{🌷गांधी वध क्यों🌷}
"ठाकुर की कलम से"
***30 जनवरी 1948 को नाथूराम ने गांधी कि गोली मारकें हत्या कर दिया था !!
***लेकिन नाथूराम गोडसे घटना स्थल से भागा नही आतंकियों जैसे बल्कि उसने आत्म समर्पण कर दिया !!
***1919 को अमृतसर कें जलियांवाला बाग गोली कांड कें बाद पुरे देश मे ब्रिटेस हुकूमत कें खिलाफ आक्रोश उफान पे था!! भारत कि जनता इस घटना कें खलनायक रहे #जनरल_डायर पर अभियोग चलाने कि मंशा को लेके #गाधी कें पास गये ,, लेकिन महात्मा गाधी ने इस आग्रह को समर्थन देने से साफ साफ मना कर दिया !! महात्मा गांधी ने खिलाफत आन्दोलन का समर्थन करके भारत कें राजनीति मे #सांप्रदायिकता का जहर घोल दिया ।
***महात्मा गांधी खुद को #मुसलमानों का हितैशी कि तरह पेश करते थे !!
***केरल मे मोपला मुसलमानों द्वारा वहा कें 1500 #हिन्दुओ मारने औऱ 2000 से अधिक हिन्दुओं को मुसलमान बनाये जाने घटना का विरोध तक नही किया ।
***कांग्रेस कें त्रिपुरा अधिवेसन मे नेता जी #सुभाष_चंद्र_बोस को बहुमत से कांग्रेस का अध्यक्ष चुन लिया गया था !! किन्तु गाँधी ने अपने प्रिय मित्र सीता रमईया को समर्थन दे दिया,, गांधी ने सुभाष चंद्र बोस जी से जोर जबरदस्ती करके उनको इस्तीफा देने पे मजबूर कर दिया ।
***23 मार्च 1931 को (भगत सिंह ,, सुखदेव ,, औऱ राजगुरु ) को फांसी दे दी गयी !! गांधी ने कश्मीर कें हिन्दू राजा हरिसिंह से क़हा !! कश्मीर मुस्लिम बहुल्य छेत्र है अतः वहा का शासक कोइ मुसलमान होना चाहिए औऱ राजा हरिसिंह को शासन छोड़कर काशी जाके प्रायश्चित करना चाहिए ! जबकि । हैदराबाद कें #निजाम कें शासन का गाँधी ने समर्थन किया ! जबकि हैदराबाद हिन्दू बहुल्य छेत्र था !!
***महात्मा गांधी कि नीतिया धर्म कें साथ बदलती रहती थी उनके मृत्यु कें बाद #सरदार_पटेल ने सशकत बलो से हैदराबाद को भारत मे मिलाने का कार्य किया !! गाँधी कें रहते ऐसा करना सम्भव नही था !!
***पकिस्तान मे होने वाले भिसड #खून_खराबे से परेशान होके किसी तरह अपनी जान बचा कें भारत आने वाले हिन्दुओ ने जब दिल्ली कें खाली मस्जिद मे आश्रय लिया तो मुसलमानो मे मस्जिद मे रहने वाले हिन्दुओ का विरोध किया !! जिसके आगे गाँधी जी को मुसलमानों कें आगे (#झुकना ) पड़ा औऱ गांधी ने उन लाचार हिन्दुओ को जिनमे( बुड्ढे ,, स्त्रिया,, बालक ,,) अधिक थे उन सबको मस्जिदों से भगा दिया गया बाहर सर्दियों से ठिठुरते हुए उन्हें रात बीतने पर मजबूर कर दिया गया !!
***महात्मा गाँधी ने दिल्ली स्थित मंदिर मे अपनी प्राथना सभा कें दौरान #नमाज पढ़ी
जिसका मंदिर कें पुजारी से लेके तमाम हिन्दुओं ने इसका विरोध किया दरकिनार कर दिया !! महात्मा गाँधी एक बार भी मस्जिदों मे जाके एक बार भी #गीता का पाठ कभी नही किया !!
