क्या आर्थिक स्थिति इतनी भयावह है??????

देश की अर्थव्यवस्था डूब चुकी है।

-आनंद शर्मा, कांग्रेस

हरामियों ने 2014 से पहले इसी की तैयारी की थी ताकि चुनी गई सरकार देश न चला पाए और जनता मजबूर होकर दोबारा से इन्हीं डकैतों को देश सौंप दे। इसके लिए कांग्रेसियों ने पूरी तैयारी की थी। चुनाव हो जाने के बाद और परिणाम घोषित होने से पहले 2-3 दिन के स्पेशल ऑर्डर से गोल्ड स्कीम जैसे कई फैसले किये गए जिससे नीरव मोदी जैसे करीब हजार उद्योग पतियों के सहयोग से भारत की अर्थव्यवस्था का बलात्कार किया गया। अंतिम डेढ़ वर्ष में NPA इस हद तक बढ़ा दिया कि भारत की 80 प्रतिशत इकॉनमी कालाधन बनाकर गायब कर दी गई और सरकारी आंकड़ों में इस बाबत गलत जानकारी दी गई। बीच-2 मे क्वात्रोची जैसे लुटेरों के सीज खाते कुछ मिनटों के लिए खोले गए और भारत का धन लूटा गया साथ मे जीरो लॉस थ्योरी टाइप आविष्कार भी हुए जिनसे लूटा गया धन लुटेरों की बपौती घोषित किया गया। कश्मीर के स्पेशल दर्जे से भारत की इकोनॉमी के एक बड़े हिस्से की लूट तो 70 साल से जारी थी जोकि कांग्रेस की मांग का सिंदूर बन चुकी थी जबकि इसी 370 की वजह से कश्मीर से एक धेले का राजस्व भारत सरकार को प्राप्त नहीं होता था।

2014 में कांग्रेस की बिदाई से पहले इन सब कुकर्मों का हेड प्लानर था चिदंबरम। यही नहीं बल्कि सेना प्रमुख दलबीर सुहाग की पोस्टिंग भी चुनाव के बीच बीजेपी की आपत्ति के बावजूद की गई जोकि मनमोहन के रिश्तेदार है। एक से एक भृष्ट अधिकारियों की PMO में नियुक्ति तो खैर 10 साल से जारी थी जिनमें से 300 को दाऊ ने जबरन रिटायर कर दिया। बड़े-2 बिचौलिए माफिया तैयार किये गए थे जो अनाज आदि का भंडारण कर कभी भी बाजार में महंगाई बढ़ा सकते थे। गद्दी से उतारे जाने से पहले ही भारत की इकॉनमी एकदम बर्बाद कर दी थी चिदंबरम और इसके दरिंदे डकैत आकाओं ने वो भी पूरी प्लानिग के साथ ताकि यदि दाऊ की सरकार बने तो देश मे गृहयुद्ध करा दिया जाय साथ ही 2014 चुनाव में कांग्रेस ने यही बयान बाजी भी की थी। एक से एक बड़ा कांग्रेसी अर्थशास्त्री 2014 से लगातार अर्थव्यवस्था पर बयानबाजी भी कर रहा है क्योंकि उन्हें अपनी लूट और षड्यंत्र पर पूरा भरोषा था।

दाऊ की जगह कोई दूसरा होता तो 2015 में ही भारत आज का पाकिस्तान बन चुका होता। लेकिन दाऊ नोटबन्दी की आंशिक असफलता का दाग अपनी छाती पर झेलकर इकॉनॉमी का 80% NPA में डूबे देश को उबार लाये जिसमें बेनामी संपत्ति कानून, ED और कड़ाई से भन्सार कर मंहगाई बढाने वाले दरिंदों के चंगुल से अनाज छुड़ाना सामिल है। नोटबन्दी में सिर्फ नए नोट के साइज के हिसाब से एटीएम रीकैलिबर करने का प्लान पहले से तैयार नहीं था बस यही कमी थी बाकी बिना नोटबन्दी के हालात वही बन जाते जिसकी तैयारी कांग्रेस ने डेढ़ साल तक की थी। दाऊ का रौद्र रूप देखकर हजार से ऊपर उद्योगपति भारत छोंड़कर भाग गए जिनमें से कुछ का आर्थिक अपराध की विना पर प्रत्यर्पण भी हो चुका है and to be continued...
आज जब देश विश्व की छठी अर्थव्यवस्था बन चुका है तब भी आनंद शर्मा जैसे कांग्रेसियों का इकॉनॉमी को लेकर दिया जा रहा बयान असल मे इनकी तैयारी के फ्लॉप होने की जबर फ्रस्ट्रेशन भर है।
चिदंबरम के सर इतना पाप लदा है कि इस माकड़े की दुर्गति लालू और आशाराम से भी दस गुनी ज्यादा होनी चाहिए ........
क्या स्थिति इतनी भयावह है??????

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