#मोदी_और_महाभारत।
#महाभारत_युद्ध_की_घटना_है_यह।
महाभारत युद्ध के अंतिम दिन जब श्री कृष्ण अर्जुन का रथ लेकर शिविर पहुंचे तब उन्होंने अर्जुन को पहले रथ से उतरने को कहा।
अर्जुन आश्चर्यचकित होकर बोले
हे केशव मैं रथी आप सारथी।
सत्रह दिनों से मैं देख रहा हूँ कि रोज शाम को युद्ध की समाप्ति के पश्चात शिविर लौटने पर पहले आप उतरते रहे है फिर मैं किन्तु आज यह क्रम उल्टा क्यो ?
केशव बोले :- पार्थ तूम उतरो इसका रहस्य भी समझ मे आ जाएगा।
पार्थ ने केशव को प्रणाम किया और रथ से उतर गए।
उसके बाद भगवान कृष्ण उतरे और उनके उतरते ही रथ की ध्वजा पर बैठे हनुमान जी भी आकाश में उड़ गए,उनके बिदा होते ही,,,
अर्जुन का वह रथ अश्वों सहित धू धू कर जलने लगा,,।
अर्जुन आश्चर्य चकित होकर यह सब देखते रहे।
तब भगवान कृष्ण ने बताया कि हे पार्थ तुम्हारा यह रथ और यह घोड़े कब ही के जल चुके थे,इस युद्ध के दौरान इस रथ पर इतने दिव्यास्त्रों का प्रयोग हुआ है कि इनका नष्ट होना तय था, किन्तु इन्हें मैने अपनी योग माया से थामे रखा था।
और इन #दिव्यास्त्रों को तुम्हारे रथ की ध्वजा पर विराजित #बजरंगबली ने निस्तेज कर रखा था।
आज यदि हमेशा की भांति पहले मैं रथ से उतरता तो मेरे उतरते ही वे भी ध्वजा से उतर जाते ऐसी स्थिति में तुम भी इस रथ के साथ स्वाहा हो जाते,,।
कमोबेश यही हालत आज भारतीय राजनीति और हिन्दू समाज की है।
पिछले छः वर्षो से जो यह #धर्मयुद्ध चल रहा है उसमें हिन्दू संस्कृति पर इतने दिव्यास्त्र चल चुके है कि यदि इस सत्ता रूपी रथ के सारथी #मोदी और उसके ध्वज पर बैठे उनके समर्थकों का विश्वास रूपी #हनुमान जिस दिन विदा हो गए तो समझिए
इस देश का,
इस संस्कृति का,
हिन्दू समाज का,और
हिंदुत्व का धू धू कर जलना तय है।
अब निर्णय आपके हाथ मे है यह धर्मयुद्ध जितना है या बर्बाद होना है।
ब्यथित मन से,
"ठाकुर की कलम से"
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