का मजमा हटवा देंगे.

जाहिर सी बात है कि.... शाहीन बाग का मजमा हटाने के लिए बल प्रयोग भी करना पड़ता....
यदि सरकार ज्यादा बल प्रयोग नहीं भी करती तो भाई लोग खुद ही अपनी महिलाओं बच्चों को घायल करवा देते....

फिर, उसी की आड़ लेकर इन्हें दंगा करना था कि.... सरकार ने हमारी औरतों और बच्चों को क्यों मारा ??

और... सारे विपक्ष एवं वामपंथी मीडिया की पूरी तैयारी थी कि.... वे इस प्रायोजित दंगों की पूरी जिम्मेदारी ... मोदी और शाह पर मढ़ देते कि.... शाहीन बाग में बातचीत करनी थी... पुलिस नहीं भेजना था .... आदि-आदि.

मेरा आकलन है कि.... इसी बहाने अमित शाह को गृह मंत्रालय से हटवाने का षड्यंत्र था.... आपने देखा भी होगा कि बारबाला और उसके टुकड़ों पर पलते मीडिया ने अमित शाह का इस्तीफा भी माँगा

क्योंकि, उन्हें मालूम है कि शाह के गृहमंत्री रहते उनकी दाल नहीं गलने वाली है और 5 साल में अमित शाह पूरे लुटियन लूटतंत्र और उसके ECOSYSTEM को नेस्तनाबूद कर देंगे...

इसके लिए वे शाहीन बाग में हुए लाठी-चार्ज और उसके बाद ""भावना में बहकर प्रतिक्रिया स्वरूप हुए दंगे"" (यही कहा जाता) को आधार बनाते.... 

और, कहते कि अमित शाह की.... अदूरदर्शिता में किए गए महिलाओं पर किए गए लाठीचार्ज के परिणाम स्वरूप मुजरिम अपनी भावना पर कंट्रोल नहीं कर पाए और उन्होंने तो मात्र प्रतिक्रिया दी.

इसीलिए, इस दंगे का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ मोदी और शाह हैं.

लेकिन.... विपक्षियों का ये दुर्भाग्य रहा है.... दुश्मनों का नस-नस पहचानने वाले मोदी और शाह को ये आभास हो गया कि...

इन लोगों ने कुछ बड़ा प्लान कर रखा है और उसी प्लान पर अमल करने के लिए उन्होंने अपनी औरतों और बच्चों को शाहीन बाग में बिठाया है.

इसीलिए.... उन्होंने शाहीन बाग में डायरेक्ट एक्शन ना लेते हुए सुप्रीम कोर्ट को इसमें फंसा दिया... 
ताकि, जो करना है वो कोर्ट करता रहे...!

और... शाहीन बाग को उन्होंने जस के तस छोड़ दिया कि.... तुम बैठे रहो... मेरे बाप का क्या जाता है ???

परिणाम ये हुआ कि.... अब दुश्मनों को समझ नहीं आने लगा कि करें तो क्या करें... 

क्योंकि, इधर दंगे की तैयारी भी पूरी हुई पड़ी थी, कामगारों को पूरा बयाना भी दे दिया गया था.... लेकिन, दंगा करने का कोई बहाना नहीं मिल रहा है.

उसी बीच... सुप्रीम कोर्ट ने वार्ताकार नियुक्त कर दिए कि रास्ता खाली करवाओ.

अब इन्हें समझ आ गया कि... अब एक दो तारीख के बाद ही सुप्रीम कोर्ट शाहीन बाग की कहानी खत्म कर देगा और हमारी सारी तैयारी व्यर्थ हो जानी है.

उसी बीच ट्रंप आ गए और संयोग से कपिल मिश्रा ने भी कह दिया कि अगर 2-3 दिन में रास्ते खाली नहीं हुए तो हम करवा लेंगे.

जाहिर सी बात है कि... कपिल मिश्रा के कहने का तात्पर्य ये रहा होगा कि.... हम भी तुम्हारे ही तर्ज पर हर जगह धरना-प्रदर्शन करेंगे और शहर को ब्लॉक कर देंगे.

फिर... निर्णय 2-4 दिन में ही आ जायेगा.

साथ ही.... किसी संवैधानिक पद पर नहीं होने के कारण इटालियन राजमाता और उसके बेटे को ट्रंप के साथ डिनर में नहीं बुलाया जाना भी लुटियन्स लूटतंत्र को अपना अपमान लगा...!

और, ये दिखाने के लिए कि... अभी भी वे कितने ताकतवर हैं... दंगे को हरी झंडी दे दी.

लेकिन.... इतना भीषण दंगा करवाने के बाद भी वे इसका दोष मोदी और शाह पर नहीं मढ़ पाए. यहां तक कि कपिल मिश्रा को लपेटने में भी पूरी तरह सफल नहीं हो पा रहे हैं मोबाइल कैमरा जिंदाबाद ,सोशल मीडिया जिंदाबाद)

इसीलिए.... मेरे आंकलन के अनुसार मोदी और शाह किसी ट्रैप में नहीं फंसे हैं बल्कि उन्होंने दुश्मनों को उनके ही जाल में फंसा दिया है.

क्योंकि.... जब दंगे हुए हैं तो उनकी गहनता से जांच होगी और जांच में सबकी संलिप्तता भी सामने आएगी.

वो ताहिर-फाहिर की कोई मुराद नहीं है...  क्योंकि, वो तो सिर्फ मोहरा है.

पकड़ना तो उन्हें है जिसने ताहिर को ऐसा करने के लिए कहा, उनके लिए आवश्यक हथियार, पैसे आदि की व्यवस्था करवाई.

इसीलिए... निश्चिन्त रहें...

दुश्मनों ने अधीरता में बहुत बड़ी गलती कर दी है...
और... अब उन सब हिसाब लिए जाने की प्रक्रिया शुरू भी हो गई है.

लेकिन अपने निरपराध हिन्दू भाई-बहनों की हत्या हो जाने का मुझे भी बेहद दुख है...

हाँ एक बात और जब किसी अनहोनी को अपने विवेक से नहीं होने दिया जाता तो आप उसकी भयावहता का अनुमान नहीं लगा सकते।

आप लोग भी अपने टॉप फ्लोर को प्रयोग करो, समझो और समझाओ.......

आप के समय में भी महाभारत हो रहा है आप पाण्डव हो, और पांडवों के विपक्ष में कौरव हैं, आपका सौभाग्य है कि आपके पास मोदी रूपी कृष्ण हैं जो इस महाभारत में हथियार न भी उठायें फिर भी विजय अवश्य दिलवा देंगे। 
आवश्यकता है उन पर पांडवों की भांति विश्वास करने की।

ब्यथित मन से,
"ठाकुर की कलम से"

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