*"भीम राव अंबेडकर का विभत्स खेल इतिहास के पन्नों से"*भारत के जीडीपी के निर्माताओं के वंशजों को कुंठा हीनता अपराधबोध और घृणा से भरने के #अपराधी हैं भीमराव अंबेडकर।

*"भीम राव अंबेडकर का विभत्स खेल इतिहास के पन्नों से"*

भारत के जीडीपी के निर्माताओं के वंशजों को कुंठा हीनता अपराधबोध और घृणा से भरने के #अपराधी हैं भीमराव अंबेडकर।

मित्रों,
यह जनवरी है, जो किया पिछले सालों में, वो तो नींव थी वर्तमान की। भविष्य की ईमारत इसी नींव पर खड़ा करना है।

शास्त्रों  मे लिखा है - 
"ईर्ष्या घृणी त्वसंतुस्टह क्रोधिनों नित्यसंकितह।
परभागर्योपजीवी च खड्ते दुख्भागिनह ।।"

अर्थात ईर्ष्या घृणा स्वयं से असंतुष्ट क्रोधी सदा शंका करने वाला दूसरों के ऊपर निर्भर होना , ये छ: कारण दुख भोगने वाले का।

#दलित शब्द का नाम लीजिये और ये 6 कारण आपकी आँखों के सामने तिरोहित होने लगते हैं।

भीमराव अंबेडकर के दादा "ईस्ट इंडिया कंपनी" के सिपाही थे। उनके पिता ब्रिटिश आर्मी मे JCO थे, उस जमाने मे जब गाँव में अंग्रेजों द्वारा नियुक्त चौकीदार और अमीन भी बड़ी हस्ती हुआ करता था।
विभिन्न लेखों से हमें पता चलता है कि अंबेडकर को प्राइमरी पाठशाला मे किसी ब्राह्मण चपरासी ने पानी नहीं पिलाया। किस ब्राह्मण ने ? ये नहीं बताता।
 
अंबेडकर के 14 भाई बहन थे। अंबेडकर 14 वीं संतान थे। 
अंबेडकर ने एल्फिस्टीन हाई स्कूल बोम्बे से मैट्रिक पास किया जो कि एक अंग्रेजी स्कूल था।

अंबेडकर इतने ब्रिलिएंट थे कि मैट्रिक में 750 में से 282 मार्क्स से उत्तीर्ण हुए। कौन सी ग्रेड बनी इनकी? गुड थर्ड क्लास या सेकंड क्लास। 
अंबेडकर की जीवनी लिखने वाले धीर लिखते हैं - बोम्बे में महार, बिहार में दुसाध, और मद्रास में पेरियार नामक जातियां ईस्ट इंडिया कंपनी के संपर्क में सबसे पहले आयी, जिन्होंने उनकी फौज को जॉइन किया। 1892 में महारो की सेना में भर्ती करना बंद कर दिया ब्रिटिश सरकार ने। 
ईस्ट इंडिया और ब्रिटिश क्या करने आये थे भारत में?

अभी हाल में भारत के विदेशमंत्री ने खुलासा किया कि वे भारत को लूटने आये थे। और 190 साल में उन्होंने भारत से 45 ट्रिलियन डॉलर की लूट की। 

ऐसे में महार, दुसाध और पेरियार समुदायों का ऐतिहासिक चरित्र लुटेरों के साथ लूटने में सहयोग देने का बनता है। इनसे भारत के पक्ष में काम करने की अपेक्षा कैसे किया जा सकता है? 

और उन्होंने भारत के पक्ष्य में नही, ब्रिटिश के पक्ष्य में काम किया, इस बात के पक्के प्रमाण हैं। 

इतिहास में कहीं नहीं पढा है कि अंबेडकर 1942 से 1946 तक किसके साथ थे जब गांधी ने #अंग्रेजों_भारत _छोड़ो का नारा लगाया था। 

इतिहास में कहीं नहीं पढा कि अंबेडकर के ऊपर महान #कम्यूनिस्ट नेता M N Roy के साथ मिलकर 1942 से 1946 तक सरकारी धन के #गबन का आरोप लगा था। कब ? जब 1942 से 1945 में ये ब्रिटिश सरकार में कबीना मंत्री के पद पर मौज कर रहे थे। 

प्रमाण संलग्न है।
इतिहास ये भी नहीं बताता कि अमेरिका मे अंबेडकर किस राजपूत राजा द्वारा दान किए गए पैसे पर अध्ययन करने गए थे ? 

