*जीवन युद्ध है*

*जीवन युद्ध है* : *इसलिए परमात्मा से जुड़े रहें*

जीवन में जब कोई संकट आता है तो हमें परमात्मा की निकटता जल्दी मिल जाती है, दुख में मनुष्य भगवान की और निकट चला जाता है; जब भगवान के निकट जाएँ, उनसे बात करें तो उनमें करुणा हो और यदि कुछ मांगना हो तो कृपा मांगे *…*..

श्री राम-रावण युद्ध में कुंभकरण का ऐसा आतंक छाया कि वानर घबरा कर भागने लगे ऐसा लगा की थोड़ी देर और कुंभकरण जीवित रहा तो कोई वानर नहीं बचेगा, तभी वे राम जी के पास गए उन्हें कहा *रक्षा कीजिए …*..

यहां तुलसीदास जी ने लिखा-
शकरुन बचन सुनत भगवाना!
चले सुधारि सरासन बाना!!
वानरों की करुणा भरी बात सुनते ही भगवान धनुष-बाण उठाकर चले *…*..

जीवन में कभी ऐसा संघर्ष आ जाए तो परमात्मा से करुणा युक्त चर्चा कीजिए, उनसे कहना हम आपसे सांसारिक चीजें नहीं मांगते, वह तो हमें ही अर्जित करना है; आप तो बस कृपा कर दीजिए; यहां शब्दों पर ध्यान दीजिए कि '''करुणा भरे वचन सुनते ही भगवान चल पड़े''' आगे लिखा है- *राम सेन निज पाछें घाली* भगवान इतनी सुरक्षा देगा कि हमको अपने पीछे कर लेगा *…*..

जीवन भी एक ऐसा ही युद्ध है, इसलिए जिंदगी में परमात्मा से जुड़े रहिए, शेर की गुफा में हाथी के मस्तक पर जो गजमुक्त मणि होती है, वह फिर भी मिल सकती है, लेकिन गीदड़ के घर में जाएंगे तो मांस-हड्डियों के अलावा कुछ नहीं मिलेगा *…*..

*इसलिए संबंध रखिए अच्छे लोगों से, महापुरुषों से, उस ईश्वर से; वह परम शक्ति कुछ ऐसा देगी जो आपके जीवन युद्ध में काम आएगा …*!!

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