ताजमहल हीं क्यों भारत की पहचान "राम मंदिर क्यों नहीं"

जब भी कभी अपने विदेशी मित्रों से बात की, और पूछा कि वे भारत आने पर क्या-क्या देखना चाहते हैं, तो एक सुर में केवल एक जवाब सुनने को मिलता है, 'ताजमहल'। 

ताजमहल का विवाद चाहे जो हो, पर यह सच है कि ताजमहल एक अज़ीम इमारत है। इतना सुंदर कि आप उसे एक बार देखें तो उससे मोहब्बत हो ही जाए। मैं ताजमहल गया हूँ। ताजमहल तक जाने के लिए एक लंबी राहदरी पार करनी होती है, और उससे पहले एक विशाल द्वार। द्वार से होकर जब आप ताजमहल को देखते हैं तो कोई खास फर्क नहीं दिखता, पर जब आप आगे बढ़ते हैं, मतलब ताजमहल की ओर कदम बढ़ाते हैं तो कायदे से जिस ताजमहल को नजदीक आता हुआ दिखना चाहिए, वह दूर जाता हुआ दिखता है। ताजमहल को देखते-देखते उल्टे पाँव पीछे चलिए तो वह आपको नजदीक आता हुआ दिखेगा। 

उन इंजीनियरों को, उन कलाकारों को नमन है। ताजमहल पर संगमरमर को तराश कर जो बड़े सफेद फूल बने हैं वो ऊपर की ओर खिले हुए नहीं हैं, और न कलियों के रूप में बन्द। वे अधखुले से थोड़े से झुके हुए से हैं। कहते हैं कि शाहजहाँ ने जब ऊपर की ओर खिले फूलों को देखा तो प्रमुख कलाकार से कहा कि फूलों को थोड़ा झुका दो कि ये भी मुमताज के गम में गमगीन दिखें। 

संगमरमर की जाली मन मोह लेती है, और उन रंग-बिरंगे संगमरमर के टुकड़ों से बनी फूल-पत्तियां! अहा। मुझे तो उन दीवारों पर लिखी कुरान की अरबी में लिखी आयतें भी भली मालूम हुई। वे उस शानदार इमारत की बेमिशाल खूबसूरती का एक अंग प्रतीत हो रही थी। 

मैंने इसे देखा है, दुबारा देखने का मन है। पर जिन लोगों ने नहीं देखा, जिन विदेशियों ने नहीं देखा, वे क्यों देखना चाहते हैं? इसलिए कि इस ताजमहल के साथ एक रूहानी प्रेमकहानी जुड़ी है। एक पति ने अपनी पत्नी के प्रेम में, उसकी यादगार के तौर पर वर्षों का वक्त और अथाह धन खर्च कर एक ठोस यादगाह बनाई। कितना रोमांटिक है यह। प्रत्येक प्रेमी पति अपनी प्रेमिका पत्नी के लिए ऐसा ही कुछ करने की ख्वाहिश रखता है। 

मुझे पता है शाहजहाँ के बारे में, कि उसकी कितनी बीवियां थी, मुमताज के कितने बच्चे हुए और बच्चे जनते-जनते मरी, मरने के कुछ दी हफ्तों बाद शाहजहाँ के कारनामें फिर से चालू हुए, उसकी प्रिय बेटी ही उसके लिए मछलियां पकड़ती थी, आदि-इत्यादि। लेकिन मैं बात कर रहा हूँ कि आमजन को, विदेशियों को यह रोमांटिक कहानी ही पता है। अधिकांश लोगों को इतिहास की डिटेलिंग की जरूरत नहीं होती। बस एकाध मुख्य बात पता हो, उतना ही काफी है। लोग प्रेम-कहानी सुनकर आते हैं, और ताजमहल से मुहब्बत करने लगते हैं। मुझे उस प्रेम-कहानी की असलियत पता है, पी. एन. ओक को पढ़ा है, और मुझे ताजमहल से मुहब्बत है। 

कोई कुछ भी कहे, ताजमहल विश्व के समक्ष भारत की एक पहचान है। जैसे अमेरिका का स्टैचू ऑफ लिबर्टी, फ्रांस का एफिल टॉवर, दुबई का बुर्ज-खलीफा। भारत के स्टेचू ऑफ यूनिटी को अभी उतनी लोकप्रियता नहीं मिली है। 

कल फैसला आ गया। भक्ति भाव से मेरा दिल भरा हुआ है। पर इस भाव से निकलकर तनिक प्रयोगात्मक दृष्टि से सोचूं तो लगता है कि हिंदुओं को कितना अच्छा मौका हाथ लगा है। हिंदू विकेन्द्रित हैं। उनके पास होली वेटिकन जैसा कोई शहर नहीं है, पाक मक्का जैसी कोई जगह नहीं है। आज अयोध्या 500 सालों बाद मिली है, तो इसे हिंदुत्व का केंद्र बन जाना चाहिए। 

एक ऐसा मन्दिर बने जो आजतक की सभी इमारतों में सबसे नायाब हो। एक इमारत सिर्फ एक झूठी कहानी पर इतनी प्रसिद्ध हुई, आपको तो झूठी कहानी रचने की जरूरत नहीं, सच्ची कहानियां इतनी हैं, उन्हें ही प्रचारित कीजिये। दुनिया को बताइए कि हमारा राम कैसा है! वह अपनी सौतेली माँ की इच्छा पर पिता की आज्ञा पर राजा का पद छोड़ जंगल चला जाता है। उसके सौतेले भाई उससे इतना प्रेम करते हैं कि एक तो उनके साथ ही जाता है, और बाकी दो भी राजपाट छोड़ उसके पीछे चल देते हैं। वह एक बुढ़िया की ममता में उसके जूठे बेर खाता है। वह पत्नी वियोग में पागल हो जाता है। खुद वन-वन भटकता है पर अपने मित्रों के लिए बड़े-बड़े साम्राज्य जीतकर उन्हें राजा बना देता है। वह शत्रुदमन, जानकीवल्लभ, शरणागतवत्सल, जितेंद्रिय, प्रजावत्सल, दीनबंधु, दीनानाथ प्रभु श्रीराम हैं!

वह मन्दिर ऐसा हो कि उसकी एक-एक दीवार श्रीराम, हनुमान, लक्ष्मण की कहानियां बोलती हुई सी दिखाई दें। उन पर वह कहानियां कई-कई भाषाओं में अंकित हो। 

हमने पाँच सौ साल इतंजार किया है। दस-पंद्रह-पच्चीस साल और कर लेंगे पर मन्दिर ऐसा बने कि दुनिया देखती रह जाए। खर्च बहुत आएगा, पर सरकार यदि सुविधा दें तो तमाम हिंदू इतनी सम्पदा दे सकते हैं जिससे न जाने कितने मन्दिर बन जाए। 

मैं चाहता हूँ कि अगली बार जब अपने विदेशी मित्रों से प्रश्न करूँ तो वे कहें कि वे 'अयोध्या जाना चाहते हैं'। एक फाह्यान, एक व्हवेनसांग, एक अलबरूनी, एक मनूची की जगह पर हजारों-लाखों विदेशी इस इमारत को देखेंगे, राम को जानेंगे तो यकीन मानिए बहुत फर्क पड़ेगा।

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