खैर छोड़े उस बात को।
आइये इतिहास को थोड़ा फिर से खंगालते हैं। नए शोध से पता चला है कि 0 AD से 1750 तक विश्व की 24% जीडीपी का निर्माता था और 1750 मे ब्रिटेन और अमेरिका दोनों मिलकर मात्र 2% जीडीपी के निर्माता थे।

1900 आते आते लूट और भारतीय ग्रामीण उद्योग को नष्ट करने के कारण भारत मात्र 1.8 % जीडीपी का हिस्सेदार बचा।

Will Durant अपनी पुस्तक में लिखते है कि मनुष्य के मस्तिस्क और कारकुशीलव हस्तकला के द्वारा निर्मित विश्व मे वर्णित ऐसी कोई भी वस्तु, जिसकी बहुमूल्यता उसकी उपयोगिता के कारण हो या फिर उसकी सुंदरता के कारण, उन सब का निर्माण भारत मे होता था, जब समुद्री लुटेरे भारत की धरती पर कदम रखे थे।

*"Will Durant की पुस्तक The Case for India - 1930 से उद्धृत कुछ अंश: PART -1
भारत का बहुसंख्यक शिक्षा और स्वस्थ्य से अभी भी बहुत दूर है / मेरे साथ प्राइमरी मे एक मित्र पढ़ता था विनोद सोनकर / गज़ब का हस्तलेख था , एक एक शब्द मोतियों मे पिरोया हुआ / बहुत दिनों बाद गाँव गया तो गाँव के पुराने सहपाठियों से उसके बारे मे पूंछा तो उन्होने बताया कि भैया उसने जूनियर हाइ स्कूल के बाद पढ़ाई छोडकर पारिवारिक पेशे मे लग गया /
हजारों साल से भारत विश्व पर आर्थिक वर्चस्व बनाए रखा था 1750 तक / समुद्री डकैत आए तो उन्होने अर्थ धर्म समाज सबको नष्ट  किया, कानून बनाकर चले गए, और दे गए मानसिक गुलामी / चंद्र भान प्रसाद एक बड़े दलित चिंतक हैं, जो पता नहीं अपने बाप का जन्मदिन मानते हैं कि नहीं ये तो पता नहीं लेकिन "मैकाले" का जन्मदिन धूम धाम से मनाते है और अंग्रेज़ी को ज्ञान कि देवी बोलकर रोज अगरबत्ती दिखाते हैं उसको / उनका मानना है कि अंग्रेजों ने शूद्रों को शिक्षा का अधिकार दिलवाया , वर्ण ब्राह्मणों ने तो उनको हजारों साल से उनको शिक्षा  से दूर रखा था।

इन विद्वानों को ये नहीं पता शायद , या पता भी हो तो ये अपने  समर्थकों की आँख मे धूल झोंकते होंगे कि जब तक शिक्षा ब्राह्मणों के हांथ मे थी तब तक भारत मे शिक्षा लेने ग्रहण करने का हर कोई अधिकारी था।

जबकि ब्रिटेन में उस समय मात्र नोबल परिवारों को ही शिक्षा तक पहुँच थी।

1830 मे अंग्रेजों द्वारा संकलित डाटा ये बताता है कि ब्राह्मणी शिक्षा व्यवस्था मे स्कूल जाने वाले शूद्र छात्रों की संख्या ब्राह्मण छात्रों से चार गुणी थी / लेकिन लूट और मनी ड्रेन और भारत की ग्रामीण उद्योगों के नष्ट होने की  वजह से जब करोड़ों लोग बेरोजगार बेघर हुये , तो उनकी प्रारम्भिक आवश्यकता रोटी कपड़ा और मकान होगा कि शिक्षा ??

गणेश सखाराम देउसकर ने 1904 मे लिखा कि 1875 से 1900 के बीच 22 करोड़ भारतीयों मे से 2 करोड़ लोग अन्न के अभाव मे प्राण त्याग देते हैं क्योंकि अनाज कि कमी नहीं थी बल्कि उनकी जेब मे अनाज खरीदने का पैसा नहीं था /

इसी संदर्भ मे  एक प्रसिद्ध लेखक Will Durant का 1930 का एक लेख प्रस्तुत कर रहा हूँ /  जो मेरी बात को प्रमाणित करता है /
( Will Durant is one of the most popular writers of world . He is an american , and is considered to be most unbiased thinker . This book was banned by British Government .)

