राष्ट्र और धर्म भक्तों के लिए नहीं, इसका जीता जागता उदाहरण बजरंग दल के दारा सिंह जी हैं।

सारा जीवन हिंदुत्व के नाम करने वाले को न्याय कब ?

#दारा_सिंह जी साल 1999 में बजरंग दल का विभाग संयोजक थे जब #ओड़िसा में ग्राह्य स्टेंस हत्या कांड हुआ था तब आरोप लगा बजरंग दल के दारा सिंह जी पर  , सारे विश्व की ईसाई मिशनरी एकजुट हो गई और दारा सिंह गिरफ्तार हो गए।

आज 20 वर्षों के बाद भी दारा सिंह को कभी फर्लो-पैरोल या जमानत नहीं मिली यहाँ तक की उनके माता-पिता की चिता को चिता को आग देने के लिए भी  पैरोल नहीं मिली ।

लाखों हिन्दुओं को ख़त्म कर देने वाले मिशनरी से लड़ी लड़ाई, 20 सालों से जेल में बंद है ये हिन्दू !

दारा सिंह उर्फ़ रविंदर पाल जी ग्राम ककोर , फफूंद , जिला औरैया के निवासी हैं ।। दारा सिंह के ऊपर 2 धर्म परिवर्तकों ग्राहम स्टेन्स और फादर अरुल दास के साथ 1 गौ हत्यारे शेख रहमान की हत्या का अभियोग चला था जिसमे उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी ।

दारा सिंह के प्रत्येक प्रकरण की जांच केंद्र व् राज्य सरकार में मौजूद तात्कालिक कांग्रेस सरकार ने की थी जिसका हिन्दू विरोधी रवैया सर्वविदित है….. साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के विषय में , डी सी बंजारा जी के विषय में काँग्रेस सरकार की घोर हिन्दू विरोधी मानसिकता का प्रमाण संसार देख चुका है ,, अतः श्री दारा सिंह जी के विषय में कांग्रेस अधीनस्थ जाँच एजेंसियों ने निष्पक्षता दिखाई रही होगी ये असंभव है ।।। 

हिन्दू संगठनों की माँग है की हम इस समूचे प्रकरण की निष्पक्ष जाँच का आवेदन करते हैं जिसमें लाखों हिंदुओं के धर्म परिवर्तक ग्राहम स्टेन्स के साथ गौ हत्यारे शेख रहमान के काले कारनामों का भी खुलासा हो ।।।।

धर्मपरिवर्तन और गौ हत्या के विरुद्ध दारा सिंह के प्रतिकार की सजा इतनी भी नही होनी चाहिए जितनी उनको दी गयी है ।।

8 वर्ष अनवरत जेल की सजा राष्ट्रद्रोहियों के लिए होती है , राष्ट्र और धर्म भक्तों के लिए नहीं ।।।।

विदित हो कि तात्कालिक जाँच के हर भाग में ग्राहम स्टेन्स और शेख रहमान की हत्या भीड़ द्वारा करना लिखा गया है , विगत 18 साल में ओड़िशा की सरकार ने जेल में बंद आजीवन कारावास की सजा पाये सैकड़ों बंदियों को मात्र 14 साल या उस से पहले छोड़ा है जिसमे हमारे जवानों के नरसंहार के दोषी अनेक दुर्दांत नक्सली भी शामिल हैं ।।।।।

फिर दारा सिंह के ही विषय में इस प्रकार का दोगला व्यवहार क्यों ?

क्या अपने माता पिता के अंतिम संस्कार में मुखाग्नि देने से रोकना मानवाधिकार का उलन्घन नहीं था ? क्या ये सरकारी मंशा द्वेष भावना से प्रेरित नहीं थी ?

दारा सिंह जी की स्वर्गीय माँ की अस्थियां अभी भी उनके खेतों में अपने पुत्र द्वारा विसर्जन की प्रतीक्षा में गड़ी हैं । 

दारा सिंह के स्वेक्षा से आत्मसमपर्ण को गिरफ्तारी का नाम दे कर अपनी झूठी पीठ थपथपाई गयी बाद में उनके साथ अमानवीयता की सीमा पार तक टार्चर किया गया जिसका हिसाब अभी सभी सनातनियों पर उधार है ।।।
सनातन रक्षा को आगे आये व्यक्ति की दुर्दशा अब हिन्दू सहन नहीं कर सकते ।।। 

दूसरी ओर चोर लुटेरे, भ्रस्टाचारी बलात्कारी देशद्रोही अर्थात जघन्य से जघन्यतम अपराधी को जेल से बाहर जाने का मौक़ा मिला किंतूू दारा सिंह जी के लिए न कोई संगठन न सरकार न नेता कोई नहीं बोला आज तरुणाई से बुढापे में पहुँच चुके हैं  दारा सिंह जी ।

दारा सिंह जी जैसे हिन्दुओं को कोई पूछने वाला भी नहीं, और अगर दारा सिंह जैसे हिन्दुओं को भुला दें, तो ये शर्म से डूब मरने वाली चीज ही है !

Comments