सुप्रीम कोर्ट को सरकार चलाने का चसका लग गया लगता है --
बस एक आदेश दे दे मोदी को -
कोई बिल संसद में लाने से पहले हमसे मंजूर कराओ -
कौन सा ऐसा कानून है जो संसद में पास होने के बाद उस पर
सुप्रीम कोर्ट ऑपरेशन करने ना बैठता हो --हर कोई मुंह उठा
कर अदालत पहुँच जाता है और PIL दायर करके हर कानून
को चुनौती दे देता है और सुप्रीम कोर्ट उस पर पंचायत बिठा
देता है --ऐसा लगता है अदालत को सरकार चलाने का चसका
लग गया है --
आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को दिए गए आरक्षण को अदालत
देख रही है, ट्रिपल तलाक को भी चुनौती दी जा चुकी है और ना
जाने कितने कानून हैं जिन पर अदालत की कैंची चल सकती है
और विगत में चली है --मतलब प्रॉक्सी के द्वारा सरकार चलाने का
प्रयास चल रहा है -- इतना ही नहीं, सेना को देश की रक्षा कैसे
करनी है पत्थरबाजों से, उसमे भी अदालत ने अपनी ही चला दी
और पेलेट गन बंद कर दी --यानि सैनिकों को मरने के लिए छोड़
दिया --
पिछले 5 साल में अनेक कानूनों का सुप्रीम कोर्ट ने ऑपरेशन
किया है जिनकी आवश्यकता नहीं थी --सरकार को रफाल लेना
है या नहीं सरकार का काम है देखना, देश की सुरक्षा के लिए
रोहिंग्या को देश में रखना है या नहीं, ये देखना सरकार का काम
है मगर सुप्रीम कोर्ट ने अपने हाथ में ले लिया और ले कर बैठ गए,
फैसला नहीं कर रहे --
जजों की नियुक्ति के लिए संसद में सर्वसम्मति से (NJAC) बिल
पास किया जिसका मतलब था कि देश की 125 करोड़ जनता
ने बिल पास किया है मगर अदालत ने उसे असंवैधानिक बता
कर रद्द कर दिया --125 करोड़ जनता का फैसले को ठोकर
मारना अपने आप में पूरी तरह असंवैधानिक निर्णय था -
धारा 370 और 35 A हटाने के लिए याचिका पर फैसला नहीं किया
लेकिन अब राष्ट्रपति ने ये हटा दी तो उसके खिलाफ 15 याचिकाओं
को सुनने के लिए संविधान पीठ बिठा दी है --कम से कम याचिका
दायर वालों से ये तो पूछना बनता था कि आप कैसे प्रभावित हो रहे
है इनके हटने से --
यूएपीए कानून को अब किसी सजल अवस्थी और एसोसिएशन फॉर
प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स (एपीसीआर) ने चुनौती दी है और
अदालत ने सुनवाई का फैसला कर सरकार को नोटिस जारी कर
दिया --इन लोगों को ऐतराज़ है कि सरकार किसी को भी आतंकी
घोषित कर सकती है जिससे मौलिक अधिकारों का हनन होगा -
क्या सरकार पागल है जो किसी को आतंकी कह देगी --अदालत को
इन याचिका दायर करने वालों से पूछना चाहिए कि इस कानून से
आपको क्या तकलीफ है --आप हलफनामा दीजिये कि आपको
किसके आतंकी घोषित होने का डर है --हाफिज सईद, अजहर
मसूद, दाऊद और लखवी को आतंकी घोषित किया गया है --
ये याचिका क्या सजल अवस्थी और एपीसीआर ने इन चारों की तरफ
से दायर की है क्यूंकि इनके आतंकी घोषित होने के बाद ही ये
याचिका दायर की गई है -इसलिए मैं इनका सीधा सम्बन्ध इन चारों
आतंकियों से देखता हूँ --
इससे तो बेहतर है तमाम वामपंथी और कांग्रेसी वकील मिल कर
प्रशांत भूषण और कपिल सिबल के जरिये एक याचिका दायर
करवा दें जिसमे सरकार के लिए निर्देश मांगे जायें कि जब तक
सुप्रीम कोर्ट संसद से पास किये बिल को मंजूरी ना दे दे, तब तक
राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर ना करें --
या एक आदेश पारित कर दे सुप्रीम कोर्ट कि सरकार कोई
बिल संसद में लाने से पहले हमसे अनुमति (मंजूरी) ले ले -
सारा मामला ही ख़तम हो जायेगा -- अदालत में पेंडिंग केस भी
नहीं रहेंगे --
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