"धर्म युद्ध के लिए तैयार रहें"

"धर्म युद्ध के लिए तैयार रहें"

जब पितामह प्रतिदिन दसियों हजार योद्धाओं को ठिकाने लगा रहे थे, तब किसी को सूर्योदय और सूर्यास्त के समय की चिंता नहीं हो रही थी. . . 
कौरव पक्ष आह्लादित था, और पांडव चिंता में उतने ही पड़े हुए. . . . 
फिर भी दोनों में से कोई पक्ष सूर्योदय और सूर्यास्त का समय नहीं नाप रहा था बैठ के..!!

लेकिन जिस विशेष दिन के लिए अर्जुन ने सूर्यास्त से पूर्व जयद्रथ को रणभूमि में सुलाने की भीषण प्रतिज्ञा ली, कौरवों के तोते उड़ गए। 

अगले दिन पूरी कौरव सेना के दिमाग में कहीं भी पांडवों को परास्त करने की रंचमात्र कोई योजना नहीं थी। द्रोणाचार्य के नेतृत्व में वे सभी कौरव योद्धा पद्मव्यूह बना कर येनकेनप्रकारेण केवल जयद्रथ के प्राणों की रक्षा भर का लक्ष्य लिए खड़े थे। 

लेकिन जब अर्जुन ने द्रोण, कृप, कर्ण, दुर्योधन, अश्वत्थामा आदि महारथियों द्वारा सर्वतोभावेन रक्षित पद्मव्यूह को भंग कर उसमें प्रवेश किया, तो सबकी सांस अटक गयी, और दुर्योधन समेत सभी कौरव योद्धा टकटकी लगाए केवल सूर्य को घूरते हुए मन ही मन उसके शीघ्र अस्त हो जाने की प्रार्थना करने लगे। 

इसी बीच कृष्ण-प्रेरित छद्म सूर्यास्त हुआ और सभी कौरव चहकने लगे। प्रसन्नमुख जयद्रथ तो उछलता हुआ व्यूह से बाहर ही निकल आया। 

खुशी से पागल होता दुर्योधन ताल ठोंक-ठोंक कर अर्जुन से लगा पूछने - कि "बोलो-बोलो, कब कर रहे हो आत्मदाह? तुम्हे अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण तो है न?" किंतु जैसे ही वह मायानिर्मित सूर्यास्त छँटा. . . . आगे क्या हुआ, सब जानते ही हैं।

आज ठीक वैसा ही वातावरण देश में छाया हुआ है। पहले इसी सरकार को चुनौतियां दी जाती थीं कि:- "बोलो कब बनाओगे राम मंदिर - तारीख बताओ", "बोलो कब हटाओगे 370 - तारीख बताओ", "बोलो कैसे और कब बनाओगे ट्रिपल तलाक पर कानून - तारीख बताओ" 

.....और जब मोटा भाई ने संकेतों में ही एक डेफिनेट तारीख बता दी - कि "2024 चुनाव आने के पहले पहले अपने एजेंडे का हर एक वादा पूरा करके दिखाएँगे", तो अब विधवा-विलाप चल रहा है कि ये सरकार इतनी जल्दी में क्यों है, ऐसी भी क्या अर्जेंसी है भइया, चरखा-निपोरा. . .!!!

अवैध इस्लामी घुसपैठिये ही आज “जयद्रथ” हैं, और उनका उन्मूलन करने के लिए जब सरकार CAA, NPR, NRC आदि का उपक्रम आरंभ कर रही है तो क्या तृणमूल, क्या कांग्रेस, क्या AAP, क्या NCP, क्या समाजवादी पार्टी, क्या शिवसेना - ये सारे के सारे महारथी जयद्रथ के प्राण बचाने के लिए व्यूहबद्ध हो रहे हैं, सरकार पर छींटाकशी और देश भर में आगजनी + तोड़फोड़ कर रहे हैं।

लेकिन इन विपक्षियों को एक और बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए - जयद्रथ-वध से कौरव इतने कुपित हो उठे थे कि उन्होंने सूर्यास्त के पश्चात युद्ध रोक देने का नियम भी डस्टबिन में डाल दिया, और अलायुध जैसे राक्षसों का आह्वान कर रात में भी युद्ध करना जारी रखा। 

जयद्रथ के प्रतिशोध की आपाधापी में वे भूल ही गए कि अर्जुन का एक नाम "गुडाकेश" (निद्रा पर विजय पा लेने वाला) भी है, और दिन हो अथवा रात - अर्जुन किसी भी प्रहर शत्रुओं का संहार उसी दक्षता से करने में सक्षम थे। कौरव सेना ने उस दिन सूर्यास्त का शंख नहीं बजाने की बड़ी भारी कीमत चुकाई - अर्जुन के घोर युद्ध और घटोत्कच के मायावी प्रहारों ने कौरव सेना के एक बहुत बड़े भाग को उसी रात समाप्त कर दिया।

JNU हो, जामिया मिलिया, या UP में पुलिस पर तमंचों से फायरिंग की घटनाएं - जाने अनजाने ये सब के सब सरकार रूपी अर्जुन को कुपित करने वाले उपक्रम हैं, और यदि कहीं सचमुच अर्जुन ने कुपित हो रात्रिकालीन युद्ध का इनका आह्वान स्वीकार कर रौद्र रूप धर लिया - तब जो महाविध्वंस होगा उसके लिए यह समूचा अराजक विपक्ष स्वयं ही उत्तरदायी होगा। 

जनता तो केवल संजय की भांति चहक-चहक युद्ध का लाइव-टेलीकास्ट देख ताली पीटेगी - इनके समर्थन में कोई मातमपुर्सी करने नहीं आएगी! 


मित्रों! हम शास्वत जगे है, और हमें जागना हीं होगा। हम सोकर अपने सनातनी वीरों से गद्दारी नहीं कर सकते। सोये तो वो हैं जिन्हें देश काल की चिंता नहीं, हम जगे हैं और अपने राष्ट्रवादियों को भी निरंतर जगा रहे हैं इन कौरवों रुपी गद्दार कांग्रेसी/वामपंथी इस्लामी राक्षसों से रक्षा हेतू सदैव सहज/सजग और सदैव दो दो हाथ करने के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़े रहें। 
युद्ध अवश्यंभावी है, हम जीतने भागेंगे चहुंओर से इस्लामी राक्षसों से घिरते हुए पायेंगे।

जय भवानी , जय शिवाजी

"ठाकुर की कलम से"

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