"नाम में क्या रखा है"
नाम में बहुत कुछ रखा है! ये मनोवैज्ञानिक खेल खेला जा रहा है हम हिन्दुओं से। कितने खोजने के बाद सैकड़ों अरबी नामों मेँ से एक चुना जाता है । फिर खतना होता है । फिर सड़कों पर नमाज़ और शैतान को पत्थर मारने की रस्म सीखने के बाद ईमान मुक़्क़मल होता है ।
लेकिन मीडिया हमेशा अब्बू अम्मी को माता पिता लिखती है, शौहर बेगम को पति पत्नी, पवित्र इस्लाम के मानने वालों को बुरा क्यों नहीं लगता जब मीडिया अन्य समुदाय, मज़हब विशेष के नाम से संबोधित करती है । करोड़ों कुर्बानियां होती है लेकिन मज़ाल कि कोई मीडिया आपकी क़ुरबानी की तस्वीर अखबार में छाप दे, या TV पर कुर्बानी LIVE चले ।
मीडिया में जन्मदिन, मुंडन, शादी, तेरहवीं सभी समाचार छापे जाते हैं लेकिन हलाला की कभी कोई खबर पढी ? कभी तो सूचना आती फलाने ने हलाला किया और नाज़नीन पाक होने के बाद शौहर के लिए पूरी तरह तैयार है ।
और तो और बड़े से बड़े पवित्र राह के जिहादी को अज्ञात कहा जाता है । उसके नाम बताने तक से परहेज होता है । चोरी चकारी में तुम्हारा नाम सोनू मोनू सुरेश मुकेश हो जाता है, तुमको बुरा क्यों नहीं लगता । यदि असली नाम नहीं छपेगा तो लोग घंटा डरेंगे तुम लोगों से ? सारे अखबार देख लो केवल भगवा आतंकवादी की घटना बड़ी बड़ी छापी जाती है, और तुम लोगों के महान काम 1 कॉलम में निपटा दिए जाते हैं
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लक्ष्मी अग्रवाल को नई सहेली मिलती है ईमान वाली, फिर वो अपने भाई नदीम से मिलवाने की ज़िद करती है । नदीम भाई को पसंद भी आ जाती है, फिर वो उससे निकाह की ज़िद करता है, इस्लाम की दावत देता है । शाकाहारी लक्ष्मी को गो मांस खाने की ज़िद की जाती है, रोज़ा नमाज़ के तरीके सिखाये जाते हैं । इतनी मेहनत करने के बाद कोई रिज़ल्ट नहीं
मिलता देख नदीम भाई को गुस्सा आ जाता है और हसीन चेहरे पर आबे ज़मज़म का छिड़काव कर देता है । इतनी कहानी है फ़िल्म छपाक की । लेकिन नदीम का नाम राजेश कर दिया गया । नदीम भाई की इज़्ज़त दो कौड़ी की कर दी
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औरंगजेब, बाबर जैसे महान राजा आज होते तो यही लिखते महाराज ने प्याऊ का उद्घाटन किया, अस्पताल में कंबल बांटे, ठंड में अलाव रखवाये।
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ईमान वालो, अगर तुमने विरोध नहीं किया तो कल छापा जाएगा मोहम्मद अशलम का असली नाम महेश था, शुद्ध शाकाहारी था, नो दुर्गा के वृत करने वाला हमेशा सच बोलने वाला, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाला, हर प्रकार की हिंसा से दूर रहने वाला, भगवान का भजन करने वाला...
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देख समझ को, तुमको ठीक लगे तो ठीक, वरना नाम में क्या रखा है, मिट्टी से समझ आ जाता है, दफनाना है या जलाना
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