सैफ अली खान का दर्द "गजवा-ए-हिन्द" के बिखरते सपने से ज्यादा कुछ नहीं।। ब्रिटेन ने आधी दुनियाँ पर राज किया, लेकिन आज किसी एक देश का नाम भी ब्रिटेन पर नहीं है।
ब्रिटेन ने आधी दुनियाँ पर राज किया, लेकिन आज किसी एक देश का नाम भी ब्रिटेन पर नहीं है।
वहीं भारत जो मौटे तौर पर दुनियाँ में कही लड़ने नहीं गया आज भी Indonesia (Indian islands) के नाम में IND पहले है। भारत दुनिया का एक मात्र देश है जिसके नाम पर महासागर का नाम है हिन्द महासागर, क्योंकि विश्व जीडीपी में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी (आज अमेरिका की भी इतनी हिस्सेदारी नहीं है) वाले भारत तक पहुंचे के लिए यूरोप के लगभग हर देश ने इंडिया के नाम से नेवी कंपनी खोल रखी थी।
तो वो भी हम ही हैं जिन्हें जीतने के लिए हदीसों में "गजवा-ए-हिन्द" लिखा गया।
हम तक ज़मीनी रास्ते से सिर्फ पहुंच जाने भर पर सिकंदर को विश्व विजेता माना गया तो हम तक पहुंचने के समुद्री रास्ता खोजने के चक्कर में कोलम्बस ने अमेरिका खोज लिया।
फिर भी हम खड़े हैं पांच हजार सालों से, हां कुछ एक तिहाई सिकुड़ गए हैं लेकिन फिर भी अभी तक चीन की तरह ना पूरी तरह कम्युनिस्ट बने, ना पर्शिया और मिस्त्र की तरह इस्लामिक ना रोम और यूनान की तरह ईसाई।
लेकिन जैसे पाकिस्तान अपना इतिहास "कासिम के सिंध पहुंचने" के बाद से शुरू करता है जैसे उससे पहले उस पूरे भू-भाग का कोई अस्तित्व ही नहीं था वैसे ही कुछ लोगों को शौक चढ़ा है ये बताना कि "अंग्रेजों के आने से पहले भारत का अस्तित्व नहीं था"
जो लोग बाजीराव मस्तानी में पेशवा बाजीराव के पीछे अखंड भारत का नक्शा देखकर चटक गए थे वो इन दिनों तान्हा जी पर बता रहे हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले भारत जैसी कोई चीज ही नहीं थी।
कई फिल्मों (केसरी, पानीपत) में जिहाद का नारा देकर मुस्लिम सुल्तानों के साथ आने के सीन दिखाने जिन्हें दिक्कत नहीं हुई (क्योंकि ये तो कॉमन बात है) वो 'हिन्दू के खिलाफ हिन्दू' वाले डायलॉग को झूठा इतिहास बता रहे हैं।
भारत गणराज्य या India Repblic संविधान में शामिल, ये दोनों नाम अंग्रेंजों के आने के बाद नहीं जन्में। भारत नाम ऋग्वेद, रामायण, महाभारत और पुराण सबमें मिलता है और इंडिया शब्द हिरोडोटस द्वारा 4 सौ ईसा पूर्व लिख डाला था।
भारत यूरोप या USSR नहीं है कि क्योंकि पूरे यूरोप पर पवित्र रोमन साम्राज्य के नाम पर चर्च शासन करता था या कम्युनिस्ट तानाशाही थी इसलिए USSR एक था जैसे ही चर्च या कम्युनिस्ट तानाशाही कमज़ोर पड़ी यूरोप और USSR से बिखर कर 20 देश बन गए। ऐसे ही भारत को भारत रहने के लिए किसी राजा, चर्च या तानाशाही की जरूरत नहीं है।
जब तक बंगाल में कोई सोमनाथ चटर्जी और आंध्र में कोई पीवी सिंधु ( वो सिंध जो अब देश का हिस्सा भी नहीं है) होती रहेंगी भारत एक देश रहेगा।
लेकिन बिना रीढ़ की हड्डी के लोग, जो बेटे का नाम तैमूर रखने पर कहें कि ये वो तैमूर नहीं है जिसने कई करोड़ भारतीय मारे.. ये तिमुर है मतलब लोहा
जिस फिल्म में काम करें उसके लिए कहें, ये इतिहास तो फेंक है लेकिन चूंकि रोल अच्छा था और एक हिट फिल्म चाहिए थी इसलिए कर लिया...
नेशन स्टेट और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में अंतर है ये समझने के लिए भी समझ चाहिए
कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है फिर भी इंडिया गो बैक के नारे लगते हैं (क्योंकि निजाम ए मुस्तफा लक्ष्य है)
और नेपाली गोरखा अलग नेशन स्टेट के होते हुए भी भारत की रक्षा करता हुआ शहीद हो जाता है (क्योंकि संस्कृतिक विरोध नहीं है)
सैफ अली खान खुद असली इतिहास क्यों नहीं बताते वो खुद एक फिल्म बनाएं और किसी नालंदा जलाते खिलजी को, सोमनाथ तोड़ते गजनवी को, कुरान की झूठी कसम खाते औरंगजेब को हीरो बताएं...
लेफ्ट चश्मे से देखने के बाद भी मुगल ए आजम से लेकर जोधा अकबर तक
अकबर के अलावा कोई दूसरा मध्यकालीन चरित्र नहीं मिलता जिसे नायक बताकर फिल्म बना सके..
हमें पता है कौन क्या दिखता है, क्या बोलता है
किस नस को दबाने पर कहां दर्द होता है...
14 अगस्त को पाकिस्तान बना था
लेकिन 15 अगस्त को भारत बना नहीं था भारत आजाद हुआ था।
"ठाकुर की कलम से"
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