कांग्रेसी कुत्ते CAB के विरोध में मुस्लिम लीग के कंधे पर बंदूक रखकर कोर्ट पहुंच गए हैं। वकील होगा कुटिल चप्पल।
जैसे संघ अपने BHP - बजरंग दल आदि कई संगठन चलाता है ऐसे ही कांग्रेस भी मुस्लिम लीग, उलेमा हिन्द, AIMPL आदि संगठन संचालित करती है। जितने आतंकी संगठन हैं, नक्सली, माओ आदि सबको फंड भी कांग्रेस ही उपलभ्ध कराती है और उनको कानूनी सहायता भी कांग्रेस ही मुहैय्या कराती है जिसके लिए पिटीशन भूषण जैसे कुकुरमुत्ते पाले हुए हैं जो दिखाते हैं कि वे आतंकियों का केस मानवाधिकार की वजह से फ्री में लड़ रहे हैं परन्तु कांग्रेस इन जैसे प्यादों को सालों से पाल रही है ताकि सफेदपोसी में कोई गड़बड़ न हो।
ऐसी बात नहीं है कि बेज्जती से मन नहीं भरा इसलिए कोर्ट में एक बार और झींगालाला कराने गए हैं बल्कि बात है छिटकते वोट बैंक को साधने की। जानबूझकर जबरन अपना झींगालाला कराके अपने पिछवाड़े से बहते खून की नुमाइश लगाकर आतंक समर्थकों के वोटबैंक पर डाका डालने के लिए थोड़ा दर्द और सही...
जब कुटिलवा डोर को रिलीजन की ओर खींच रहा था तब मोटाभाई ने रीजन की गुट्टी सेट कर दी थी। ये साले जानते हैं कि जीतेंगे नहीं फिर भी हाय मुसरमान, कमजोर मुसरमान, मेरी जान मुसरमान, मेरी सांस मुसरमान, मेरे अब्बा मुसरमान, मेरी खाला के खसम मुसरमान, हाय दईया मुसरमान, मेरा प्यारा मुसरमान, मेरा जमाई मुसरमान .... यही सब नाटक करके थोड़ा बहुत फाइट में बने रहने को मजबूर हैं। साले घाघ मर मिट जाएंगे पर ठुल्लपच्चीसी नहीं छोड़ेंगे ...
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