ध्यान से पढिये और समझिये
इस रविवार को कृपया नजदीकी चिकन शॉप चले जाएँ। आप अगर शाकाहारी हैं तो अवश्य जाएँ और देखें। अगर आप खानेवाले हैं तो ध्यान से देखें।
यह इसलिए कह रहा हूँ कि जो बतानेवाला हूँ, आप स्वयं अपनी आँखों से भी देख सकें। स्वयं देखी हुई बात का वजन अधिक होता है।
चिकन शॉप में आप को पिंजड़े में रखी ब्रोईलर मुर्गियाँ दिखेंगी। कसाई जब पिंजड़ा खोलेगा तब जिस मुर्गी के पास से उसका हाथ जाएगा वही चिल्लाएगी, बाकी सिमटकर दूर खिसकने का प्रयास करेंगी। वह भी बिना आवाज किए। फिर वो जिसकी गर्दन पकड़कर बाहर निकालेगा वह जी जान से चिल्लाएगी, लेकिन बाकी शांत रहेंगी, और कोई भी कसाई के हाथ को काटने की कोशिश नहीं करेंगी। अगर बाहर निकाली मुर्गी को कस्टमर नकारता है तो कसाई उसे वापस पिंजरे में फेंकता है । वो तब तक चिल्लाती रहेगी लेकिन जब पिंजरे में अंदर जाएगी तो शांत हो जाएगी। यही दूसरी मुर्गी के साथ रिपिट होगा लेकिन पहली मुर्गी कसाई का प्रतिकार करने की बिलकुल भी कोशिश नहीं करेगी।
जो मुर्गी फाइनली कटती है वह ऑफ कोर्स चिल्लाती है, और जब कसाई उसकी गर्दन पर छुरी फेरकर उसे बंद पीपे में तड़पने के लिए फेंक देता है ताकि दुकान में खून बहाती न दौड़े - उसकी अंतिम छटपटहट सब को सुनाई देती हैं, लेकिन बाकी मुर्गियों से कोई आवाज नहीं होती ।
कमलेश तिवारी की हत्या की कहानी इससे कितनी अलग है ?
कृपया मुर्गी बनके ना जीये!!!
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