#भंगी_नही_सुर्यवंसी
भंगी कौन है और किसने बनाया...?
पुराने समय में राजा हो या रंक सभी मल त्याग करने घरों से बाहर दूर खेतों जंगलों में जाते थे तो फिर ये घर से मैला ढोने की परंपरा कहाँ से आयी...और जब उस पुराने समय मे इसकी जरूरत नही थी तो जाहिर सी बात है भंगी की भी जरूरत नही रही होगी फिर घरों से मैला ढोने के लिए भंगी कहाँ से आये...?
सोचो इसका जवाब आपको पिछले हजार सालों के मुसलमानों और अग्रेजो के आक्रमण काल मे ही मिलेगा...!
आज ऐसा अकाट्य सबूत दिया जाएगा कि साबित हो जाएगा कि मुस्लिमो ने ही सूर्यवंशी वाल्मीकियों को भंगी बनाया सारे मायावती वाले और वमसेफियो सबकी आज पोल खुल जाएगी...!
जैसा की आप सबको मालूम है कि पहले के जमाने में ठाकुर पण्डित अपने घर में शौचालय रखते ही नहीं थे इसको बहुत ही अशुभ माना जाता था औरते बच्चे आदमी सब घर के बाहर शौच करने जाते थे...यानी सफाई कर्मचारी की उनको कोई जरूरत ही नहीं होती थी तो वो किसी को क्यो सफाई के काम मे लगाएंगे...?
जब मुसलमान आए तो उनकी औरतें पर्दा करती थी इसलिए उनके घर मे शौचालय होता था और जब वह क्षत्रिय सैनिकों को जीतकर बंदी बना लेते थे तो उनको अपमान करने के लिए सफाई के काम में लगा देते थे जब इन आतताइयों के द्वारा लोगों का धर्म भंग हो जाता था तो लोग भंगी कहलाने लगते थे...!
दोस्तो १९३१ में अंग्रेजों ने जातियों की गणना कराई थी उस समय उत्तर प्रदेश की आबादी चार करोड़ ९७ लाख थी और उस समय लगभग पांच लाख लोगों को उन्होंने भंगी जाति का बताया जिसमें भंगी डोम चांडाल आदि उपजाति को भी शामिल कर कुल संख्या पांच लाख बताइ यानि कुल आबादी का एक परसेंट...उस समय टिहरी गढ़वाल की कुल जनसंख्या तीन लाख पचास हजार थी जिसमें दो लाख दस हजार अकेले ठाकुर थे एक लाख छ हजार ब्राह्मण थे यानी कुल आबादी में लगभग ८५ % अकेले ठाकुर ब्राह्मण थे...आप जानकर आश्चर्यचकित रह जाओगे की १९३१ की जनगणना में इस जिले में सिर्फ बीस लोगों को अंग्रेजों ने भंगी जाति का बताया अब आप बताइए अगर ठाकुर पण्डित किसी को भंगी बनाए होते तो जहां ठाकुर ब्राह्मण की सबसे ज्यादा आबादी थी वहां जरूर भंगी जाति के लोग होते लेकिन वास्तव में जिन जिलों में ठाकुर ब्राह्मण की ज्यादा आबादी है वहां भंगी जाति का कोई था ही नहीं...!
भंगी जाति सिर्फ उन्हीं जिलों में पाई गई है जहां पर मुस्लिम आबादी ज्यादा है जिन ५००००० लोगों को उस समय भंगी बताया गया उसमें डेढ़ लाख अकेले मेरठ संभाग में थे जहां मुस्लिम की आबादी चालीस परसेंट थी शेष भंगी लोगों की बची हुई आबादी बरेली मुरादाबाद अलीगढ़ ऐसी जगह पर ही पाई गई जहां पर मुस्लिमों की आबादी बहुत बहुत ज्यादा है...प्रमाण बहुत स्पष्ट है कि मुसलमानों ने ही लोगों को भंगी बनाया ब्राह्मण ठाकुर की आबादी जहां ज्यादा है जैसे प्रतापगढ़ अमेठी और बनारस यहां पर भंगी जाति की आबादी बहुत बहुत कम पाई गई सिर्फ डोम जाति की आबादी बनारस में मिली जिसका कारण बनारस के घाट है जहां पर दाह संस्कार होता है...यानी किसी भी ठाकुर ब्राह्मण बहुल इलाकों में भंगी जाति ना के बराबर थी तब इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि ठाकुर ब्राह्मणों ने लोगों को भंगी नहीं बनाया मुसलमानों की आबादी के जगह पर लगभग सारी भंगी आबादी का पाया जाना ही साबित करता है कि भंगी सूर्यवंशी क्षत्रिय सैनिकों को मुसलमान आक्रमणकारियों ने अपमान करने के लिए उस समय मैला ढुलवाकर यह नारकीय काम करवाया...उस समय लोगो द्वारा किया गया सुवर पालन भी इसका प्रमाण है कि लोगों ने मुसलमानों से औरतो को बचाने के लिए ही सूअर पालन शुरू किया क्योंकि मुस्लिम सूअर को नरक मानते थे उनका मानना है कि जो लड़की सूअर को छू लेती है अगर उसको वो छू लेगे या जबरदस्ती करेंगे तो उन्हें जन्नत नहीं मिलेगी इस तरह से हम लोगों ने अपनी औरतों की इज्जत भी इन आतताइयों से बचा ली...!
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