"शक्ति का सिद्धांत"
जो शक्तिशाली रहा इतिहास ने उसी का गुणगान किया।
एक सेमीनार में अजीत डोभाल साहब शक्ति के सिद्धांत के ऊपर बोल रहे थे ....उन्होंने बड़े सरल और महज दो लाइनों में शक्ति के सिद्धांत के बारे में बता दिया ...उन्होंने कहा की पंद्रहवीं शताब्दी में बाबर और राणा सांगा का युद्ध हुवा ....युद्ध में बाबर जीत गया राणा सांगा हार गए ...आज दिल्ली में बाबर रोड है उसके वंशजों यानी हुमायु अकबर जहाँगीर शाहजहाँ औरंगजेब रोड भी है लेकिन राणा सांगा या महाराणा प्रताप के ऊपर एक भी सड़क नहीं है ....
इतिहास ये याद नहीं रखता की आप कितने महान थे ..इतिहास सिर्फ उन्ही का लिखा जाता है जो युद्ध में विजयी होता है ....युद्ध में विजयी वही होता है जो शक्तिशाली होता है ..
और शक्तिशाली वही होता है जो अपने विरोधियों पर नियंत्रण रखना जानता है उन्हें दबाना जानता है ....
मित्रों!
आज के संदर्भ में हिन्दू और मुसलमानों का संघर्ष कोई दो चार साल ..या सौ दो सौ साल पुराना नहीं है ..भारत में ये संघर्ष करीब 1000 सालों से भी ज्यादा पुराना है .....712 ई में मोहम्मद बिन कासिम से शुरू हुआ ये संघर्ष आज इंडियन मोजाहिद्दीन ... लश्कर... जैश या हिजबुल के रूप में आज भी मुसलमानों से हमारा संघर्ष जारी है .......
आज से सौ साल बाद यदि हमने मुसलमानों को नियंत्रण कर लिया तो इतिहास हमारा लिखा जाएगा ...और यदि मुसलमान हमपर अपना शाशन स्थापित करने में सफल हुए तो इतिहास उनका लिखा जाएगा .....कोई ये याद नहीं करेगा की किसने कितना अत्याचार किया या किसने कितना अत्याचार सहा .....
दुनियां में उसी कौम का इतिहास पढाया जाता है जो विजयी होती है ..दुनियां उसी व्यक्ति को पढना चाहती है जो सफल है ....अगला व्यक्ति कितना ही मेहनती क्यों ना हो लेकिन अगर वो सफल नहीं है तो उसके लिए इस दुनियां में कोई स्थान नहीं है .....
मोदी और शाह ने बहुत बड़ा दाँव लगाया है .....उन्होंने उन जटिल मुद्दों को भी सुलझाया है जिनके बारे में कहा जाता था की जब तक सूरज चाँद रहेंगे ये मुद्दे कभी सुलझ ही नहीं सकते ..
राम मंदिर .. अनुछेद 370 NRC...कैब ..तीन तलाक जैसे मुद्दों को सुलझाकर भाजपा ने कई राज्यों में अपनी सरकार गवाँई है.....
अगर मोदी और शाह इस धर्म युद्ध में शक्तिशाली बनते गए तो आने वाला इतिहास उनका ही लिखा जाएगा ...और अगर कही वो असफल रहे तो इतिहास में इन दोनों के अवशेष भी नही मिलेंगे ...
शक्ति का सिद्धांत बहुत क्रूर होता है ..यहाँ भावनाओं के लिए जगह नहीं होती ..कोई नहीं याद करेगा की एक प्रधानमन्त्री था जो 19 घंटे काम करता था ..लोग बस इतना याद रखेंगे की वो एक सनकी तानाशाह था ....शक्ति का संतुलन बना रहना चाहिए ....एक शक्तिशाली सरकार ही एक शक्तिशाली राष्ट्र का प्रतिनिधत्व कर सकती है .....और शक्ति शाली बनने के लिए सत्ता को अपने पास रखना होगा ..सत्ता से शक्ति और शक्ति से सत्ता मिलती है ....दोनों एक दुसरे के पूरक है ..शक्ति तानाशाही को जन्म देती है ..और एक शक्तिशाली राष्ट्रवाद के सिद्धन्त को स्थापित करने के लिए तानाशाही ही एक मात्र विकल्प है ..जो हमारे साथ नहीं है वो हमारे खिलाफ है और जो हमारे खिलाफ है वो हमारा दुश्मन है और दुश्मन का दमन क्रूरता पूर्वक होना ही चाहिए। यही शक्ति का वास्तविक और शाश्वत सिद्धांत है ..और मोदी और शाह इस सिद्धांत से भलीभाँति परिचित है ....
"ठाकुर की कलम से"
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