गांधी_नेहरू_मक्कार_अग्रेजो_चापलूस_और_कुटिल_लोग_थे

अक्सर सुनने को मिलता है,,,, #सोशल_मीडिया को छोड़ कर #ग्राउंड_लेवल पर काम करना चाहिए।
जबकि
आपको मैं बता दूं कि इस सोशल मीडिया की ही वजह से मुझमे #दबी_पड़ी_राष्ट्रवाद_की_चिंगारी_आग_बनी_है।
और इसी की मदद से मै कई भटके हुओं को अब तक #कट्टर_राष्ट्रवाद और #हिन्दुत्व पे लाया हूँ।
और रही बात ग्राउंड लेवल की तो यह कोई #ढोल_पिटने का काम नही।
चूंकि मेरे मन मे ना कोई #पद का लालच है, ना मुझे #प्रतिष्ठा चाहिए।
जबकि इसके ठीक उल्टा मुझे कई जगहों पर बहुत बार #अपमान #विरोध और #उपेक्षा का भी सामना करना पड़ता है,,,!
किन्तु मैं अविचल भाव से सामने वालों की #मनोदशा,और #असुरक्षा के भाव का आनन्द लेता हूँ।
और सही देखा जाय तो मुझे ग्राउंड लेवल पर सच्चे लोग बहुत की कम मिले जो भी मिले सब पद, मान, प्रतिष्ठा और सत्ता के #लालची।
हां किन्तु जो सच्चे मीले है उनसे मेरा सतत सम्पर्क और हृदय से घनिष्ठता है।
बचपन मे जो #ऐतिहासिक_सत्य पूज्य पिताजी के मुख से कहानी के रूप में सुने थे जो तब अविश्वसनीय से लगते थे उनकी पुष्टि आज इसी सोशल मीडिया के कारण हुई है।
#पिताजी_पहले_गुरु_थे_जिन्होंने_मुझे_यह_पाठ_पढ़ाया_था
कि
#गांधी_नेहरू_मक्कार_अग्रेजो_चापलूस_और_कुटिल_लोग_थे।
उन्होंने ही
सबसे पहली बार मुझे बताया कि:-
#गोडसे_हत्यारा_या_अपराधी_नही_बल्कि_एक_महान_देश_भक्त_थे।
मेरे बालमन में जबकि सब दूर गांधी नेहरू की यशगाथा गाई जा रही हो तब इस बात पर विश्वास करना बेहद मुश्किल था किंतु आज यह सत्य सोशल मीडिया के माध्यम से स्थापित हो चुका है।
मैंने खुद ने सोशल मीडिया के वजह से सच को जाना है...

इस सोशल मीडिया से ही मैंने अपने कई  मित्रों को हिन्दुत्व, वीर सावरकर, श्री नाथूराम गोडसे जी के सच से रूबरू करवाया है।
मैं अपने काम से संतुष्ट हूँ।
अगर सोशल मीडिया से कुछ ना होता, तो आज यह #राष्ट्रवाद_की_आंधी न दिखाई दे रही होती।
आप  ऑफलाइन काम कीजिए,
हम  ऑनलाइन काम करते हें...
हम सबका उद्देश्य एक ही है...
मुझे #नकली,#पाखंडी और #चापलूसी_पसन्द लोग पसन्द नही है।
इसलिए इन लोगों से दूर से ही राम राम करता हूँ।
जो मुझको
#ऑनलाइन पहचाने हैं,
और
#ऑफलाइन को ऊँचा समझते हैं, वे कृपया मुझसे दूर ही रहे।

हमारे ब्राह्मण देवता आदरणीय "श्री हरिश शर्मा" जी अक्सर कहा करते थे!
हम सब सीधे साधे सरीफ लोग थे, आप सब यहां आकर हमें हमारे धर्म के प्रति कट्टर बनाए। कटुओं से हम कभी नफरत नहीं करते थे, लेकिन आपके विचार कौम विशेष के प्रति सदैव प्रेरक रहा।

"ठाकुर की कलम से"

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