2020 का भारत: "कांग्रेसी गुंडों द्वारा प्रायोजित विध्वंसक टकराव व अराजकता का भारत"

2020 का भारत: 
    "कांग्रेसी गुंडों द्वारा प्रायोजित   
  विध्वंसक टकराव व अराजकता 
                 का भारत"
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जैसे जैसे 2019 का अवसान हो रहा है वैसे वैसे भारत एक विस्फोट की तरफ अग्रसर हो रहा है। भारत व उसकी पल्लवित हो रही राष्ट्रवादी व हिंदुत्व की विचारधारा के तमाम विरोधी असुरीय शक्तियों का, अपनी अपनी मांदों से निकल कर, सार्वजनिक रूप से संग्रहित होना शुरू हो गया है। 

वैसे तो 2014 में नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही लोगो ने अपनी केंचुले निकाल कर अपने वास्तविक असुरी व्यक्तिवों का परिचय देने लगे थे लेकिन जो अब हो रहा है या जो अगले कुछ महीनों में होता दिखेगा, वह सभी असुरीय शक्तियों के मंथन निकले दवानल का प्रदार्पण होगा, जिसका एक ही लक्ष्य, मोदी सरकार के विध्वंस की आशा में, भारत को जलाना होगा।

यह जो मोदी सरकार ने धारा 370 के समाप्त हो जाने के बाद से ही जिस द्रुत गति से भारत की मूलभूत सुप्त चेतना को झझकोर कर, पुरानी गलतियों और पापों का पिंडदान किया है, उसने भारत में स्वतंत्रता के बाद से धर्मनिर्पेक्षिता के नाम पर चल रही शासकीय व सामाजिक व्यवस्था और उसको चलाने वाले तंत्रों के अस्तित्व के बने रहने पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। जब से 2019 में मोदी सरकार दोबारा आयी है, तब से उसने भारत के पुराने कोढ़ों को, दृढ़ प्रतिज्ञ भाव से, उंसके परिणामो तक ले जाने के लिये जो अपनी कटिबद्धता व निरंकुशता दिखाई है, उसी के कोख से, निश्चित रूप से होने वाले एक धातक टकराव की अनिवार्यता का भी जन्म हो चुका है। 

यह विध्वंसक टकराव होने का बड़ा कारण यह है कि कुछ ही महीनों में धारा 370 समाप्त हुई, तीन तलाक पर रोक लगी, राममंदिर पर शताब्दियों बाद निर्णय हुआ, एनसीआर बना और अब सिटीजन अमेंडमेंट बिल भी सामने आगया है। यह प्रत्येक निर्णय ऐसे है जिसने एक एक करके भेड़ियों से, भेड़ों की खाल उतार दी है। भेड़िये नंगे हो गये है। इसी ने इनको विछिप्त कर दिया है।

ये भेड़िये समूह में सड़क पर उतरेंगे और उनके साथ वे भेड़ें भी उतरेंगी जिन्हें इन भेड़ियों के साथ रहते रहते उनकी आदत हो गयी है। यह टकराव, भारत को जलाएगा। यह गृहयुद्ध नही होगा क्योंकि भारत की राष्ट्रवादी व हिंदुत्ववादी शक्तियों में जमीन पर रक्तिम संघर्ष करने की न योग्यता है और न ही मानसिकता है। यह एक अराजक संघर्ष होगा जो भारत की केंद्रीय शासन व धर्मनिर्पेक्षिता के मुखौटे लगाए सत्ता लालसा के भूखे राजनीतिज्ञों, वामपंथियों, लिब्रलों, जेहादियों और चर्चों की संगठित शक्तियों के बीच होगा। भारत की ज्यादातर जनता पूर्व के भांति, जैसे पानीपत और प्लासी के युद्ध मे हुआ था, दिल्ली में उसके द्वारा चुनी गई सरकार को, उसके लिए लड़ता भर देखेगी। 

मेरी समझ कहती है कि यह वह समय होगा जब पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संघटन, भारत मे, मुम्बई ब्लास्ट के समक्ष, एक बड़ी घटना करने में सफल हो जाएगा। मेरे लिए ही नही सभी लोगो के लिए 2020 के शुरू के 3 महीने बेहद विचलित करने वाले होंगे। मुझे इस बात का भी विश्वास है कि बहुत से, आज के नरेंद्र मोदी के समर्थक, अपनी मूलभूत नपुंसकता व अविश्वासी चरित्र के आगे समर्पण कर, अपने नेतृत्व पर ही उंगली भी उठाने लगेंगे। 

मैं स्पष्ट रूप से आगे का समय विषम देख रहा हूँ और इसी लिए आज मन मार कर लोगो को चेतावनी व नेतृत्व के प्रति विश्वास बनाये रखने के उद्देश्य से लिख रहा हूँ। लेकिन इस सबके बाद भी भारत का प्रारब्ध यही है कि 2020 निर्णायक रूप से भारत विरोधी शक्तियों के ह्रास का आरंभ होगा। 

"ठाकुर की कलम से"

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