कांग्रेसी खेल जिसे हम जानते/समझते अंजान/बेखबर रहे।
राजस्थान चुनाव से पहले वहाँ बड़े तांडव हुए ... खुब उत्पात मचाया ... चुनाव हुये ... काँग्रेस जीत गयी ... उसके बाद सब शांत ....
मध्यप्रदेश में कभी दलित आँदोलन करते तो कभी सवर्ण ... चुनाव हुये ... काँग्रेस की सरकार बना ... उसके बाद सब शांत ...
छत्तीसगढ़ में रोजाना नक्सलवादी हमले होते थे ... चुनाव हुये ... काँग्रेस जीत गयी ... अब वहाँ सब शांत ...
गुजरात में बहुत बड़ा पाटीदार आँदोलन हुआ ... जो कि पुरी तरह काँग्रेस द्वारा समर्थन प्राप्त था ... हार्दिक पटेल को पटेलों का नेता बना उसे काँग्रेस में मिला लिया गया ... दलितों पर अत्याचार के नाम पर भी खुब बवाल हुये ...
चुनाव हुए भाजपा हारते हारते बची ... लेकिन उसके बाद सब शांत ...
महाराष्ट्र में मराठा आँदोलन हुआ .... भीमा कोरेगांव में दलित vs मराठा हुआ ... चुनाव हुए ... काँग्रेस समर्थन से सत्ता बनी ... अब यहाँ भी सब शांत ....
कांग्रेस का कहना साफ है ... अगर देश में शांति चाहते हो तो सत्ता हमें दो ...
देखो जहाँ जहाँ हमारे हाथ सत्ता है वहाँ कैसी शांति है ...
इसलिये या तो सत्ता हमें सौंपो ... या फिर बवाल के लिये तैयार रहो ...
चुन लो ...
हमारी सरकार या देश में उपद्रव/अशांति/अराजकता का माहौल।
"ठाकुर की कलम से"
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