Will Durant की पुस्तक The Case for India - 1930 से उद्धृत कुछ अंश: PART -1

" मैनें अपनी आँखों से लोगों को भूंख से मरते देखा है।
और ये दुर्दशा और भुखमरी overpopulation या अंधविस्वास के कारण नहीं है , जैसा कि उनके benificiery ( अंग्रेज) दावा करते हैं ।
बल्कि आज तक के इतिहास में एक देश द्वारा दूसरे देश का सबसे घोर और अपराधिक शोषण के कारण है। मैं बताना चाहता हूँ कि इंग्लैंड ने भारत का खून सैलून साल जिस तरह से चूसा है उसके कारण भारत आज मृत्यु के कगार पर खड़ा है ।" पेज 1-2

" भारत पर ब्रिटिश की जीत एक व्यापारी कंपनी का आक्रमण और उन्नत सभ्यता का विनाश था , जिसका (कंपनी का ) न कोई आदर्श था , न आर्ट के प्रति कोई सम्मान था , वह मात्र भौतिक उपलब्धि की लालच में मदान्ध लोगों का बन्दूक और तलवार के दम पर अव्यवस्थित और असहाय लोगों के ऊपर आक्रमण था जो उत्कोच देकर और हत्याएं करके राज्यों पर अधिकार जमा कर चोरी करने से शुरुवात करते हैं और तत्पश्चात इस अपराध को वैधानिक जामा पहनकर पिछले 173 साल से बुरी तरह लूट (plunder) रहे हैं , और ये आज भी जारी है जब हम इन घटनाओं को लिख और पढ़ रहे हैं ।"
पेज -7

" जो लोग आज हिंदुओं की अवर्णनीय गरीबी और असहायता आज देख रहे हैं , उन्हें ये विश्वास ही न होगा ये भारत की धन वैभव और संपत्ति ही थी जिसने इंग्लैंड और फ्रांस के डकैतों (Pirates) को अपनी तरफ आकर्षित किया था। इस " धन सम्पत्ति" के बारे में Sunderland लिखता है :---
" ये धन वैभव और सम्पत्ति हिंदुओं ने विभिन्न तरह की विशाल (vast) इंडस्ट्री के द्वारा बनाया था। किसी भी सभ्य समाज को जितनी भी तरह की मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्ट के बारे में पता होंगे ,- मनुष्य के मस्तिष्क और हाथ से बनने वाली हर रचना (creation) , जो कहीं भी exist करती होगी , जिसकी बहुमूल्यता या तो उसकी उपयोगिता के कारण होगी या फिर सुंदरता के कारण, - उन सब का उत्पादन भारत में प्राचीन कॉल से हो रहा है । भारत यूरोप या एशिया के किसी भी देश से बड़ा इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग देश रहा है।इसके टेक्सटाइल के उत्पाद --- लूम से बनने वाले महीन (fine) उत्पाद , कॉटन , ऊन लिनेन और सिल्क --- सभ्य समाज में बहुत लोकप्रिय थे।इसी के साथ exquisite जवेल्लरी और सुन्दर आकारों में तराशे गए महंगे स्टोन्स , या फिर इसकी pottery , पोर्सलेन्स , हर तरह के उत्तम रंगीन और मनमोहक आकार के ceramics ; या फिर मेटल के महीन काम - आयरन स्टील सिल्वर और गोल्ड हों।इस देश के पास महान आर्किटेक्चर था जो सुंदरता में किसी भी देश की तुलना में उत्तम था ।इसके पास इंजीनियरिंग का महान काम था। इसके पास महान व्यापारी और बिजनेसमैन थे । बड़े बड़े बैंकर और फिनांसर थे। ये सिर्फ महानतम शिप बनाने वाला राष्ट्र मात्र नहीं था बल्कि दुनिया में सभ्य समझे जाने वाले सारे राष्ट्रों से व्यवसाय और व्यापार करता था । ऐसा भारत देश मिला था ब्रिटिशर्स को जब उन्होंने भारत की धरती पर कदम रखा था ।"
पेज- 8-9

नोट- मेरा प्रश्न है कि ये थी भारत की आर्थिक मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रियल और कमर्शियल तस्वीर जब डकैत भारत में आये।

लेकिन जब ये डकैत गए तो ये सारा आर्थिक ढांचा खत्म था। भारत जो अनंत काल से 1750 तक पूरी दुनियाँ की 25% जीडीपी का मालिक था , और डकैत लोग मात्र 2% के ।
1900 में भारत की जीडीपी 25 से घटकर मात्र 2% बचा।
अब प्रश्न ये है कि will durant द्वारा प्रस्तुत मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री के मैन्युफैक्चरर का क्या हुवा ?
उनकी वंशजों का क्या हुआ ?
कहाँ गए वो ??"*
 
अब प्रश्न ये है कि इस जीडीपी का निर्माता कौन था ? 
और इस जीडीपी के नष्ट होने के कारण उन निर्माताओं के वंशजों का क्या हाल हुआ ?
 
