भारत विश्वगुरु क्यों है

भारत विश्वगुरु क्यों है 
विश्व में केवल हिन्दू धर्म ही मानव कल्याण क्यों कर सकता है | 
सिर्फ "शून्य" ही नहीं और भी बहुत कुछ दिया है विश्व गुरू भारत ने - हिन्दू धर्म में . सब कुछ ग्रन्थ और पुराणो में सब लिखित है | जिसे हमारे ऋषि मुनियो ने दिया - 
समय समय पर हमेसा भगवन ने अवतार लिया - भगवन कृष्ण में तो हमें दुनिया का सबसे पवित्र ग्रन्थ दिया गीता | जो भगवन कृष्ण के मुख से एक एक शब्द कहे गए है | - जिससे आज भी दुनिया को सन्ति और सम्बृद्धि देता है | 

1- प्राचीन काल से ही भारत अपनी सभ्यता, संस्कृति, और परम्पराओं से विश्व का मार्ग दर्शन करता रहा है।-
2 -महान अमरीकी लेखक मार्क टवेन ने भारतवर्ष की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए भारत को मानव सभ्यता की जन्मस्थली, इतिहास की माता, कहावतों की दादी, परम्पराओं की पढ़दादी कहा है।
3 - लेखक के अनुसार मानव इतिहास मे सबसे कीमती और समृद्ध संस्कृति केवल भारत की ही देन है।
4 -प्राचीन भारत ने विश्वनिर्माण में अनगिनत योगदान दिए, जिनका का प्रयोग आज भी किया जा रहा है।
5- भारत ने विश्व को गणित, विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन आदि के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया।
6 -महान सिंधु सभ्यता का जनक, विशाल साम्राज्यों और ऎतिहासिक तथ्यों से समृद्ध भारत दुनिया के प्रमुख धर्मो हिंदू 
7 - भारतवर्ष कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जो विश्व को सिर्फ भारत की देन हैं- शून्य और त्रिकोणमिति भारत गणित के क्षेत्र में अपने योगदान को लेकर सबसे आगे रहा है। 
8- महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा था कि दुनिया को गिनती करना भारत ने सिखाया है, - 
9- भारत ने ही अतिमहत्वपूर्ण "शून्य" की खोज की, साथ ही दशमलव और त्रिकोणमिति भी भारत की देन है।
10- विश्व भर में कम्प्यूटर में प्रयोग किए जाने वाले बाइनरी नंबरींग सिस्टम भी भारत द्वारा दिए गए "कुछ नही" के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके आधार पर कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर तैयार किए जाते हैं। "
11- "पाई" को मूल्य सबसे पहले भारत में ही ज्ञात किया गया। 
12- महान गणतिज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का जन्म भी भारत में हुआ था। -
13- "आयुर्वेद" सर्व रोग निदान प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद का जन्म भारत में हुआ।
14 - आयुर्वेद की खास बात यह है कि इससे किसी प्रकार का साइड इफैक्ट नहीं होता है।
15- दुनिया भर में प्रयोग हो रही आयुर्वेदिक चिकित्सा का जनक भारत ही रहा है। आचार्य चरक भारतवर्ष के महान चिकित्सक हुए थे। वर्तमान में भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आयुर्वेद चिकित्सा को अपनाया जा रहा है
16- "योगा" निरोगी रहने की कला "योग" शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अनुशासन के लिए अपनाई जाने वाली एक भारतीय विधि है। 
17 - वेद और संस्कृत प्राचीन समय में गुढ़ रहस्यों से ओतप्रोत वेद, ग्रंथ, साहित्य आदि संस्कृत भाषा में लिखे गए थे। भारतीय धर्म, विज्ञान, सभ्यता और जीवन संस्कृति के घोतक प्रमुख ग्रंथ ऋगवेद, अर्थवेद, सामवेद, यर्जुवेद सहित जीवन सत्य को उचागर करते उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखे गए जो कि विश्व को केवल भारत की ही देन है।
18- कई भाषाओं की माता के रूप में जाने जानी वाली संस्कृत भाषा कर जन्म भारत में हुआ था।
19- प्राचीन समय में भी नालन्दा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों में दुनिया भर से छात्र वेदों को ज्ञान अर्जन करने के लिए आते थे। 
20- नमस्ते "अतिथि देवो भव" विश्वभर में अभिवादन के रूप में प्रसिद्ध "नमस्ते" का जन्म भारत में हुआ था। 
21 - अभिवादन का यह तरीका भारतीयों की गरिमा और मित्रतापूर्णता का प्रतिनिधित्व करता है। "अतिथि देवो भव" की अवधारणा भारत ने ही विश्व को दी जिसका अर्थ है कि "अतिथि भगवान" है।

22- "अतिथि देवो भव" - इस विचार के कारण भारतीय अतिथियों की आवभगत करने के लिए तत्पर रहते है। अतिथि सत्कार की इस परम्परा ने भारत सम्पूर्ण विश्व समुदाय मे अपनी एक अहम पहचान बनाई है। .

