*तमस*
तम का अर्थ है, आलस्य। तम का अर्थ है, ठहरना। तम का अर्थ है, रुकना। तम बांधने वाली शक्ति है। अगर तम न हो, तो चीजें चलती ही जाएंगी और रुक न सकेंगी। तुम एक पत्थर उठाकर फेंकते हो, अगर तम न हो जगत में, कुछ रोकने की शक्ति न हो, अवरोध न हो जगत में, तो पत्थर फिर चलता ही जाएगा, चलता ही जाएगा, रुकेगा कैसे? तम है अवरोधक ऊर्जा।
तो तुम फेंकते हो पत्थर को, जब तुम फेंकते हो, तो तुम उसे रज की शक्ति देते हो। इसलिए तुम्हारा हाथ दुखता है, शक्ति हाथ से गई। तुमने कुछ गंवाया पत्थर को फेंकने में। और जितनी शक्ति तुमने दी, जितने जोर से फेंका, जितना गंवाया, जितनी ऊर्जा दे दी पत्थर को, उतनी दूर पत्थर जाता है। जैसे ही ऊर्जा खतम हो जाती है, तम की शक्ति उसे नीचे खींच लेती है।
जिसको न्यूटन ने ग्रेविटेशन कहा है, वह तम का ही एक रूप है।
तम है नीचे की तरफ खींचने वाली शक्ति। तो जिससे तुम नीचे गिरते हो, वह तम है। जिससे तुम नरक में गिरते हो, वह तम है। जब तुम्हारे भीतर चोरी तुम करते हो, तो तम है, झूठ बोलते हो, तम है। जहां—जहां तुम नीचे उतरते हो, वहां तम है। तम है एक आलस्य, एक निद्रा।
आध्यात्मिक अंधापन भी तम का एक रूप है। जिन्होंने भी ध्यान करना जानी, वे कहते हैं, हलके हो गए, जैसे पंख लग गए, आकाश में उड़ जाएं। जब तुम्हारे भीतर भी ध्यान थोड़ा गहरा होगा, तो तुम अचानक किसी दिन पाओगे बैठे—बैठे, जैसे शरीर जमीन से ऊपर उठ गया। शरीर नहीं उठ रहा है, लेकिन तम की शक्ति कम हो रही है। इसलिए भीतर अनुभव होता है, जैसे शरीर ऊपर उठ गया, हलका हो गया।
जितना तमस होगा, उतना बोझ होगा। लोगों को चलते देखो, ऐसे चल रहे हैं, जैसे सिर पर बोझ रखे हों। बोझ बिलकुल दिखाई नहीं पड़ता, वह तम का बोझ है। उसे तुम किसी तराजू पर न तौल सकोगे। वह आत्मिक बोझ है। वह चिंताओं का बोझ है, दुर्गुणों का बोझ है, गलत आदतों का बोझ है, गलत संस्कारों का बोझ है, गलत संबंधों का बोझ है, गलत निर्णयों का बोझ है, वह सब बोझ वहां है। वह सब तमस का फैलाव है।
तमस यानी जो रोकता, तमस यानी जो अटकाता, तमस यानी जो अवरोध बनता। तुम्हारे पैर अगर जमीन में गड़े हैं, तो वह तमस है। तुम अगर अपनी चेतना स्थिति में ऊपर नहीं उठ पाते, तो तमस का बहुत वजन है।
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