"नारियों के आठ अवगुण:-
मित्रों .
रावण को महान ज्ञानी बताने वाले एक भ्रमित बुद्धि वाले सज्जन ने नारियो में कुल आठ दोष बताये हैं। तुलसीदास जी द्वारा लिखी चौपाई इस प्रकार है।
" नारी सुभाव सत्य सब कहहिं।
अवगुण आठ सदा उर रहहि।।
साहस अनृत चपलता माया।
भय अविवेक असोच अदाया।। "
कृपया ध्यान रखें कि तुलसीदास जी ने इस चौपाई के माध्यम से जिस नारी की बात की है वह कोई स्त्री न होकर अष्टधा प्रकृति है। इसीलिए उसके अवगुणो की संख्या आठ बताई गई है। चाहते तो चार- पाँच अवगुण और भी जोड़ देते तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
जैसा कि हमारे शास्त्रों में ईश्वर को पुरुष तथा प्रकृति को नारी तत्व माना गया है। अतः इसी गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य को अहंकार रूपी रावण के माध्यम से प्रगट किया गया है।
एक वीडियो के माध्यम से स्त्री प्रजाति पर जो आरोप लगाये गये हैं वह आपत्ति पूर्ण है। इसमें साहस, चंचलता, को भी अवगुण की श्रेणी में बताया गया है जबकि ये सब एक गुण है।
स्त्रियों के प्रति क्रूरता, अविवेक, अशुचिता, भय, माया, झूठ बोलना, सदा परिवर्तनशीलता को अवगुण बताया जाना हमारी माँ बहनों का अपमान है और यही वजह है कि मुझे आज यह सब इतना लिखना पड़ रहा है। यदि ऐसा ही था तो फिर राम की जननी माँ कौशल्या में भी यह अवगुण होना चाहिए था। अतः यह एक बेहद त्रुटिपूर्ण व्याख्या है।
कृपया ध्यान रखें कि कि यहाँ तुलसीदास जी ने अवगुण शब्द का प्रयोग किया है न कि दुर्गुण का। अवगुण और दुर्गुण शब्दों में जमीन आसमान का फर्क होता है। ईश्वर को गुणों के परे माना जाता है इसीलिए हमारे शास्त्रों में ईश्वर को निर्गुण, निराकार और अकर्ता पुरुष निरूपित किया गया है। ठीक इसके विपरीत प्रकृति को तीन गुणों यथा सात्विक, तामसिक और राजसिक गुणों से युक्त माना गया है । इन्ही तीन गुणों से युक्त होने के कारण ही यह प्रकृति चलायमान बनीं रहतीं हैं यही इसकी चंचलता और परिवर्तन का द्योतक है। प्रकृति में आप स्वयं साक्षी है कि ईश्वर भजन करने के बावजूद भी तरह तरह की प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं इसे ही उसका अविवेकी तथा क्रूरतापूर्ण व्यवहार कहा गया है। वास्तव में नारी दया की मूर्ति है और वही एक मात्र कारण है जिसकी वजह से मनुष्य के जीवन में प्रेम रूपी प्रभु का प्रागट्य होता है।
अतः नारी के प्रति सार्वजनिक रूप से इस तरह का दुष्प्रचार करना विशुद्धतः मूर्खता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि कृपया हम अपने गौरवशाली सनातन धर्म को ठीक से समझे जिसमें नारी का जगह जगह पर यथेष्ट सम्मान किया गया है। नारी की महत्ता दर्शाने के लिए ईश्वर का एक अर्धनारीश्वर रूप भी बताया गया है।
कृपया स्मरण रखें कि श्रीरामचरितमानस में एक स्थान में भगवान श्रीराम ने भक्तों के लिए यह स्पष्ट घोषणा की है कि :-
" करहू सदा तिन्ह के रखवारी ।
जिमि बालक राखहि महतारी।। "
वह ईश्वर हम सबका परमपिता है और वह यह अच्छी तरह जानता है कि बच्चों का भरोसा माँ पर होता है न कि बाप पर अतः वह स्वयं को माता के रूप में भी स्थापित करता है।
अतः ऐसे रावण को महान बताने वाले वामपंथियो का बहिष्कार करें।
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