सच्चाई से भागते दलित भाईयों,

सच्चाई से भागते दलित भाईयों,

आपको हिन्दू बनना ही पड़ेगा,
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सावधान शुद्र भाईयों,
जोगेंद्र नाथ मण्डल की तरह एक और दलित नरसंहार करवाने वाला दलित नेता जिन्ना की तरह मुस्लिमों ने तैयार कर दिया है, मुस्लिम छदम भेष में "चन्द्रशेखर रावण" के रूप में जो,

"सावधान-सावधान-सावधान"
      
दलित आरक्षण की बैसाखी से अपाहिज हो व कांग्रेस द्वारा लिखवाए गए गलत इतिहास को पढकर हिन्दुओ के ही विरुद्ध मुस्लिम षड्यंत्र में शामिल होता रहा है 70 सालों से,
आरक्षण की बैसाखियों से अपाहिज हो चुके दलित वर्ग ने हर बार हिन्दुओ के खिलाफ षडयंत्रों में मुस्लिमों का साथ दिया,
बाबा साहिब जी को भी दलित सिर्फ अपने आरक्षण के फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं,
मेरा दावा है कि जिस दिन आरक्षण की कुप्रथा पर कोई सरकार चाबुक चलाएगी,
और गरीब वंचित शुद्रों को ही आरक्षण का लाभ देने वाला कानून लाएगी,
उस दिन बाबा साहिब की मूर्तियों पर माला चढ़ाता एक भी पलित धनाढ्य तथाकथित दलित मसीहा बने नेता व बड़े अधिकारी नजर नहीं आएंगे,

शुद्र हिन्दुओ की लाख मूर्खतापूर्ण गतिविधियों के बाद भी हिन्दुओ ने हर बार शुद्रों की भलाई के लिए सनातन संस्कृति व हिन्दू धर्म का नुकसान किया,

सिर्फ इसलिए कि कभी ना कभी कोई दलित चिंतक देश के करोड़ो दलितों को मुस्लिमों द्वारा दलितों के साथ किये गए अत्याचारों व नरसंहारों, धर्मपरिवर्तन व जबरन मुस्लिम बनाने के षडयंत्रों को उजागर करेगा,

मगर ऐसा नहीं हुआ,
जिस भी दलित को आरक्षण से सरकारी नौकरी मिली,वो उससे सम्रद्धि शिखर छूता गया और सिर्फ अपबे निजी परिजनों को सरकारी नौकरी में येन केन प्रकारेण घुसाता गया,

उसने सैकड़ों प्रतिभावान गरीब दलितों के अधिकारों पर कुठाराघात करते हुए अपने चहेतों में सरकारी नौकरी की रेवड़ियां बंटवाई,

नतीजन गरीब दलित उनके हाथों की वोट बैंक रूपी कठपुतलियाँ बन कर रह गई,
हर बार आजादी के बाद से ही कांग्रेस ने इन पलित सरकारी दलितों को खरीदकर गरीब दलितों के वोट बैंक को साधकर भारत में गाँन्धी द्वारा रोके गये मुस्लिमों का संरक्षण किया,
एक बड़े अनुमान के अनुसार भारत में 70 सालों में दलितों के विकास के नाम पर इतने खरबों रुपये सरकारी खजानों में से इस्तेमाल किये गए जितने रुपये में आज भी हरेक गरीब दलित को 2करोड़ रुपये से ज्यादा की रोकड़ रकम दी जा सके,

सोचो दलित शुद्र हिन्दुओ,
70 सालों में करोड़ो दलितों को सरकारी नौकरी आरक्षण से मिली,
करोड़ो दलितों को सरकारी योजनाओं के माध्यम से गरीबी रेखा से उबारने के लिए खरबों रुपये खर्च किये गए,
इतना बड़ा सरकारी खज़ाना खर्च करने के बाद भी आज आजादी के 72 सालों बाद भी देश में करोड़ों दलित झुग्गी झोपड़ी में जीवन यापन कर रहे हैं, गरीबी रेखा से नीचे की बद्दतर जीवन नारकीय तरीके से जी रहै हैं,
जबकि इन 70 सालों में इन सभी दलितों ने पीढ़ी दर पीढ़ी कांग्रेस व बसपा को लगातार वोट दीया और सत्ता सौंपी,

