मैंने जो भी लिखा है वह एक अंतिम उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही लिखा । ये लोग कोई बीच के मील के पत्थर या नींव के भी पत्थर नहीं हैं

मैंने जो भी लिखा है वह एक अंतिम उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही लिखा । ये लोग कोई बीच के मील के पत्थर या नींव के भी पत्थर नहीं हैं। जिंदगी के लगभग 12 वर्षों तक मैंने उनकी सहायता की है। शाखा गया हूँ, राजनीति देखी है, पक्षकार्य किया है। आज लिख रहा हूँ वह भी मतदान पूरा होने के बाद। हरियाणा में कोई जीते या हारे, मुझे व्यक्तिगत कोई फर्क नहीं पड़ा रहा। बल्कि हारे तो भाजपा को सबक मिला ऐसा मुझे लगना चाहिए ना ?

नहीं। मुझे ऐसा बिलकुल नहीं लगता। ब आगे जो लिख रहा हूँ उसे ध्यान देकर पढ़िएगा।

आज से दस साल पहले हरियाणा में भाजपा नेपथ्य में थी। कार्यकर्ताओं की बदौलत आज जिस मुकाम पर है। हर पार्टी कार्यकर्ता को इसे अच्छुण बनाए रखना चाहिए। अति महत्वाकांक्षा में हम पार्टी को फिर पुरानी स्थिति में लायेंगे। जिसे हम खुद सहन नहीं कर पायेंगे। बागी बनकर आप भाजपा को पुनः दस साल पीछे धकेलना चाहते हैं। ये आपकी अतिमहत्वाकांक्षा हीं है। हमारे अंतिम उद्देश्य के परिप्रेक्ष्य में मैं, संभाव्य जीतकर आनेवाले खट्टर जी और मोदी जी और शाह जी ये भी सभी मील के पत्थर हैं, नींव के पत्थर हैं।

आज भाजपा हिंदुराष्ट्र की आवश्यकता है। सावरकर जी ने जो त्याग किया उनकी बराबरी में मैं हमारा त्याग नहीं गिनता। आज भाजपा का सत्ता में होना यही हिंदुराष्ट्र की नींव है और नींव का हर पत्थर सीध में ही बैठा जाना चाहिए। यहाँ कई इंजीनियर आएंगे। आज वे मोदी और शाह हैं। अनेक राजमिस्त्री आएंगे। उनको कोई एक पत्थर किसी एक जगह नहीं चाहिए। मानना चाहिए, सही गलत के झमेले में नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि नींव मजबूत चाहिए, इमारत बनाने में देरी न हो। तकलीफ़ें होंगी तो झेलनी चाहिए। कई बागियों ने कोई विद्रोह नहीं किया है, इसलिए उनके शतश: आभार। जब भाजपा सरकार नहीं थी तो क्या हालात थे, मैंने अपनी आँखों से देखा है। अब वे दिन दुबारा नहीं चाहिए, किसी भी कीमत पर। हमने वो कीमत चुकाई है सरकार लाने की, जिन्होने नहीं चुकाई वे हुज्जत करें, पक्ष को सबक सिखाने की मगरूरी दिखाये। वे इतिहास नहीं जानते, कहाँ से कहाँ तक आए हैं उस यात्रा को नहीं जानते। तैयार परोसा हुआ मिला है उसे टिकाये रखने की अक़ल नहीं है इतना ही कह सकता हूँ।

अगले पचास सालों को देखने की सोच रखिए। यहाँ जो घट रहा है वह भविष्य की घटनाओं की नींव रखी जा रही है। आज जो कुछ देख रहा हूँ, इसकी जड़ें 40 साल पहले की परिस्थिति में हैं। धन्यवाद, जय हिन्द ।

इनकी मानसिकता और सोच को सलाम। गहरा वैचारिक समर्पण हो तो ऐसा ।

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