*सत्ताधारियों संदेश स्पष्ट है, आँख बंद कर लेने भर से समस्याएं हल नहीं हुआ करती*

*सत्ताधारियों संदेश स्पष्ट है, आँख बंद कर लेने भर से समस्याएं हल नहीं हुआ करती*

*जब आजादी इतनी सस्ती हो जाय कि कोई लफ़ंगा सरेआम पुलिस पर बंदूक तान दे, तो उस आजादी की कमर तोड़ देनी चाहिए।*

*जब चंद  सिक्को के लिए परदे पर नग्न हो जाने वाली सिनेमाई नर्तकियां अपनी उदण्ड झाँव-झाँव को ही बौद्धिकता समझने लगे तो समझिए कि यह सभ्यता का आपातकाल है। जब अपने बेटे का नाम इतिहास के सबसे क्रूर लुटेरे के नाम पर रखने वाला व्यक्ति बुद्धजीवी कहलाता हो तो समझिए राष्ट्र संक्रमण काल से गुजर रहा है। इससे निपटना होगा, नहीं तो सभ्यता मर जाएगी*।

बिना किसी तार्किक कारण के राष्ट्रीय राजधानी की एक मुख्य सड़क को महीनों तक बन्द कर देने का साहस, और भीड़ में निकल कर सरेआम बाजार फूंक देने की हिम्मत किसी भीड़ के अंदर यूँ ही नहीं आ जाती। उसके पीछे एक पूरा विकसित तंत्र होता है। राष्ट्र के लिए केंसर है यह तंत्र... इसकी चीड़-फाड़ करनी ही होगी...

भारत वह देश है जिसने प्रभु श्रीराम के सबसे बड़े भक्त महाराज विभीषण को कभी नहीं पूजा क्योंकि उन्होंने अपने राष्ट्र के विरुद्ध कार्य किया था। यह धरती सबको क्षमा करती है, पर किसी राष्ट्रद्रोही को नहीं...

शाह बाबू! सत्ता न सहिष्णुता की मूर्ति होती है, न विचारधाराओं की दासी। सत्ता का एक ही तर्क होता है, राष्ट्र! राष्ट्र की संप्रभुता पर उठने वाला हर हाथ काट डाला जाय, इतनी निरंकुशता होनी चाहिए सत्ता में... दिल्ली के जलने का प्रश्न इतिहास उन द्रोहियों से नहीं पूछेगा जो हर आतंकवादी की रक्षा में खड़े हो जाते हैं।

इतिहास उन फर्जी पत्रकारों से भी प्रश्न नहीं पूछेगा जिनके लिए राष्ट्रद्रोह ही कर्तव्य है। पचास वर्ष बाद के समय को इन गद्दारों का नाम भी याद नहीं रहेगा। इतिहास प्रश्न पूछेगा केवल और केवल आप से... मोदी से, .. समय के न्यायालय में राजनीति, कूटनीति और परिस्थितियों का बहाना नहीं चलता साहब! वहाँ केवल यह देखा जाता है कि आप क्या कर सकते थे और क्या किया...
राजनैतिक आलोचनाएं कभी निष्पक्ष नहीं रहीं। हिटलर को बुरा कहने वाले कभी माओत्से का विरोध तक नहीं कर सके। आज का बौद्धिक जगत भले हिटलर को बुरा-भला कहे, पर भविष्य कभी उसकी प्रखरता को नकार नहीं पायेगा।

भूल जाइए विरोधियों का विरोध, भूल जाइए हिन्दू-मुसलमान! शाहरुख हो या करन, वारिस हो या अनुराग, हर वह आँख फूट जानी चाहिए जो राष्ट्र की संप्रभुता के विरुद्ध तिरछी हो रही हो। हर वह हाथ कट जाना चाहिए जो भारत की प्रतिष्ठा को नोचने के लिए आगे बढ़े... यही सत्ता का दायित्व है, यही आपका दायित्व है...

शाह बाबू! सुन रहे हैं न...? 
सुनना ही होगा...

ब्यथित मन से
"ठाकुर की कलम से"

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