***लाहौर कांग्रेस ने #बल्लब_भाई_पटेल बहुमत से विजय प्राप्त कर गये लेकिन गांधी ने अपनी जिद कें कारण ये पद #जवाहर_लाल_नेहरू को दे गये !!
***गांधी अपनी बात मनवाने कें लिए (धरना ,,रूठना ,,अनशन ,,) किसी से बात ना । करने जैसा युक्तियों को अपनाकर अपना काम निकलवाने मे माहिर था!!
***14 जून 1947 को दिल्ली मे आयोजित अखिल भरतीय कांग्रेस समिति कि बैठक भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था !! लेकिन गाँधी ने पहुच कर भारत विभाजन का समर्थन रखा !! ये भी तव जबकि । गाँधी ने खुद क़हा था देश का विभाजन उनके लाश पे होगी !! नाकि देश का विभाजन हुआ बल्कि लाखो निर्दोष लोगो का कत्लेआम भी हुआ गांधी ने कुछ नही किया !!
***धर्म- निरपेक्षता कें नाम पे मुस्लिम तुष्टीकरण नीति कें जन्मदाता महात्मा गाँधी ही थे !! जब मुसलमानों ने #हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने का विरोध किया तब महात्मा गांधी ने इसको स्वीकार कर लिया !! हिन्दी कि जगह हिन्दुस्तानी होने का बढावा देने लगे !!
***कुछ एक मुसलमान द्वारा वन्देमातरम गाने का विरोध करने पे महात्मा गाँधी झुक गया !! औऱ इस प्रस्ताव को भारत का राष्ट्र गान नही बनने दिया !!
***महात्मा गाँधी ने अनेक अवसरों पे (महारणा प्रताप ,,वीर शिवा जी ,,गुरु गोविंद सिंह जी) को पद भ्रष्ट देश भक्त क़हा !! वही दूसरी ओर गांधी ने #मोहम्मद अली जिन्ना को #कायदे आजम कहकर पुकारा !!
***कांग्रेस ने 1931 मे स्वतन्त्र भारत के राष्ट्र ध्वज बनाये जाने के लिए समिति का गठन किया था इस समिति ने सर्व सम्मति से चरखा औऱ भगवा वस्त्र को भारत का राष्ट्र ध्वज के डिजाइन को मान्यता दी !! किन्तु गाँधी के जिद के कारण उसमे तिरंगा बनाया गया !!
***जब सरदार बल्लव भाई पटेल के नेतृत्व मे सोम नाथ मंदिर का सरकारी खजाने पे पुनः निर्माण करने का प्रस्ताव पारित किया गया तव गांधी जो कि मंत्रिमंडल के सदस्य भी नही थे सोमनाथ के मंदिर को सरकारी खर्च पे निर्माण के प्रस्ताव को निरस्तर कर दिया !! जबकि 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पे दिल्ली कि मस्जिदों को सरकारी खर्च से पुनःनिर्माण कराने का दबाव डालने लगे !!
***भारत को स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान को एक समझौते के तहत पाकिस्तान को 75 करोड़ रुपए देने थे !! भारत ने 20 करोड़ रुपए दे भी दिये थे !! लेकीन इसी बीच 22 अक्टूबर 1947 को पकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया !! केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 55 करोड़ रुपए ना देने का निर्णय ले लिया था !! जिसका महात्मा गांधी ने विरोध किया औऱ आमरण अनशन करना शुरु कर दिया जिसके परिणाम स्वरूप भारत को 55 करोड़ कि राशि देनी पड़ी !!
***महात्मा गाँधी भारत के नही अपितु पकिस्तान के राष्ट्र पिता थे जो हर कदम पकिस्तान का पक्ष मे खड़े रहे फिर चाहे पाकिस्तान कि मांग जायज हो या नाजायज गाँधी ने कभी इसकी प्रवाह नही किया ।
मित्रों!
अब आप सब खुद विचार कीजिए देश भक्त कौन था औऱ देश द्रोही कौन था।
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