वे दोनों देश 55 मुस्लिम देशों को गुलाम बनाने की साजिश पर काम कर सकें???

अमेरिका मुस्लिम देशों को गुलाम बनाने की साजिश इजरायल की मोसाद गुप्तचर एजेंसी के साथ मिलकर रच रहा है" और यह भी  आशंका जताई जा रही है कि ये  दोनों ही -- मुस्लिमों देशों के बढ़ते वर्चस्व का हौव्वा दिखाकर दुनियाँ में इस्लामिक फोबिया खड़ा करना चाहते हैं ।

मेरी चिंता और आशंका  सही हो सकती हैं । परन्तु इसके लिए पहले देखना होगा कि क्यों मुस्लिम समुदाय  शिया और सुन्नी विवाद को तर्कपूर्ण और संवादात्मक कार्य शैली से हल नहीं करना चाहते हैं?  क्या इन्हें मार काट के अलावा कोई और तरीका नहीं पता??
क्या कोई ऐसा मुस्लिम देश बता सकते हैं जहां शिया और सुन्नी समुदाय के लोग सम्मान व शान्ति के साथ रह रहे हैं??? इसके अलावा अपने मित्रों का शुभचिंतक होने के नाते मेरा सुझाव है कि वे इस कटु सच्चाई को स्वीकार करे कि हमारे दौर में गैर मुस्लिमों के बीच मुस्लिमों की विश्वसनीयता कम होती जा रही है  म्यांमार, श्रीलंका, रूस, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस और चीन जैसे अनेक छोटे बड़े देशों में मुस्लिम समुदाय की प्रतिष्ठा का गिरता स्तर अब किसी से भी छिपा नहीं रहा है
दूसरे यूरोपीय देशों में भी स्थिति बेहतर नहीं कही जा सकती है ।अतः आज आवश्यकता है कि आधुनिक शिक्षित और सुलझे हुए  मुस्लिम विद्वानों का कर्तव्य है कि वे इस्लामिक इतिहास का आलोचनात्मक अध्ययन करें और बतायें कि क्यों मुस्लिम, मुस्लिम के खून का प्यासा है अपने उद्भव और विकास के विभिन्न दौरों में?  क्योंकि जब कोई गम्भीर मतभेद बीच में होता है तभी किसी तीसरे के बीच में आने और मामले को अपने अनुसार प्रभावित करने की चेष्टा कर सकता है ।
अन्यथा अमेरिका और इसराइल की ऐसी कौन सी शक्ति है और वह कौन सी तकनीकी है कि वे दोनों देश 55 मुस्लिम देशों को गुलाम बनाने की साजिश पर काम कर सकें???

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