अनछुए इतिहास जिसे वामपंथी कांग्रेसी गुंडों ने स्कूली पाठ्यक्रम से गायब रखा"

#अनछुए इतिहास जिसे वामपंथी कांग्रेसी गुंडों ने स्कूली पाठ्यक्रम से गायब रखा"

#इतिहास कहता है, की भारत पर इस्लाम के सबसे बड़े आक्रमण 7वीं सदी में #बप्पा_रावल__नागभट_प्रतिहार के समय शुरू हुए थे, 7वीं सदी से 12वीं सदी तक इन 500 सालों में हिन्दू (क्षत्रिय) राजाओं ने अरब आक्रांताओं को भारत मे घुसने नहीं दिया और हर बार मारकर खदेड़ते रहे। इन 500 वर्षों के दौरान सैकड़ों नहीं हज़ारों बार अरबों ने भारत पर आक्रमण किये। लेकिन सफल ना हो सके।

कल्पना कीजिए
2 - 4 -10 साल नहीं, पूरे 500 साल।

लेकिन इतिहास ये भी कहता है कि इन 500 सालों में लड़ते लड़ते सभी राजपूत वंश, बहुत कमजोर हो गए थे.....
ये सही भी है 500 साल लड़ते लड़ते कमजोर होना, तर्कपूर्ण भी है, लेकिन अब मेरे मन में ये बात आती है, जिस समय की इतिहास बात करता है, जिन कमजोर क्षत्रियों राजाओं की बात इतिहास करता है, वो कमजोर होने के बाद भी ऐसे थे, की अगले 500 वर्ष और पीछे नही हटे। उनमें कुछ घटनाओं की जानकारी देता हूँ।

11वीं सदी - पृथ्वीराज ने गौरी को हराया !

13वीं सदी - हम्मीर सिंह सिसोदिया ने मोहम्मद बिन तुगलक को हराया।

14वीं सदी - राणा कुम्भा ने महमूद खिलजी को हराया।

15 वीं सदी - राणा सांगा ने बाबर को धूल चटाई।

15वीं सदी - महाराणा प्रताप ने अकबर को हराया ( साक्ष्य यही कहते हैं, पर लोग मानते नहीं )

16वीं सदी - छत्रसाल बुंदेला ने औरंगजेब को बुंदेलखंड से भगाया। ऐसे ही सैकड़ों और युद्ध हुए थे, इतिहास में मुझे जो याद थे वो लिख दिए।
 
मैं इस संघर्ष को दो भागों में बाटता हूँ।

( 6 से 12वीं शताब्दी) 
(12 वीं शताब्दी से 17वीं शताब्दी) मतलब क्षत्रियों को लड़ते लड़ते 1200 वर्ष हो चुके थे।

अब आ चुका थी,17वीं सदी, ये बात भी सत्य है कि 17 वीं सदी के बाद ज्यादातर क्षत्रिय राजवंश लड़ने की स्थिति में नहीं रह गए थे, कुछ राजवंशो के अलावा इतिहासकार ये भी कहते हैं, की पूरे विश्व जगत में इतना लंबा संघर्ष किसी वर्ग ने नही किया, और इतना लम्बा संघर्ष करने बाद भी ये कौम आज भी अस्तित्व में है.....👌

ऐसे  सैकड़ों युद्ध थे, जिसमे क्षत्रिय राजाओं ने इस्लाम को धूल चटाई...पर चर्चा सिर्फ हमारी कमजोरी की होती है 😊

अब दो सवाल  उठते है, पहला जब हिन्दू राजा या क्षत्रिय राजा अंत तक लड़ते रहे तो देश गुलाम कैसे कहा जाता रहा, इतिहास में, अगर गुलाम था तो संघर्ष क्यूँ होता रहा, दूसरा सवाल, जब क्षत्रिय राजा कमजोर थे, तब तो ऐसे ऐसे युद्ध लड़े और ऐसे ऐसे बड़े आक्रांताओं को हराया, और ये राजवंश जब मजबूत रहे होंगे, खासकर 6वीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी तक, जब विदेशी आक्रांताओं के हमले सबसे ज्यादा हुए थे....और यही 500 साल का इतिहास किताबों में नही है..क्या राजपूतों की शौर्यगाथा को वामपंथी इतिहासकारों ने छुपा दिया ?
और दुनियाँ की क्या कहें हम, हम खुद भी नही जानते इस इतिहास को .....इतिहास को दूसरों की नज़रों से पड़ते है इसलिए ये दुर्दशा है, जिस दिन अपने इतिहास को खुद पड़ने लगोगे, समय देने लगोगे उस दिन दशा और दिशा दोनों बदल जाएगी।

"ठाकुर की कलम से"

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