कांग्रेसी पालतू चंदा डकारु गुरुघन्टाल ने चुकाया कांग्रेस से मिली बोटियाँ और छिछड़ों का कर्ज, शंकराचार्य स्वरूपानन्द ने किया CAB का विरोध
कांग्रेसी पालतू चंदा डकारु गुरुघन्टाल ने चुकाया कांग्रेस से मिली बोटियाँ और छिछड़ों का कर्ज, शंकराचार्य स्वरूपानन्द ने किया CAB का विरोध
स्वयं सोचिये की जिनके बाप दादाओं ने मजहब के आधार पर हमारा देश तोड़ा, भला उनकी संतानों का अब भारत भूमि पर CAB के अंतर्गत भारत की नागरिकता पाने का क्या अधिकार ? उन्हें भारत की नागरिकता देकर पुनः इतिहास को दोहराने वाली गलती हम क्यों करें ?
आज पाकिस्तान, क्रिप्टो जेहादी, शांतिदूत, लेफ्ट लिब्रल कबाल, क्रिस्लामोकॉमी, कांग्रेस व् उसके सहयोगी दल और कांग्रेसी पालतू मिलकर सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल का विरोध कर देश में हिंसा आगजनी फ़ैलाने में लगे हैं, और हिन्दू समाज के ठेकेदार बने बैठे यह शंकराचार्य जैसे कांग्रेसी एजेंट हिन्दू समाज के हितों के विरुद्ध जाकर उन्ही गद्दारों के समर्थन में उतरे हुए हैं
राजनितिक व् कूटनीतिक समझ का आभाव हिन्दू समाज में इतना गहरा हो चला है कि धर्म व् अध्यात्म के नाम पर इन स्वघोषित धर्मगुरुओं के आचरण का विश्लेषण किये बिना बड़ी संख्या में लोग इन पाखण्डीओं के आगे नतमस्तक होकर इन्हें भर भरकर दान दक्षिणा देकर इनकी स्वार्थ सिद्धि का साधन बन जाते हैं, इनकी कही प्रत्येक गलत सलत बात का विश्लेष्ण किये बिना, दूरगामी परिणाम व् भावार्थ समझे बिना उसे ब्रह्मवाक्य मानकर उसका समर्थन व् अनुसरण करने लगते हैं,
मैंने पहले भी कहा है अभी पुनः कहता हूँ की अध्यात्म का मार्ग स्वयं ही तलाशना होता है, जो पाखण्डी स्वयं अधर्म के साथ खड़े हुए हैं वे आपको धर्म का सदमार्ग कभी दिखा ही नहीं सकते क्योंकि उन्हें उसकी स्वयं कोई समझ नहीं है,
धर्म केवल पूजा पाठ करना धूपबत्ती जलाकर घँटी बजाने को नहीं कहते, अपने परिजन अपने मित्रों अपने समाज व् अपनी मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्यों व् दायित्वों का निःस्वार्थ व् निष्काम भाव से निर्वहन करना ही वास्तविक धर्म है,
इन पाखण्डि धर्मगुरुओं की चौखटों पर जाकर इनकी झोलियाँ अपनी मेहनत की कमाई से भरने से पूर्व एक बार स्वयं गीता उठाकर भगवान श्री कृष्ण के मुख से निकले गीता के उपदेशों का अध्यन तो कीजिये, गीता में कर्मयोग के विषय में क्या कहा गया है एक बार उसे समझने का प्रयत्न तो कीजिये,
किन्तु आपको अध्यात्म का मार्ग और मोक्ष की शिक्षा भी पकी पकाई चाहिए, जो कुछ आपके बब्बा जी मनघडंत उलटी सीधी व्याख्या बताएंगे आप उसी को बिना जांचे समझे शाश्वत सत्य व् ब्रह्मवाणी मानकर उसी को धर्म समझ लेंगे तो आपके मत्थे ऐसे ही ढपोरशंख गुरुघन्टाल कालनेमि धर्मगुरु पड़ते रहेंगे जो आपके ही धन पर गुलछर्रे उड़ाकर संसार के सभी सुखों का भोग करेंगे और आपके ही समाजिक हितों की जड़ों में तेज़ाब डालकर अपने आकाओं के हुक्म बजाते रहेंगे,
जितना शीघ्र हिंदू समाज इनकी वास्तविकता समझ व् स्वीकार ले उतना ही श्रेयस्कर होगा।
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