खबरों में बहुत खबर दब जाती है या दबा दी जाती है

खबरों में बहुत खबर दब जाती है या दबा दी जाती है.

कल सोनिया और मनमोहन चिदम्बरम को मिलने गए हैं. पहली बार हुआ होगा कि एक पूर्व प्रधानमंत्री किसी भ्रष्ट से मिलने तिहाड़ जाए, लेकिन वह गुलाम ज्यादा है तो समझ जा सकता है. यह भी पहली बार है कि महारानी सोनिया किसी से मिलने तिहाड़ गयी है.

तो आखिर चक्कर क्या है? क्या चिदम्बरम ने उनको ब्लैकमेल किया है ? क्योंकि इससे पहले अहमद पटेल और गुलाम नबी भी चिदम्बरम को मिलकर आये थे और शायद तब बात नहीं बनी और चिदम्बरम ने डायरेक्ट सोनिया को आने को कहा होगा और सोनिया ने मनमोधन को साथ में लिया होगा.

यह शक और इसलिए गहराता है कि इसके तुरन्त बाद गूंगे मनमोहन ने प्रेस कांफ्रेंस में घोटालों का ठीकरा अधिकारियों पर फोड़ा.

इन सब बातों पर लम्बी डिबेट होनी चाहिए थी, पर मीडिया खामोश है. मीडिया और अहमद पटेल के रिश्ते भी सब जानते हैं, तो क्या ऊपर से आर्डर है कि जनता का इसपर ध्यान नहीं पड़ना चाहिए. साथ ही ऐसा क्या आश्वासन दिया होगा सोनिया ने चिदम्बरम को?

क्या सुप्रीम कोर्ट को धमकाया जाएगा? क्या सरकार को धमकाया जाएगा? क्या अधिकारियों को धमकाया जा रहा है?
क्या कोई कृत्रिम मुद्दा लेकर सड़कों पर उपद्रव करवाया जाएगा? सुना है दिल्ली में 15000 किसान इकट्ठे हो रहे हैं?
क्या इकॉनामी के नाम पर हंगामा किया जाएगा? या फिर हमेशा की तरह पाकिस्तान से मदद ली जाएगी? सुना है कि बालाकोट में फिर से आतंकी भर्ती और ट्रेन होना शुरू हो गए हैं.

इस खबर पर आप नजर रखिये. कहीं ऐसा न हो कि किसी मुद्दे पर आप कांग्रेस के षड्यंत्र का शिकार हो जाएं. सुना है आजकल प्याज महंगी हो गयी है. यूँ तो इस सीजन में होती रहती हैं, लेकिन फिर भी एक खबर यह बता दूं कि कुछ साल पहले इसी तरह दिल्ली सरकार ने सस्ते में प्याज खरीदकर महंगे में बेची थी, जिसकी जांच भी शुरू की थी. तो ऐसा भी हो सकता है कि मार्किट में रोजमर्रा की चीजें स्टॉक करके महंगाई के नाम पर सरकार को ब्लैकमेल किया जाय.

आखिर चिदम्बरम के बाद अगले नम्बर महारानी का ही लगना है, यदि चिदम्बरम बाहर नहीं निकलता है तो... तो क्या महारानी यूँ ही खाली बैठे अपने जेल जाने का इन्तेजार करेगी? यह एक गंभीर प्रश्न है..

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