"नेपथ्य में यादव क्यों ?"
हमारी ये पोस्ट "यादव" समाज की एक ऐसी शक्ति के बारे में जिसके बारे में आज तक ज्यादा लिखा पढा नहीं गया! उनको ज्यादा तवज्जो भी नहीं दी गयी, कम से कम सामाजिक रूप से!
लेकिन वो भारतीय राजनीति के न केवल मूल स्तंभ हैं, बल्कि भारतीय राजनीति उनके बिना अधूरी परिलक्षित होती है!
शिक्षा, राजनीति, जमीन, जायदाद आदि में कई जगह उनका विशेषाधिकार है!
अगर उनके राजनीतिक पहलू की बात करूं तो वो सनक की हद तक आक्रामक दिखते हैं!
योगी सरकार ने पिछले दिनों एक 4 सदस्यीय न्यायिक समिति का गठन करते हुए यह जानना चाहा कि यादव लोग पिछड़ा वर्ग में क्या अहमियत रखते हैं, तो आश्चर्यजनक रूप से इस समिति ने यादवों को भारतीय राजनीति का सबसे रसूखदार तबका बताया!
खैर, मेरा मकसद उनका अमीरी गरीबी का पैमाना नापना नहीं है!मैं यादवों का जिक्र किसी दूसरे मकसद से कर रहा हूँ, और वो मकसद है राष्ट्रवाद!
मैंने निजी जीवन मे जब भी किसी यादव से बात की तो उसको गज़ब का राष्ट्र्वादी पाया! अपनी माटी से प्यार उनमें कूट कूट कर भरा दिखा!
भारतीय सेना में यादव बड़ी संख्या में है! कितने ही वीर चक्र उनके नाम पर हैं, गूगल कर लीजिए!
लेकिन मुझे यह पूछने में कोई संकोच नहीं कि आज यादव बन्धु देश के लिये क्या कर रहे हैं?
लगातार भौतिक लालसा के पीछे भागने के अलावा देश को दिशा दिखाने का कोई काम यादवों के नाम पर है? मुझे तो कम से कम याद नहीं पड़ता! जिन कंधों पर देश की जिम्मेदारी थी, वो तो बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश आदि में मात्र कुछ तुच्छ राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने में अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहे हैं! हिंदुत्व उनकी असीम ऊर्जा से लाभान्वित होने के लिए उनका इंतजार कर रहा है, पर जैसे उनको इन चीजों से मानो कोई सरोकार ही न हो!
भारत माता उनके युवाओं को पुकार रही है, लेकिन उनके युवा बस फेसबुक की चंद तथाकथित दोस्तियों में अपनी कीमती ऊर्जा बर्बाद कर रहे हैं!
व्यथित हूँ मैं! बेचैन है मन!
क्या हो गया 20 करोड़ की आबादी वाले श्रीकृष्ण के वंशजों को? उन वंशजों को, जिनके महापुरुष ने धनुर्धर अर्जुन को अपनी धरा बचाने का महान गीतोपदेश दिया!
क्या आज का यादव केवल टोटींचोर या चाराचोर का पुत्र आठवीं पास तेजस्वी भर है?
अगर यादव भाई मेरे शब्दों को पढ़ रहे हैं तो वो अपने से प्रश्न करें कि क्या वो भारत की धरती पर कुछ छोटे लक्ष्यों के लिए जन्मे हैं!
क्या बस हम केवल उनकी बड़ी आबादी का झूठा घमंड लेकर जीते रहें?
सोचो यादव युवाओं सोचो!
देश की पावन धरा तुम्हें पुकार रही है!
नेतृत्व करो इस देश का!
छोटे छोटे लक्ष्यों के पीछे न भागो!
क्षुद्र राजनीतिक लालसाओं को त्याग दो! ये धरा तुम्हारी भी है!तुम इसके रक्षक हो मत भूलो!
तुम्हारे गुणगान केवल तुम्हारे हिन्दू भाई ही करेंगे,और कोई नहीं!
अपना अपना ही होता है, गैर वो संम्मान न देगा जो तुम्हे अपनों से मिलेगा!
जो लोग तुम्हारी ऊर्जा का लाभ उठाकर बाद में इस देश को तबाह करने का लक्ष्य पाले बैठे हैं, वो किसी के सगे नहीं है!
उनका एकमात्र लक्ष्य तुम्हारा राजनीतिक लाभ लेना है!
क्या तुम अपनी ऊर्जा का बेजा इस्तेमाल किसी ओर को करने दोगे?
मैं सोचता हूँ, कदापि नहीं!
मेरे शब्दों पर भले ही मुझे अपशब्द कह लो, लेकिन हिंदुत्व की बागडोर अपने मजबूत हाथों में ले लो! यही तुमसे आशा है, यही जन जन की अपेक्षा है!
देर न करो! भारत माता के सारथी बनो!
भारत माता की जय!
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