हे जिहादी ! हर जिहाद का बदला जब सनातनी हिन्दू लेगा तो जमाना याद रखेगा याद रखना

"भूरा बाल साफ करो" का नारा लालू ने बिहार में अपनी राजनीति चमकाने के लिए दिया था, तब माओवादियों या लालू के गुंडों ने चुन चुन कर भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, लाला(कायस्थ) का सामूहिक नरसंहार शुरू कर दिया, पूरे बिहार में हाहाकार मच गया, अविभाजित बिहार कश्मीर, केरल या कैराना बन चुका था, परिजन की लाश जलाने के लिए भी गांव में जाने की हिम्मत किसी में नहीं थी, खेत खलिहान सब वीरान थे।

तब बिहार का मुख्यमंत्री लालू प्रसाद था इसलिए सुनने वाला कोई नहीं था, क्योकि ये सारा खूनी खेल उसी के दिमाग की उपज थी, क्योकि यह वर्ग लालू को वोट नहीं देता था इसलिए लालू वामपंथियों माओवादियों  के साथ मिलकर इनका नामोनिशान पूरी तरह मिटा देने पर आमादा था।

तब एक बुजुर्ग ने सीना ठोंका, एक गोपनीय जगह कुछ लोगों के साथ बैठक की, और हाथों में हथियार उठाने का संकल्प लिया और एक संगठन की नींव रखी, इस संग़ठन का नाम था 'रणवीर सेना'।

सबसे पहले कुछ गिने चुने लोगो ने अपने लाइसेंसी हथियार आगे किये और सहायता दी, यह छोटी सी पहल रंग लाई और इसके बाद फिर जो हुआ वो इतिहास बन गया,माओवादी हिंसा, माओवाद के विरोध में एक शक्तिशाली रणवीर सेना का गठन हुआ, हर परिवार से एक युवा या एक बंदूक और उनसे नियमित आर्थिक सहयोग लिया गया, सभी युवाओं को शस्त्र संचालन के साथ साथ अपने परिवार और गांव की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया गया।

घरों के सदस्य,युवा रात्रि में क्रमिक रूप से जागकर अपने घर परिवार और गांव की सुरक्षा करने लगे, जब भी एमसीसी, सीपीआई, माले जैसे माओवादी संगठन किसी गांव को घेर कर निर्दोषो की हत्याएं करते वैसे ही रणवीर सेना के सक्रिय सदस्य उन हत्यारो की पहचान कर, अपराधियो के गांवों में जाकर एक हत्या के बदले 10 माओवादियों की हत्या कर देते, एक निर्दोष के बदले में रणवीर सेना 10 हत्यारो को मौत के घाट उतार देती, दोनो और से खून की नदियां बह चली।

पर रणवीर सेना ने कभी निर्दोष लोगों को निशाना नहीं बनाया, केवल माओवादियों को ही मौत की नींद सुलाया, मुखबिरों और माओवादी समर्थकों को भी नहीं छोड़ा, कुछ ही सालों में रणवीर सेना का नाम सुनकर बड़े बड़े पुलिस अधिकारियों के रोंगटे खड़े हो जाते, मंत्री, विधायक सांसदों में खौफ समा जाता, बहुत से राजनेता भी रणवीर सेना के समर्थन में आ गए।

माओवादी जो कल तक कहीं भी किसी भी निर्दोष को मारकर निश्चिन्त रहते थे, वो अब एक भी व्यक्ति को मारने के पहले दस बार सोचते थे, क्योकि एक के बदले दस का मारा जाना तय था, पुरे बिहार में अमन चैन लौट आया, माओवादी भाग कर बंगाल में घुस गए, लाखों लोग वापस अपने गांव लौट कर खेती करने लगे, आम लोगो के दिलो का भय खत्म हो गया।

यह कारनामा जिस समुदाय ने किया था वह समुदाय था बिहार का सबसे कद्दावर समाज "भूमिहार ब्राह्मण" जो भगवान परशुराम और महर्षि द्रोणाचार्य की परंपरा का अनुगामी होने के कारण शास्त्र और शस्त्र अर्थात ज्ञान, विद्या, बुद्धि, धर्मपालन और शौर्य, साहस दोनों में समान अधिकार रखता है, इसी समाज में एक बुजुर्ग शख्स थे जिन्होंने रणवीर सेना का निर्माण किया था उस वह बुजुर्ग व्यक्ति का नाम था-'ब्रह्मेश्वर सिंह मुखिया' जो लोगों के लिए अवतार बन कर आये थे।

माओवादी हिंसा, हत्याकांड के विरोध में ब्रह्मेश्वर मुखिया जी के नेतृत्व में ही शक्तिशाली रणवीर सेना का गठन हुआ था, उनके विराट व्यक्तित्व के तेज के सामने माओवादी हिंसा ने उनके कदमो में दम तोड़ दिया।

बिहार के जो क्षेत्र माओवादियों का गढ़ बन गए थे और ये माना जाने लगा था कि उन्हें वहां से उनको कोई उखाड़ नहीं सकता वे माओवादी देखते ही देखते बिहार से भाग खड़े हुए, जो काम राज्य और केंद्र की सरकार पुलिस और सेना के रहते हुए भी न कर सकी वह रणवीर सेना और ब्रह्मेश्वर सिंह मुखिया ने अपने बल-बुद्धि और साहस से कर दिखाया, देखते ही देखते बिहार माओवादी हिंसा और हत्यारो से मुक्त हो गया।

आज बंगाल, केरल और देश के विभिन्न हिस्सों में जिस तरह का खूनी खेल चल रहा है और निर्दोषों को मौत के घाट उतारा जा रहा उसे देखते हुए आज बंगाल, बंगालियों और पूरे भारत को भी रणवीर सेना जैसे संगठन और ब्रह्मेश्वर मुखिया जैसे आधुनिक परशुराम जैसे किसी नेतृत्व की जरूरत है, जो एक के बदले 10 के सिंद्धान्त पर चले, तभी बंगाल, बंगालियों और पूरे देश की पीड़ाओं का अंत हो पायेगा।

निर्दोषो को मारने वालो के प्रति कोई ह्यूमन राइट जाती धर्म मायने नही रखनी चाहिए जब एक निर्दोष की हत्या होती है तो उसके साथ उसके पीछे पूरे परिवार की जीते जी हत्या हो जाती है।।

हे जिहादी ! हर जिहाद का बदला जब सनातनी हिन्दू लेगा तो जमाना याद रखेगा याद रखना ....💐

💐कमलेश तिवारी का बलिदान
याद रखेगा अब सनातनी हिन्दू जवान💐

जय श्री राम,
वन्देमातरम् 
जय मां भारती .....

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