प्रधानमंत्री मोदी को "पागल" व्यक्तियों से निपटना आता है.
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मित्रों ने पूछा कि अगर पाकिस्तान उधार लेकर पिछले उधार का ब्याज चुका रहा है और एक तरह से कंगाल हो चुका है। तो ऐसी क्या बात है कि इसकी बंदर घुड़की चालू रहती है या फिर यह युद्ध की धमकी देता रहता है।
इस विषय को मैडमैन थ्योरी (madman theory) या पागल व्यक्ति सिद्धांत के संदर्भ में समझने का प्रयास करते हैं।
मैडमैन थ्योरी के जनक अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को माना जाता है। सोवियत यूनियन और उसके मित्र देशों से निपटने के लिए निक्सन ने अपने विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर से यह अफवाह फैलवा दी कि निक्सन विवेकरहित और अस्थिर व्यक्ति है, एक तरह से विक्षिप्त इंसान है जो पता नहीं कब भड़क कर परमाणु बम से हमला कर दे।
अब परमाणु हथियार सोवियत यूनियन के भी पास था। लेकिन कोई भी राष्ट्र ऐसा युद्ध नहीं चाहता था जिसमे शुरू में ही अमेरिका अप्रत्याशित रूप से विनाशकारी हमला कर दे। यद्यपि रूसी लोग लोग भी बाद में उतना ही विध्वंसकारी जवाब देते, लेकिन अपने स्वयं के नुकसान होने की संभावना से मामले को तूल नहीं देते थे।
इस सिद्धांत को पाकिस्तान ने भी अपना लिया। इसके नेताओ ने यह ढोंग करना शुरू कर दिया कि वे पागल है और भारत को परमाणु हमले में नष्ट कर देंगे।
इस बारे में मैंने 5-6 जनवरी 2019 को लिखा था कि कैसे पाकिस्तान के विदेश मंत्री साहिबजादा याकूब खान ने 1990 में कश्मीर के सन्दर्भ में वी पी सिंह सरकार के विदेश मंत्री आई के गुजराल को परमाणु बम गिराने की धमकी दी थी।
पाकिस्तानियों के मन में यह बात बैठा दी जाती है कि भारतीय (हिन्दू पढ़िए) कायर है और एक घुड़की से डर कर भाग जाएंगे। दूसरी बात यह है कि उन्हें पता है कि भारतीय विवेकशील होते है; वे बीसियों जोड़- घटाना लगाएंगे और इस निष्कर्ष पे पहुंचेंगे कि एक आतंकवादी हमले के जवाब में अंदर घुसकर मारने से युद्ध हो जाएगा जिसमें भारत का इतना-उतना नुकसान हो जाएगा और फिर चुप बैठ जाएंगे। तीसरा, विश्व समुदाय परमाणु युद्ध की आशंका से भारत पे दबाव डालेगा कि वह कोई ऐसी कार्रवाई न करे जिससे बात बढ़ जाए।
पाकिस्तान के इस पागल व्यक्ति सिद्धांत को पहली बार वाजपेई सरकार ने तोड़ा जब उन्होंने संसद पे आतंकवादी हमले के बाद मुशर्रफ की “धमकी” के बावजूद सीमा से सेना हटाने से मना कर दिया। अब मुशर्रफ की हालत खराब हो गयी। उसे पता था कि एक्चुअल युद्ध में उसकी सेना एक दिन भी नहीं टिक पाएगी। और परमाणु शस्त्र के प्रयोग का मतलब पाकिस्तान विश्व के नक़्शे से ही गायब हो जाएगा।
लेकिन सोनिया सरकार के समय में फिर से पाकिस्तान की मैडमैन थ्योरी काम कर गयी। कई आतंकवादी हमले हुए। मुंबई में भयंकर हमला हुआ। कॉंग्रेसियो ने शोर मचाया, लेकिन कोई ऐसा एक्शन नहीं लिया जिससे अगले वहशी हमले के लिए आतंकी दस बार सोचे। एक्शन ले भी नहीं सकते थे क्योंकि एक भी बड़ा हथियार, बुलेटप्रूफ जैकेट और लड़ाकू विमान खरीदा ही नहीं।
फिर मोदी सरकार आ गयी। प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकी हमले का जवाब दिया जाएगा। सर्जिकल स्ट्राइक का पकिस्तान ने खंडन किया क्योंकि उसे स्वीकार करने का अर्थ था कि पाकिस्तानियों को पिलाई गयी घुट्टी के विपरीत भारतीय कायर नहीं है तथा वे बीसियों जोड़-घटाना करके घर में घुसकर जवाब देंगे जिसके बदले में पकिस्तान खुले तौर पे कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। इसके अलावा सर्जिकल स्ट्राइक पे विश्व समुदाय ने भारत का साथ दिया।
तभी एक पाकिस्तानी मंत्री ने पुलवामा हमले के बाद फिर से परमाणु हमले की धमकी यह कहते हुए दी कि भारत के मंदिरों में घंटी बजनी बंद हो जायेगी। क्योंकि उन्हें पता है कि कंगाली के कारण पाकिस्तान युद्ध में नहीं टिक सकता। उसे पता है कि यह बात भारत को भी पता है। अतः, उन्होंने मैडमैन थ्योरी को फिर से अलमारी से बाहर निकाल लिया और झाड़-पोछकर उसका सहारा ले रहे है।
लेकिन पाकिस्तानियों - और भारतीयों - को भी पता है कि प्रधानमंत्री मोदी जवाबी कार्रवाई करेंगे। बस इंतजार है अमेरिका को किसी देश के युद्ध में उलझाए रखने और चीन अपनी खुद के आंतरिक मोर्चे पर परेशान रहे। ऐसे समय हम आसानी से द्रूतगति से कार्रवाई करते हुए, एक दिन में पीओके को कब्जा टर सकते हैं।दूसरा रास्ता है हम अमेरिका को अफ्गानिस्तान से सुरक्षित निकलने में मदद करें, बदले में पीओके प्राप्त करें, लेकिन इसमें रशिया से नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। क्योंकि रशिया की नजर हमेशा अफ्गानिस्तान पर लगी रहती है, एक बार अमेरिका से अफ्गानिस्तान में पराजित हो चुका है रूस।
सबको पता है कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम इस समय बीसियों जोड़-घटाना कर रही है और जवाब ऐसा हो सकता है कि मैडमैन थ्योरी सदैव के लिए अलमारी में घुस जायेगी।
"ठाकुर की कलम से"
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