"भक्त उसी के होते है जिसके कार्य महान होते है"
1947 से 2014 तक आप भारतीय राजनीति में चरण चाटूकार/गुलाम शब्द सुनते आए हैं। ये शब्द गांधी नेहरू परिवार की गुलामी और चरणवंदना से जुड़े थे।
2014 में एक दौर आया "भक्तों" की, अब इनका विश्लेषण:-
एक होते है प्रशंसक , उसके बाद अनुयायी और फिर सबसे बड़ा भक्त।
भारतीय राजनीति में दोनों प्रकार के लोग सदैव रहे हैं परंतु भक्त आजतक कोई राजनेता नही बना सका है . यह पहली बार है जब किसी नेता के अनुयायियो को भक्त कहा जाता है ।
नरेंद्र मोदी एक पूर्ण कर्मयोगी और आध्यात्मिक व्यक्ति हैं
प्रमाणित करने लायक मामूली अपराध या कपट कार्य की आज तक खोज जारी है कुछ लोगों द्वारा ।
इन लोगों के चलाये सारे तीर बूमरैंग की तरह वापस इन्हीं के पास जाते हैं ।
खून की दलाली, चौकीदार चोर है, नीच शब्द जैसे जीवंत उदाहरण हैं इसी श्रृंखला में भक्त शब्द जुड़ गया ।
भक्त शब्द में आप कोई भी भाव रखें लेकिन उसके मूल रूप को कोई नही बिगाड़ सकता है ।
गांधी नेहरू परिवार के समर्थकों को क्या कहा जाता है ये पहले उपर के उदाहरण द्वारा समझाया जा चुका है ।
नरेंद्र मोदी स्वयं एक भक्त हैं उनके भक्त उन्हें भगवान नही मानते लेकिन एक भक्त का दूसरे भक्त से वैसा ही संबंध होता है जैसे भगवान और भक्त का ।
समय भी इसका साक्षी होता है लेकिन इस संबंध को प्रभावित नही कर सकता।
कहा जाता है की भक्ति से ही शक्ति है यही कारण है की इन्हीं भक्तों की भक्ति से प्राप्त शक्ति के कारण मोदी भारतीय राजनीति का वो चेहरा बन चुके है जिनपर लगने वाले आरोपो से उन्हे लाभ ही होता है।
दशकों बाद भारत को एक ऐसा नेता मिला जिसकी ईमानदारी पे किसी को कोई शक नही यह बात अलग है की पिछली सरकार अपने द्वारा किये गये भ्रष्टाचार का खामियाजा आजतक भुगत रही है और इस सरकार पर भी बेवजह आरोप लगाने से नही चूकती।
परंतु वे भी चाहे जितना प्रयास कर ले भक्तों के आगे सब विफल है। अगर उनमें काबिलियत है तो केवल अपने बिना लाभ वाले अनुयायी ही बनाकर दिखा दें भक्त तो दूर की बात है।
मोदी भक्त का तात्पर्य इस देश का भक्त होने से है, मोदी भक्त उस व्यक्ति की पहचान है जो इस देश के लिए जीता हो इस देश की तरक्की चाहता हो, देश की प्रथम नीति पर चलता हो, जो देश में फैली सभी बेईमानियों को खत्म करना चाहता हो, जो देश भक्तों का सम्मान करने वाला हो, अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करता हो। ये सब मोदी भक्त के गुण हैं ।
आज कल तो जो कोई हिंदुस्तान जिंदाबाद, भारत माता की जय आदि के नारे लगाता हो उसे भी मोदी भक्त कह दिया जाता है, प्रसन्नता होती है ।
मोदी भक्त संबोधन इतने दशकों से चले आ रहे चरणवंदना और गुलाम जैसे संबोधनों से कहीं ज्यादा और सुखद अनुभूति कराता है, ठाकुर से पंगा।
"ठाकुर की कलम से"
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