दोस्तो, यहाँ संसार के बहुत से देश काफी तरक्की कर चुके हैं वहाँ संसार का इतना बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद भी हम कहां खड़े हैं, यह हमारी हकीकत बताने में काफी है ! आज भारतीयों को जितना नुकसान दुश्मन देश की वजह से हुआ है उससे कहीं अधिक हमारी नासमझी के कारण राजनीतिक पार्टियों द्वारा हुआ है ; क्योंकि यह कहीं ना कहीं हमें बांट कर राज करने में मशगूल है और तब तक ऐसा होता रहेगा जब तक कम से कम हम अपने आप को धर्म (हिंदू ,सिख, मुस्लिम इत्यादि) तथा समाज (जात-पात ऊंच-नीच) की पाबंदियों से बाहर नहीं निकाल पाते ! हमें बांटने में पार्टीयो को सहूलियत मिलती है ! खासतौर पर वह पार्टीयाँ जो जन्मजात एक ही घर से बंधी हुई है ! राजनीति एक धंधा बन गया है तो फिर जो घर पहले से इस धंधे में है वह इसे कैसे छोड़ सकते हैं !
इसलिए दोस्तों हमारा तब तक भला नहीं हो सकता जब तक हम अपनी जात पात सामाजिक पद प्रतिष्ठा धर्म से आगे बढ़कर एक भारतीय नहीं हो जाते ! एक भारतीय होने में सबसे पहले हमें अपनी पहचान इस देश की पुरातन संस्कृति को मजबूती से थामना होगा !चाहे हमारे समाज के कुछ लोगों का /कुछ घरों का सोच में/ रहन सहन /मान्यता/ पूजा पाठ इत्यादि में परिवर्तन आ चुका है ! परंतु हमारे पूर्वज एक ही हैं !
दोस्तों जैसा कि मैं पहले भी लिख चुका हूं संसार को देशों में बांटा गया है और हमारी पहचान पहले हिंदुस्तानी/ हिंदू थी ; अब भारतीय/ इंडियन है ! देश किसी भी धर्म से ऊपर होता है और देश का कानून धर्म संगत होना चाहिए !
धर्म एक ही है और वह है इंसानियत ! बाकी पूजा पाठ इत्यादि अलग हो सकते हैं ,इससे कोई अंतर नहीं पड़ता ! अंतर पड़ता है जब एक तबके के लोग दूसरे लोगों को किसी न किसी कारण/ लालच /ढंग से अपने में मिलाना (धर्म परिवर्तन) चाहते हैं !
सामाजिक बदलाव परिवर्तन से इस देश के बहुसंख्यक समाज को पहले से ही बांटने की कोशिश होती रहती है ! इस बहुसंख्यक समाज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सबका सम्मान करता है ! हर पूजा स्थल को शीश झुकाता रहा है ! परंतु अतीत के खट्टे अनुभवों से इनकी सोच में भी बदलाव आने लगा है ! इस समाज के कुछ गद्दारों का भी इसमें योगदान है जो अब भी हकीकत को ना समझ कर दुश्मन के हाथों में खेल रहे हैं ! आज भी हमारी संस्कृति पर किसी न किसी रूप में हमला होता ही रहता है चाहे रावण को आगे खड़ा करके हमारी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जाता हो !
गद्दारों से मैं यही कहूंगा कि तुम्हारी वजह से अगर हमारी भावनाओं को ठेस पहुंची तो फिर उसका अगला पिछला हिसाब होने में भी देर नहीं लगेगी ! क्योंकि आज बहुसंख्यक वर्ग भी अपनी पिछली गलतियों से काफी कुछ सीख चुका है ! जो लोग ईश्वर को मानते हैं वह कभी भी श्री राम और माता सीता के खिलाफ बोलने से पहले 10 बार सोचेंगे !
आइए सब मिलकर अपनी पुरातन संस्कृति की रक्षा करें ! इसी में इस देश का भला है
जय श्री राम
जय हिंद
"ठाकुर की कलम से"
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