23- शतरंज-महाराजाओं का खेल दुनिया भर में दिमागी खेल के नाम से मशहूर "शतरंज" का जन्म करीब 1500 वर्ष पहले भारत में हुआ था।

24- साड़ी भारतीय महिला की पहचान, संस्कृति, अनुग्रह और नम्रता की प्रतीक है साड़ी। दुनिया भर में साड़ी सुंदरता और सादगी का प्रतीक मानी जाती है। गहनों के साथ इस परिधान का प्रिय मेल होता है। सिंधु घाटी सभ्यता युग से ही साड़ी को स्त्री पूरक परिधान के रूप में देख जाता है, इसी खूबी के कारण साड़ी अन्य परिधानों के मुकबलें एक अहम स्थान रखती है,
25- आईटी सैक्टर पिछले दो दशकों से भारत में सूचना और प्रौधोगिकी के क्षेत्र में एक बड़े पैमाने पर और अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। भारतीय आईटी उधोग विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन गया है। कई प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियां दुनिया भर में उच्च कौशल और आईटी सेवा के लिए भारत को चुनती हैं। भारतीय आईटी का विश्व अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है।
26- विविधता में एकता भारत ने अपनी महानता को उजागर करते हुए "विविधता में एकता" का नारा दिया, प्राüचीनकाल से ही इस नारे ने दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। विभिन्न जाति, भाषाओं, परम्पराओं, धर्मो, त्योहारों का मिश्रित भाव भारत में देखने को मिल जाता है। 
27-"वसुदेव कुटूम्बकम" की अवधारणा ने सम्पूर्ण विश्व का ध्यान भारत की ओर खींचा। इस अवधारणा से प्रभावित होकर चीनी यात्री हेंनसांग ने भारत की यात्रा की थी।
28- लोकतंत्र प्रणाली भारत विश्व में सबसे बड़े लोकतांत्रिक शासन का प्रतिनिधित्व करता है। 1 अरब 27 करोड़ कि आबादी वाले देश भारत में लोकतंत्र का निरंतर और सफल रहना किसी आpर्य से कम नहीं है। यहां विभिन्न लोकतांत्रिक संस्थाओं, उनके आंदोलनों और देश के मामलों में जनता की सक्रिय भागीदारी सराहनीय हैं। इस बात में कोई शक नहीं है कि भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली विश्व भर कि लिए प्रेरणा दायक है।
30- ग्रह- उपग्रह भारत की देन है. जो हिन्दू धर्म में इसका पहले से जिक्र है. जिसका ज्योतिस विज्ञानं के में पूरा लेख है .
31- सूर्य की दुरी पहले भारत ने लगाया था | हनुमान चालीसा में एक पंक्ति है:- जुग (युग) सहस्र जोजन (योजन) पर भानु | लील्यो ताहि मधुर फल जानू ||
अर्थात हनुमानजी ने, एक युग सहस्र योजन दूरी पर, स्थित भानु अर्थात सूर्य को, मीठा फल समझ के खा लिया था |
१ युग = १२००० वर्ष, १ सहस्र = १०००, १ योजन = ८ मील, 
युग x सहस्र x योजन = पर भानु, 
१२००० x १००० x ८ मील = ९६०००००० मील, १ मील = १.६ किमी
९६०००००० x १.६ = १५३६०००००० किमी
अर्थात हनुमान चालीसा के अनुसार
सूर्य पृथ्वी से १५३६०००००० किमी की दूरी पर है |
NASA के अनुसार भी सूर्य पृथ्वी से बिलकुल इतनी ही दूरी पर है|
इससे पता चलता है की हमारा पौराणिक साहित्य कितना सटीक एवं वैज्ञानिक है ,
इसके बावजूद इनको बहुत कम महत्व दिया जाता है |

32- आज दुनिया की सभी स्पेस एजेंसी , संस्कृत को कंप्यूटर भाषा के रूप में प्रयोग करते है | यही संस्कृत नहीं होती तो | एक ग्रह से दूसरे ग्रह में बात नहीं हो पाता ।

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