जल्द ही यह मांग उठने वाली है कि कौन कौन सी कौम कितना कितना टैक्स देती है और कौन कौन सी कौम मुफ्त का माल उड़ाती है।

✍️ जल्द ही यह मांग उठने वाली है कि कौन कौन सी कौम कितना कितना टैक्स देती है और कौन कौन सी कौम मुफ्त का माल उड़ाती है।

यह डेटा इसलिए तैयार करना जरूरी है ताकि हम यह जान सकें कि देश में यह राइट टू स्पीक, राइट टू अप्पोस, राइट टू कंडेम करने वाले लोग कौन हैं। जिनका एजेंडा क्या है? क्या यह लोग इंटलेक्चुअल्स हैं या किसी विशेष कौम को फायदा पहुंचाकर देश द्रोह के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वो कौन लोग हैं जो सिर्फ अपना नम्बर बड़ा कर देश के संसाधनों को बिना मेहनत खाये जा रहे हैं। 
वो कौन लोग हैं जो देश के टैक्स पेयर पर सिर्फ और सिर्फ बोझ हैं। यह टैक्स पेयर कौन हैं? इन टैक्स देने वालों को सरकार अलग से क्या सुविधा देती है जो नॉन टैक्स पेयर को नहीं मिलती। टैक्स पेयर अधिक टैक्स पे करने के लिए क्यों और कैसे प्रेरित हो।

ताकि ऐसे कानून बनाये जा सकें जिससे अधिक  बच्चे पैदा करने पर रोक हो, बिना जरूरत के सब्सिडी लेने की रोक हो, नहीं मानने वाले वर्ग या कौम की नागरिकता रद्द हो, उनका वोटिंग राइट छीन लिया जाय ताकि देश में अपने नम्बर के जोर पर  ये लोग अपनी मर्जी के कानून न बनवा सकें। सच्चे राजनेताओं को भी इनकी मातम पुरसी न करनी पड़े। देश की तररक्की में प्रत्येक नागरिक का हाथ हो और कम से कम देश की तरक्की रोकने वालों को अलग थलग करके दंडित किया जा सके।

एक बार तो देश जलेगा पर अंततः देश तरक्की के लाखों कीर्तिमान स्थापित करेगा।

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