अमेरिका -ईरान विवाद के उफ़ान में उतार -भारत की भूमिका पर ईरान को भरोसा, बड़ी बात है

अमेरिका -ईरान विवाद के उफ़ान में उतार -
भारत की भूमिका पर ईरान को भरोसा, बड़ी बात है -

अमेरिका द्वारा ईरान के कमांडर कासिम सुलेमानी की 
हत्या के बाद ईरान के बदले की कार्रवाई में अमेरिका के 
इराक में 2 सैन्य ठिकानों पर 22 मिसाइल दागने और 
उसमे 80 अमेरिकी सैनिकों को मारने के दावे के बाद,
कल डोनाल्ड ट्रम्प के सम्बोधन में ईरान के खिलाफ कुछ 
कड़े कदम उठाने की उम्मीद थी --

मगर ट्रम्प के बयान में ईरान के खिलाफ तुरंत किसी हमले 
की बात नहीं की गई, अलबत्ता आर्थिक प्रतिबन्ध और कड़े 
करने की बात जरूर की गई है --किसी अमेरिकी सैनिक 
के मारे जाने को भी ट्रम्प ने झूठ बताया और घोषणा की कि 
उनके रहते ईरान को एटॉमिक ताकत नहीं बनने दिया 
जायेगा --

इतना ही नहीं, ट्रम्प ने रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी 
को ईरान के एटॉमिक प्रोग्राम और उसके आतंक के समर्थन 
को समझने की अपील की है --दरअसल ट्रम्प एक तरह से 
इन सभी देशों को इस्लामिक आतंकवाद से लड़ने के लिए 
साथ चलने की बात कर रहा है --

ट्रम्प ये घोषणा तो कर रहे हैं कि ईरान को एटॉमिक ताकत 
नहीं बनने दिया जायेगा मगर जो पाकिस्तान पहले से ही 
एटॉमिक ताकत है, उसके एटॉमिक प्रोग्राम को रोकने की 
कोई पहल करने की बात नहीं करते --किसी भी इस्लामिक 
देश के पास एटम बम होगा, तो उसका इस्तेमाल आज के 
हालात को देखते हुए पहले ईसाई मुल्कों पर पहले होगा 
जिनमे अमेरिका अग्रणी है -- 

ईरान की संसद ने अमेरिकी सेना को आतंकी घोषित किया 
है और ईरान की तरफ से डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या करने वाले 
को 8 करोड़ डॉलर यानि 575 करोड़ रुपये का इनाम देने 
की घोषणा की गई है --इसका मतलब एक डॉलर एक ईरानी 
की तरफ से (ईरान की आबादी 8 करोड़ है) --ये समझ 
लीजिये, ये ट्रम्प की हत्या के लिए ये  "फतवा" है --

इसके अलावा ईरान के सुप्रीम कमांडर अयातुल्ला अली 
खामनेई ने अमरीकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी मिसाइल 
हमलों को अमेरिका के मुंह पर तमाचा बताया है और 
धमकी दी है कि ईरान मध्य पूर्व एशिया से अमेरिका को 
बाहर कर देगा  --वैसे 1979 में ईरान के शाह को 
अपदस्थ करने के बाद ईरान ने घोषणा की थी कि
 इजराइल को वो दुनियां के नक़्शे से मिटा देंगे - 

लेकिन भारत की कूटनीतिक सूझबूझ की सफलता भी इस 
विवाद में दिखाई दे गई जब सुलेमानी के मारे जाने के बाद 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रम्प से फ़ोन पर बात की और 
विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरान, इराक सऊदी अरब इत्यादि 
कई देशों के विदेश मंत्रियों से संपर्क किया --

इस बातचीत का नतीजा भी सामने आया जब कल भारत में 
ईरान के राजदूत अली चेगेनी ने अमेरिका ईरान के बीच 
तनाव को कम करने में भारत की पहल का स्वागत किया -
साथ ही राजदूत ने ये भी भरोसा दिया कि चाबहार
बंदरगाह पर किसी तरह की कोई आंच नहीं आएगी --

इस गरमाहट में एक चुटकला भी सुनने को मिला कि कंगाल 
मुल्क पाकिस्तान ईरान, इराक, सऊदी अरब, टर्की और 
यू ए इ  से कह रहा है कि वो ईरान अमेरिका के बीच 
मध्यस्थता करने को तैयार है --कसम से, ये बात पढ़ कर 
हंसी रुकी ही नहीं --

इसके साथ ये भी खबर आई कि ईरान के विदेश मंत्री 
जावेद जरीफ अगले हफ्ते भारत आएंगे, जरीफ को अमेरिका 
ने संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद् की बैठक में जाने के 
लिए अमेरिका ने वीसा देने से मना कर दिया --

भारत में झक्की विपक्षी मोदी को गालियां देने में व्यस्त हैं 
और उसे हिटलर बता रहे हैं मगर विश्व पर छा रहे संकट 
के समय में मोदी अपनी कूटनीतिक समझबूझ से दो 
परस्पर विरोधी देशों को साधने में सफल हो रहा है, ये उन 
विरोधी दलों के लिए किसी झटके से कम नहीं है - 
 
"ठाकुर की कलम से"

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