ट्रंप अपने चुनावी फायदे के लिए ईरान से शुरू किया जंगी तनाव, भारत में मोदी सरकार के लिए असहज स्थिति"

"ट्रंप अपने चुनावी फायदे के लिए ईरान से शुरू किया जंगी तनाव, भारत में मोदी सरकार के लिए असहज स्थिति"

"भारत को अमेरिका और ईरान के बीच निभानी चाहिए अहम भूमिका"

'इस्लामिक देशों पर लड़ाई का पड़ेगा बड़ा असर' कोई देश जंग नहीं चाहता

अमेरिका ने ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने के नाम पर पहले से ही कई आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं। अब सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने अमेरिका से बदला लेने और दुनियाभर में अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने की बात कही है। इस क्षेत्र में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। कुछ लोगों के अनुसार, तीसरे विश्वयुद्ध की आहट आने लगी है। 

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की असल वजह क्या है?

अमेरिका के हवाई हमले में जनरल कासिम सुलेमानी की मौत ईरान के लिए बड़ा हादसा है। असल वजह के लिए आपको 1979 तक जाना पड़ेगा। वहां जब रिवॉल्यूशन हुआ तो अमेरिकन दूतावास के अधिकारी 444 दिन तक बंधक रहे। ईरान का पक्ष देखें तो इनकी शिकायत 100 साल पुरानी है। ईरान में अमेरिका और ब्रिटेन जब कॉलोनियन पावर में थे तो उनका आर्थिक और अन्य तरह से शोषण किया था। 

अगर ये युद्ध होता है तो इस्लामिक देशों का रुख कैसा रहेगा?

मुख्य देशों की तो सबके अलग-अलग विचार हैं। सऊदी अरब ईरान को लेकर असहज है। अब तक वो ईरान के खिलाफ थे, लेकिन अगर वहां जंग छिड़ गई तो सबसे बड़ा हमला तो सऊदी अरब पर ही होगा। अब बात रही बाकी देशों की तो हर एक देश अपनी पॉजिशन लेंगे अपने-अपने राष्ट्रीय हित के मुताबिक। बात रही अगर इजरायल की तो मुझे लगता है कि कोई देश ऐसा नहीं है दुनिया में जो जंग चाहता है, ऐसा कोई देश नहीं है। 

यदि अमेरिका—ईरान के बीच युद्ध की स्थिति बनती है तो भारत का रुख क्या होगा?
हमको डिप्लोमसी का फायदा उठाना चाहिए, ताकि जंग न हो और इसमें भारत को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री पूरे इलाके में कई दफा गए हैं और वहां के नेता भी भारत आए हैं। हमारा रिश्ता बहुत गहरा हो चुका है। उसमें रणनीतिक भागीदारी का भी जिक्र है, लेकिन हमारी तरफ से कोई पहल नहीं हो पा रही है। हमारे विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री को अपनी तरफ से पहल चाहिए।

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध हुआ तो भारत और उसकी अर्थव्यवस्था पर इसका काफी खतरनाक असर होगा। 

डोनाल्ड ट्रंप इस साल होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव की वजह से ईरान मामले को तूल दे रहे हैं?ट्रंप सोच-विचार में ज्यादा नहीं पड़ते हैं। वो कहते हैं और खुद भी ऐलान किया है कि वो अपनी दिल के कहे अनुसार चलते हैं, जो उनको सही लगता है। ये मेरा मानना है कि वो एक पॉपुलर लीडर हैं। अपने खुद के फायदे के लिए उन्होंने ये किया है। उनके ऊपर एक दबाव था, वो दबाव ये था कि मुझे अपनी छवि दुरुस्त करना चाहिए। 

"ठाकुर की कलम से"

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