कौन जात , अर्थात रवीश कुमार को पहला गौरी लंकेश अवार्ड दिया गया है।


कौन जात , अर्थात  रवीश कुमार को पहला गौरी लंकेश अवार्ड दिया गया है।

बगल में तीस्ता सीतलवाड़ बैठी हुई हैं। मैडम जूरी में थीं। इन्होंने ही रवीश कुमार G  को चुना है।

अब इनके बारे में जान लीजिए कि ये मैडम हैं कौन? ये वही तीस्ता सीतलवाड़ हैं जिन पर गुजरात की दंगा प्रभावित गुलबर्ग सोसाइटी के दंगा पीड़ितों का भारी चंदा पी जाने का संगीन आरोप है। आरोप मोदी सरकार ने नही लगाया है। उसी गुलबर्ग सोसाइटी के मुसलमानों ने लगाया है। मैडम ने एक "दंगा म्युज़िम" बनाने के नाम पर उनसे भारी चंदा लिया और उसे बिना डकार लिए हज़म कर गयीं।

इतना ही नही मैडम ने कांग्रेस राज़ में HRD मिनिस्ट्री से अपने सबरंग NGO के लिए 1.40 करोड़ का फंड लिया। सर्व शिक्षा अभियान के नाम पर। और उसके अपनी "पर्सनल शॉपिंग" की दीक्षा ले ली। जांच में शापिंग और दारु के बिल तक बरामद हो गए। फ़िलहाल अग्रिम जमानत पर चल रही हैं।

सोचिए, ये नैतिकता के पुजारी इनके हाथों का चुना हुआ अवार्ड लेने पहुंच गए।

मने आप अपने सगे भाई को सोनिया गांधी की कृपा से कांग्रेस का टिकट दिलवा दीजिए। उसे दलित लड़की के शोषण , वेश्यावृत्ति  के मामले में एफआईआर और NBW के बावजूद लालू की सरकार में गिरफ्तारी से बचा लीजिए।

ब्लैक मनी की जांच में गले तक फंसी एनडीटीवी से मोटी तनख्वाह उठा लीजिए। दंगा पीड़ितों के रुपए हज़म कर जाने की आरोपी से इनाम उठा लीजिए। आप सब कर लीजिए। पर आपको कोई कुछ नही सकता है। आपके पास सेक्युलरिज़्म का ठेका जो है!

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