इतने लंबे राजनीतिक संरक्षण के बाद भी अगर भारत में दलित आज भी गरीब पिछड़ा, वंचित, दरिद्र, लाचार है तो ये सवाल आज के दलित युवा पीढ़ी के दलितों को जरूर सोचना चाहिए कि क्या कारण रहा कि लगातार लोकतांत्रिक देश में कांग्रेस को ही वोट देने के बाद भी आज दलितों को उज्जवल भविष्य क्यों नहीं मिला,

इसके लिए सिर्फ दलित वर्ग खुद ही जिम्मेदार है,
क्योंकि दलितों ने कभी ये जानने की कोशिश नहीं की,
कि जय भीम जय मीम के नारे से पाकिस्तान बनाने वाले दलितों के साथ मुस्लिमों ने क्या सलूक किया,
1947 से 1950 के बीच पाकिस्तान के लिए हुए जनमत संग्रह के लिए वोट देने वाले दलित वर्ग को जोगेंद्र नाथ मण्डल की अगुवाई में पाकिस्तान में ले जाकर किस प्रकार नरसंहार किया गया, किस प्रकार दलित बहन बेटियों के साथ सामुहिक बलात्कार किये गए,
जिन्ना ने अपने फर्जी वादे को ढ़ाल बनाकर लाखों दलितों को मुस्लिमों के हाथों मरवा दिया,
जब जोगेंद्र नाथ मण्डल को ये समझ आया कि दलित सिर्फ हिन्दुओ के साथ सुरक्षित रहेगा,
तो मण्डल ने दलितों को पाकिस्तान से भारत वापस लौट आने के लिए आव्हान किया,
जिससे लाँखो दलित वापस भारत की ओर आने लगे,
दलितों को वापस लौटता देख मुस्लिमों ने दलित बेटियों को अगवा करने के साथ साथ दलितों का नरसंहार करना शुरू कर दिया,
जान बचाने के लिए भारत भागते दलितों की ट्रेनों में कत्लेआम करके लाशों से भरी ट्रेन पंजाब अमृतसर रेलवे स्टेशन पर भेजी गई,
पीछे सफेद रंग से लिखा था
""मुस्लिमों की तरफ से गाँन्धी नेहरू को आजादी का तोहफा""
जो जोगेंद्र नाथ मण्डल ने करोड़ों दलितों के साथ पाकिस्तान बनाया और लाँखो दलितो को लेकर बंगाल से पाकिस्तान गया,वहाँ जिन्ना ने उसे क्षणिक खुश करने के लिए कानून मंत्री बनाया सिर्फ कुछ समय बाद ही मंत्री पद से 4पन्नो की दर्दनाक क्रंदन गाथा लिखकर त्याग पत्र देकर वही दलित मसीहा जोगेंद्र नाथ मण्डल ट्रेन में लगी जानवरों की बोगी में छिपकर जान बचाने के लिए वापस भारत आ गया,
और बंगाल में गुमनामी में जिंदगी बिताया,लगभग 15साल जिंदा रहने के बाद भी कांग्रेस ने कभी जोगेंद्र नाथ मण्डल की दलित चिंतक सोच को और मुस्लिमों के असली चेहरे को उजागर करती 4पन्नो के त्याग पत्र को सार्वजनिक नहीँ किया,
कभी ये नहीँ सार्वजनिक किया कि लाशों से भरी ट्रेन दलितों की थी,
कभी ये सार्वजनिक नहीँ किया कि बंगाल के नोआखाली में मुस्लिमो ने लाँखो दलितों का नरसंहार किया,
आजादी की लड़ाई में सभी हिन्दुओ ने भाग लिया,
मगर नरसंहार सबसे ज्यादा दलितों का हुआ,क्योंकि कांग्रेस द्वारा बाबा साहिब को ढ़ाल बनाने से नाराज जोगेंद्र नाथ मण्डल ने मजबूरी में जिन्ना की मुस्लिम लीग से हाथ मिलाया और पाकिस्तान बनाने के लिए आंदोलन किया,

