इसे ला एंड आर्डर और सरकारों से जोड़ कर आप हिंदुत्व की धार ही भोतरी कर रहे हैं!!!!!
अपना गुस्सा निकालने के लिए सबसे आसान सरकारों को कोसें ????
हम हिन्दू के नाते व्यवहार तो करें
कमलेश तिवारी ने एक मौलाना की बातो की प्रतिक्रिया में एक बयान दिया था जिसके लिए उन्हें तत्कालीन अखिलेश की नमाजवादी सरकार ने लगभग दो वर्ष तक जेल में बन्द रखा था,(राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत),
यानी राष्ट्रीय रक्षा के लिये उन्हें जेल में रखना जरूरी था,
आपका लोकतंत्र कानून इस तरह उन्हें उनकी अभिव्यक्ति के लिए दण्डित करता रहा ताकि जिनकी भावनाएं आहत हुई उनका गुस्सा वैध बना रहे और उन्हें लगे कि सजा दी गयी और दूसरे हिन्दुओ को ये बात समझ आये की प्रतिक्रिया औकात में रह के दे ।
अब चूँकि आज कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गयी तो दो सवाल खडे हुए क्या आपके कानून के हिसाब से कार्यवाही करने से आहत समाज उसे इंसाफ़ मानता है?
इस्लामिक सोच के हिसाब से जो सजा मिलनी चाहिए वही सजा उन्हें मंजूर है ,अब इस मानसिकता का काट अगर आप "लॉ एंड आर्डर " "डेमोक्रेसी" आदि में खोजते है तो फिर आप अपने शत्रु को ठीक से पहचान नही पाये है।
कुछ भी करोगे जो शरीयत के खिलाफ है,तो सज़ा इस्लामिक तौर तरीके से ही दी जायेगी, ये आपका कोर्ट और कानून उनकी मानसिकता और नज़र में "जूती " है। ,
"जेहाद" का सामना "कानून" नही कर सकेगा ,लोकतंत्र नही कर सकेगा !!!!!!!
एक ही रास्ता है !!!!!!
संगठित हिन्दू...... और हाँ शोर मत मचाओ शांति से काम करो। हम शोर अधिक मचाते हैं, वीडियो बनाते हैं ये काम मीडिया पर छोड़ दो आपकी वीरता के किस्से मीडिया को सुनाने दो।
घर में विजय दशमी को परिवार सहित शस्त्र पूजा की ही होगी जैसे दिवाली पर लक्ष्मी जी की पूजा करते हो
और हाँ आत्म रक्षा के लिए सैदेव तैयार रहिये कोई कानून रक्षा नहीं करेगा, पुलिस का काम इन्वेस्टिगेशन और प्रॉसिक्यूशन तक सीमित है !
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