ये प्रश्न  क्या अस्वाभाविक है ? इस पर रिसर्च नहीं होना चाहिए?

उनका हाल ये हुआ कि पॉल बाइरोच के अध्ययन के अनुसार इन उत्पादों पर आधारित 87.5% बेरोजगार और बेघर हो गए।

अमिय कुमार बघची ने 1807 में लिखी हैमिल्टन बूचनन की पुस्तक के हवाले से बताया है कि बिहार के मात्र 2 जिलों पूर्णिया और भागलपुर मे 1809-1813 और 1901के बीच 6.5 लाख लोग बेरोजगार हो गए।

 इसकी पुष्टि कार्ल मार्क्स का 1853 का लेख भी करता है कि 1815 से 1835 के बीच ढाका मे मलमल और सिल्क निर्माताओं की संख्या डेढ़ लाख से घटकर मात्र 20 हजार बचती है।

कहाँ गए ये लोग जीवन यापन के लिए ? ज़्यादातर गांवों मे कृषि में मजदूर बन गए। कुछ मिलों मे नौकरी करने लगे।
 
 #विल_दुरान्त के अनुसार जो लोग सौभाग्यशाली थे और जिनकी जमीन अंग्रेजों ने लगान न देने के कारण जब्त कर लिया था, और जो मिल और खदानों मे काम न पा सके तो शहरों मे #गोरों_का_मैला उठाने लगे क्योंकि जब नौकर इतने सस्ते हों तो शौचालय बनाने की झंझट कौन पाले।

विल दुरान्त और सखाराम देउसकर के अनुसार 1875 से 1900 के बीच 22 करोड़ भारतीयों  मे से
2.5 से 3 करोड़ लोग प्राण त्याग दिये क्योंकि बेरोजगार हुये लोगों के वंशजों के पास अन्न खरीदने का पैसा नही था।
1901 मे HH RIsley ने नाक की चौड़ाई के आधार पर #आर्य_बाहर_से_आए नामक फर्जी कथा को प्रमाणित करते हुये जो जनगणना की उससे ऊंची और नीची Caste का आधार बना।

1928 मे सायमन कमिसन जब भारत आया तो मात्र 3 वर्ष पूर्व , राजनीति मे कदम रखने वाले महत्वाकांछी अंबेडकर को प्रशासनिक पराश्रय दिया जाता है जो 1932 मे एक रिपोर्ट तैयार करते है लोथियन समिति को सौंपने के लिए जिसमे वे प्रमाणित करते हैं कि - " जो अछूत नहीं है उसको भी उनके कल्पना के आधार पर अछूत मानना चाहिए। 
Lothian Committee - Ambedkar.org
www.ambedkar.org/.../14E.%20Dr.%20Ambedkar%20with%20the%20S.

फ्रेंचाइजी अर्थात वोट देने के अधिकार के बारे में जब साइमन समिति में उनसे पूँछा जाता है कि अनुशूचित जाति और विमुक्त जाति ( ST and Criminal Tribes) को वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए ?
डॉ आंबेडकर ने साफ इंकार कर दिया।

*आज बहुत से लोग बाबा साहेब को पूजते हैं ,लेकिन उनके कृत्य और चरित्र का आकलन करते हुए क्या उनकी बनाई हुई फर्जी इमेज स्वत ध्वस्त नही हो जाती?*

1935 के कानून मे oppressed Class Of India act आता है और 1936 मे 529 caste की एक लिस्ट बनती है जिसको Scheduled Caste कहा गया। बाद मे गांधी के हरिजन की गाड़ी छोडकर अंबेडकर की #पुरुष_सूक्त  की सीधी पर चढ़ते हुये #ईशा  के आशीर्वाद से, #वा_क_ई  शाजिश के शिकार होते हुये आज #दलित के नाम से जाने जाते हैं।

"ठाकुर की कलम से"

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