कांग्रेस ने अपने पापों को छुपाने के लिए और दलित वोटबैंक हाथ से निकल जाने के डर से दलितों के असली इतिहास को छुपा दिया,और आरक्षण रूपी अस्थाई बैसाखी को बाबा साहिब की मर्जी के खिलाफ स्थाई कर दिया,
ताकि आरक्षण के लालच में मतान्ध दलित कभी अपने असली इतिहास व असली दुश्मन मुस्लिमों को नहीँ पहचान पाए,
हिन्दुओ को सबसे ज्यादा नुकसान दलित हिन्दुओ ने ही नासमझी में कांग्रेस को समर्थन देकर किया है,
वरना मुस्लिमों के नेतृत्व की औकात पाकिस्तान बनाने की नहीँ थी,
पाकिस्तान तो दलितों ने बनवाया,
और पाकिस्तान में 1947में 18से22%दलित हिन्दू जाकर बसे,
आज वो सब मुस्लिम धर्म डर के मारे अपना चुके हैं, उनकी बहन बेटियों को जबरन धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है और दलित हिन्दू पाकिस्तान में अब खत्म होने की कगार पर आ गया है,
दलितों ने खुद का विनाश तो किया गई है 70सालों में भारत में कांग्रेस के कारण,
हिन्दुओ को भी बहुत नुकसान पहुंचाया है मुस्लिमों के साथ मिलकर,
आज भी दलित आरक्षण की बैसाखी के लोभ से अपाहिज बनकर मुस्लिमों का साथ सिर्फ कांग्रेस को जिंदा रखने के लिए दे रहे हैं ताकि आरक्षण की चाशनी में सरकारी नौकरी की रेवड़ियां खा सकें,
चाहे इसकी कीमत भारत में दलित बहन बेटियां मुस्लिमों के हाथों अपनी इज्जत आबरू लुटवाकर चुकाती रहे,
मगर लालची आरक्षण के लोभी दलितों को सिर्फ जय भीम जय मीम की धृतराष्ट्र रूपी अन्धता स्वीकार है,
भले ही सारा दलित वर्ग विनाश की ओर क्यों न चला जाए,
जागो पढें लिखे दलितों,
आरक्षण की बैसाखी से अपाहिज हो चुके मेरे दलित भाइयों जागो,
वरना 1946की तरह एक बार फिर गजवा ए हिन्द के लिए मुस्लिम भारत में नरसंहार करेंगे कांग्रेस की शहः पर,
तब भी जय भीम जय मीम के षड्यंत्र में लाँखो दलित मुस्लिमों की नजदीकी के कारण मारे गए थे और आगे भी मुस्लिमों की नजदीकियों की वजह से मारे जाएंगे,
अभी भी वक़्त है भीम आर्मी की मुसलमानी असलियत पहचान लो,
ये चंद्रशेखर रावण दूसरा जोगेंद्र नाथ मण्डल ही है,
उसने भी लाँखो दलितों को मरने के लिए छोड़ दिया था और ये भी लाँखो करोड़ो दलितों को जय भीम जय मीम के षड्यंत्र में फ़ंन्सा कर मौत की तरफ धकेल रहा है,
क्योकि भीम आर्मी में 60 % मुस्लिम हैं,जो तथाकथित दलित चिंतक बनकर बगुलाभक्ति दिखा रहे हैं,
ये समय आते ही बंगाल में नोआखाली में किये दलित नरसंहार की तरह फिर से दलित समाज का नरसंहार  शुरू कर देंगे,
क्योंकि ये सब "गजवा ए हिन्द" के लिए तुम्हारा इस्तेमाल कर रहे हैं 1946 की तरह,
जागो दलितों जागो
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