पप्पू से प्रमोट हो बने ट्यूबलाइट

अब मोदी जी जो कहेंगे उसी का अफसाना न बने तो समझ लो बात और बात का मतलब ही बेकार!

उनके ट्यूबलाइट वाले ब्यंग का मतलब निकालने में गोया सम्पूर्ण भारत मस्त है!

हर कोई अपने अपने ढंग से इसकी व्याख्या करने में मस्त है,लेकिन अपने दुबई प्रवास के दिनों में अक्सर मैं दो जाम लगाकर अपने यार दोस्तों को एक डायलाग मारा करता था,और वो था,
"बाप मरा अंधेरे में,बेटा ट्यूबलाइट"!!

और संयोगवश 25 साल पुराना वो ज्ञान अब काम आ गया और मैं अब दावे से कह सकता हूँ कि पप्पू को नया टाइटल मिल गया है!

अपने राहुल बाबा इस मामले में भाग्यशाली हैं कि वो ऐसी खानदानी विरासत से आते हैं जिसके प्रथम महापुरुष को एक षड्यंत्र द्वारा जबरन देश का  प्रधानमंत्री बनाया गया जबकि उनसे काबिल व्यक्ति सरदार पटेल उनके मुकाबले 15 ज्यादा वोट पा चुका था!

बेमन से ही सही लेकिन देश को 1947 में आज़ादी दे रहे अंग्रेज़ अच्छे से जानते थे कि उन्होंने मुस्लिमों से भारत को आज़ाद कराया था और चूंकि द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटिश अर्थव्यवस्था कमजोर व जर्जर हो चुकी थी इसलिये ज्यादा समय तक वो देश पर शासन करने की स्थिति में नहीं रह गए थे,लिहाज़ा उन्होंने एक बार फिर दिमाग चलाया और एक अफगानी मुस्लिम गाज़ी खान के पोते जवाहर खान के नाम के आगे खान हटाकर 'लाल नेहरू' लगाया और बस भारत का मुस्तकबिल फिर से मुस्लिमों के हवाले कर दिया!

चूंकि आज़ाद भारत एकदम जर्जर था और साक्षरता स्तर एकदम नीचे लिहाज़ा उस वक्त लोगों ने जवाहर खान को ही पंडित समझकर 1965 में उनकी मृत्यु तक देश का शासन उनको थमाए रखा!

बाद में उनकी बेटी प्रियदर्शिनी और फिर उनके पायलट बेटे राजीव गांधी तक देश चुपचाप उनकी मुट्ठी में कैद रहा!

हालांकि देश 1982 में जनसंघ से भाजपा बनी पार्टी के नेतृत्व में अंगड़ाई लेने लगा था लेकिन खान्ग्रेस भारत राष्ट्र को अपनी बपौती मानने का ही आचरण करती रही और यह प्रक्रिया 2014 तक चली,जबकि तक कि भारत का केंद्रबिंदु मोदी जी नहीं बन गए!

हाँ तो मैं फिर से आता हूँ एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर राजीव गांधी पर जिन्हें 31 अक्टूबर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति की लहर के चलते जबर्दस्ती देश का मुखिया बना दिया गया!

बस अब इससे आगे मैं उनकी शान में एक भी शब्द नहीं कहूंगा क्योंकि उनके नाम पर देश का कोई भी उल्लेखनीय कार्य दर्ज नहीं है,इसीलिए वो इतिहास के अंधेरे में कहीं खो गए है!

मैं भी फेसबुक पर थोड़ा सा तो फेमस ही हूँ 😛😛😛
अब हो सकता है मोदी जी ने टेलीपैथी से मेरे मन की बात जान ली हो और उनको मेरा ट्यूबलाइट वाला शब्द अच्छा लगा हो😄

अंत में सौ बात की एक बात जो पाठकों को खुद तय करनी है कि अपने राहुल बाबा उस पिता की संतान हैं जिनपर मेरी कहावत सौ प्रतिशत फिट बैठती है!"बाप मरा अंधेरे में और बेटा ट्यूबलाइट"!
वैसे प्रयागराज के लोग इस ट्यूबलाइट शब्द की जगह  पावरहाउस शब्द को भी यूज़ करते आये हैं!
क्षेत्र अपने अपने कहावत अपनी अपनी!!
साहब हम तो अपनी कहेंगे,जय राम जी की!!

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