"कम्युनिस्ट/कम्यूनिज्म सिर्फ अराजक और विध्वंसक" सेक्स, शराब और कबाब को निकाल दिया जाय तो कम्युनिज्म में कुछ नही बचेगा।
"कम्युनिस्ट/कम्यूनिज्म सिर्फ अराजक और विध्वंसक"
सेक्स, शराब और कबाब को निकाल दिया जाय तो कम्युनिज्म में कुछ नही बचेगा।
20-22 साल की उम्र जब लड़के लड़कियों के हारमोन उछाल मार रहे हों तब उनको एक ऐसी विचारधारा मिल जाय जो उनके सभी परिवारिक संस्कार को भुलाने के बावजूद भी बिना कोई अपराधबोध पैदा किये शराब, सिगरेट और सेक्स की व्यवस्था कर दे तो भला वह विचारधारा विश्वविद्यालयों मे क्यूं नही फैलेगी?
साथ ही रोज नहाने, समय पर उठने, व्यवस्थित रूप से रहने, रोज़ क्लास करने की भी जहमत नहीं।
खुजैला शरीर रहे, बेतरतीब बाल रहे, गन्दी दाढी रहे लेकिन सब क्रान्ति के नाम पर फैशनेबल मान लिया जायेगा।
20-22 साल के नये उमर के लौन्डों, लफाड़ो के लिये इससे अच्छा क्या मिलेगा??
यकीन मानिए कम्युनिज्म नये उमर के बच्चों में खासकर जो विज्ञान के छात्र नहीं रहते उनमें जोर पकड़ने का यही एकमात्र कारण हैं।
एक मजेदार तथ्य यह भी है की सबसे ज्यादा नास्तिकता, तथाकथित तर्कशील चिन्तक, छद्म सेक्युलरिज़्म आदि का ढिंढोरा वहीं लोग पीटते हैं जो विज्ञान के छात्र नहीं होते हैं।
जिसका कारण यह है की यह छात्र भौतिकी के महत्वपूर्ण सिद्धान्त जैसे द्वैत-अद्वैत, न्यूटेनीयन और श्रोदींगर के फिजिक्स के द्वन्द, युनिफाईड थ्युरी, एन्त्रोपी का सिद्धांत एवं ब्रह्मांड का भविष्य, सिग्मुंड फ्रायड की माडर्न साइकेट्री आदि मामलो में काफी हद तक अनपढ़ रह जाते हैं।
ऐसे में ये मूर्ख छात्र जानकारी और जिज्ञासा के अभाव में बड़ी बड़ी बाते करने लगते हैं।
और चुकी देश मे मूर्खों और जाहिलों की भी एक बड़ी संख्या है इस कारण इन मूर्खों के विचारों को इन्टरटेन करने वाले आडियंस भी ठिक ठाक से मिल जाते हैं।
यकीन मानिये इस विचारधारा का वास्तविक जीवन मे कोई रोल नहीं है।
एक और मजेदार बात इस विचारधारा का देश के वास्तविक मुद्दों से भी कोई सरोकार नहीं।
ये तो इतने बड़े जाहिल हैं की ये उलटा जनता को ही ज्ञान देने लगते है की, सुनो रे बावा तुम सब मूर्ख हो, तुम्हारा असली मुद्दा फलाना नही ढेमाका है।
अब आप यह सोचिये की जिसे इतना तक सेन्स नही है की जो व्यक्ति जमीन पर जैसा झेल रहा है वह उसके लिये मुद्दा नहीं होना चाहिये। असली मुद्दा ये गन्हौरे बतायेंगे।
बाकी दुनियाँ पागल एक यहीं चालाक।
इसलिये देश की कम्यूनिस्टों को लेकर बहुत चिंतित नहीं होना चाहिये बल्कि अराजक/विध्वंसक तत्वों को देश से उखाड़ फेंकना होगा।
"ठाकुर की कलम से"
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