"संघर्ष का दौर"
UP/Bihar के लोग नौकरी हड़प लेते हैं?
नहीं साहेब..... नहीं।
UP/Bihar के लोग नौकरी हड़पते नहीं, अपने टैलेंट के बल पर बुलंदी का झंडा गाड़ते हैं।
बुलंदी संघर्ष का.....
बुलंदी जीजिविषा का.....
बुलंदी हर परिस्थितियों में खुद को ढाल लेने का.....
हम अपने किस्मत के हिस्से में आये काम के प्रति समर्पित होते हैं साहेब।
हमारे पास त्याग है साहेब..... हमारे पास तपस्या है.....
हमारे पास लगन है......!
हमारी तपस्या हमारी student life से ही शुरू हो जाती है साहेब!
तुम समझ पाओगे.......?
सुन पाओगे........?
...........तो सुनो!
जब हम अपने गरीब, किसान, बुढ़े माता-पिता के आँखों में पल रहे सैकड़ों अरमान और अपने हजारों सपने को पूरा करने के लिए अपने छोटे-छोटे गाँवों से निकलकर शहर का रूख करते हैं ना साहेब........
उसी समय से हमारा पहला संघर्ष शुरू हो जाता है.......
हमारा student life.....
10×10 के कमरे का एक कोना हमारा kitchen होता है,
दूसरा कोना study room, तीसरा कोना bed room
और चौथे कोने में चंद जरूरी समान.........
इसमें भी दो-दो लोग पार्टरशीप में रह लेते हैं।
100-200 रूपये किराया बढने पर रूम बदलना हमारी मजबूरी हो जाती है। क्या करें साहेब? करना पड़ता है.........
100-200 रू से ही हमारे बजट पर असर पड़ जाता है।
आप नेताओं ने हमारे लिए बेरोजगारी का वो तोहफा दिया है ना साहेब........ कि हम एक साथ ग्रुप D, रेलवे, बैंकिंग, SSC, PSC का form भरते हैं कि पता नहीं कौन सी परीक्षा खुशी दे जाए।
सरकारें आती है,
सरकारें जाती है........
चेहरे बदलते हैं..........
बस कुछ नहीं बदलता तो वो है बेरोजगारी!
तुम्हारे दिए इसी बेरोजगारी ने हमें संघर्षशील बना दिया है साहेब.....
और इसी संघर्ष के बल पर हम बुलंदी का झंडा गाड़ते हैं।
हम कुछ हड़पते नहीं हैं साहेब, हम अपनी मेहनत से अपनी गौरव गाथा लिखते हैं।
हम उसी 10×10 के कमरे के एक कोने में उकङू बैठे घंटों किताबों में डुबे रहते हैं.........
खैर तुम्हें क्या बताऊँ?.....
और भला क्या बताऊँ?
बताने के लिए हमारा परफार्मेंस ही काफी है साहेब........
जिससे तुम्हें डर लगने लगा है।
चाहे देश का कोई हिस्सा हो...... चाहे किसी पद का exam हो...... हम जाते हैं साहेब....... हम बोरे की तरह लदकर ट्रेनों में जाते हैं, पर जाते जरूर हैं........ इसी जंग ने हमें बचपन से हर परिस्थिति में जीने के अनुकूल बना दिया है साहेब।
तुम से हो पाएगा इतना......?
.......नहीं हो पाएगा।
इस ठिठुरती ठंढ में एक पतली प्लास्टिक बिछाकर सो पाओगे खुले प्लेटफॉर्म पर?
........नहीं सो पाओगे?
हम खुले प्लेटफॉर्म पर सोते भी हैं और अगले सुबह exam में भी बैठते हैं........ और फिर उसी तरह ट्रेनों में लदकर वापस भी लौटते हैं।
तुममें इतनी क्षमता ही नहीं..........
इतना लगन ही नहीं कि तुम हमसे मुकाबला कर सको.....
इसलिए हमसे डर गये हो।
क्या तुम जानते हो कि जब हमारे घर कोई फंक्शन हो......... और उसी दिन हमारा कोई exam हो....... देश के किसी कोने में........ तो हम किसे चुनेंगे?
साहेब........ ये है हमारी मेधा क्षमता!
हमारे पास मेधा है, हमारे पास परिश्रम करने की क्षमता है........ हमारे लिए पढाई तपस्या है और उसी तपस्या के बल पर अखण्ड भारत के हर खण्ड पर हमारा दबदबा है........ जिससे तुम्हें डर लगने लगा है।
साहेब, हम UP/Bihar वालों की प्रतियोगिता अपने ही UP/Bihar वाले भाइयों से होती है। तुम कहीं टक्कर में हो हीं नहीं।
.........पर क्या करें साहेब?
तुम्हारे पास रोजगार सीमित है और हम UP/Bihar वाले की जनसंख्या इस रोजगार की अपेक्षा कई गुणा अधिक।
...........जो इस संघर्ष में अपनी पूरी जवानी, पैसा, अरमान खपाने के बाबजूद मंजिल हासिल नहीं कर पाते, वो थक हार कर अपने घर लौटते हैं............ बाबूजी के साथ किसानी में हाथ बँटाना शुरू करते हैं।
.............और किसानों की दुर्दशा तुमने क्या कर रखी है साहेब, भला यह बताने की जरूरत है क्या?
तुम्हारी 70 साल की इसी गंदी राजनीति का दंश है कि हम UP/Bihar वाले रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर होते हैं साहेब........
अपने घर का एक स्नातक छात्र तुम्हारे घर का एक मजदूर कहलाने लगता है।
.............हम देश के हर कोने में मेहनत करते हैं, देश के शहरों को अपनी मेहनत से चमकाते हैं। यह जो उद्योग धंधे है ना साहेब, इसे हम अपनी पसीने से सींचते हैं.........
देश का GDP हम पर निर्भर करता है साहेब।
हमारे लिए भारत का मतलब भारत होता है साहेब..........
देश का हर हिस्सा अखण्ड भारत.......... अपना भारत।
हमारे लिए भारत का मतलब अलग-अलग महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश नहीं होता है।
इस भारत को अखण्ड भारत ही रहने दो साहेब.........
मत बाँटो इसे टुकङियों में।
तुम नेताओं की जाति ने देश का बहुत नुकसान किया है साहेब।
गुजरात से भगाते हो तो भाजपा चुप रहती है और कांग्रेस हल्ला करती है...........
मध्यप्रदेश से भगाते हो तो कांग्रेस चुप रहती है और भाजपा हल्ला करती है।
अपनी मतलब की रोटी ऐसे सेकोगे साहेब?
"ठाकुर की कलम से"
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