*अंधविरोधियों का उद्देश्य केवल हिन्दुओं को जाति में तोड़कर कमजोर करना है*

*अंधविरोधियों का उद्देश्य केवल हिन्दुओं को जाति में तोड़कर कमजोर करना है*

अगर कोई ब्राह्मण को गाली देता है तो मैं उसके खिलाफ बोलता हूँ, अगर कोई ठाकुरों को गाली देता है तो मैं इसके खिलाफ भी बोलता हूँ, अगर कोई वैश्यों को गाली देता है तो मैं उसके खिलाफ भी बोलता हूं और अगर  कोई ओबीसी / दलित को गाली देता है तो मैं उसके खिलाफ भी बोलता हूँ। कोई हमारे आराध्यों को अपशब्द बोलता है तो मैं उनसे लड़ता हूँ।

मैं केवल जाति विहीन, मजबूत हिन्दू समाज का पक्षधर हूँ। मेरी नजर में जाति का महत्त्व "खानदानी पेशा" से ज्यादा कुछ नहीं  है। वैसे भी जाति कुछ है ही नहीं। यह केवल खानदानी पेशा ही है। खानदानी पेशे को जाति बताकर सैकड़ों साल आपस में खूब लड़ चुके हो और लड़ाई के चक्कर में विदेशियों की गुलामी भी झेल चुके हो, अब तो अक्ल आ जानी चाहिए।

अपनी अपनी जाति का झंडा उठाये घूमते हो और आपस में लड़ते हो, यह भूल जाते हो कि - यह तुम्हारी ताकत नहीं बल्कि तुम्हारी कमजोरी है। तुम्हारी हरकतों पर तुम्हारे वास्तविक दुश्मन कड़ी नजर रखे हुए हैं और तुम्हारे आपस में लड़कर कमजोर होने का इन्तजार कर रहे हैं। तुम्हारे कमजोर होते ही वो दुश्मन तुमको ख़त्म कर देंगे या गुलाम बना लेंगे।

इस लिए अच्छी तरह से समझ लीजिये कि - जाति की बात करने वाला न तो अपनी तथाकथित जाति का सगा है और न ही देश का। अगर हिंदुत्व कमजोर हुआ तो हिन्दुस्थान ही नहीं बचेगा। फिर अपनी अपनी जाति का लेवल माथे पर लगाकर विधर्मियों की गुलामी करते रहना। तब उसमे शायद आपकी जाति को बहुत ज्यादा सम्मान मिला करेगा ?

अगर भारत को बचाना है तो पहले हिंदुत्व को बचाना होगा क्योंकि हिंदुत्व बचेगा तब ही भारत बचेगा। हिंदुत्व को बचाने के जाति नाम के चक्रव्यूह को तोडना होगा।  इस झूठे जात पात के आडम्बर से बाहर निकलना होगा। इसके लिए जरुरी है अंतरजातीय विवाहों को बढ़ावा देना और जाति की राजनीति करने वाली पार्टियों का बहिष्कार करना।

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