आरक्षण को Dilip C Mandal को जरूर समझना चाहिये, इस विषय मे उनका ज्ञान और गणित दोनो ही बहुत कमजोर है।
उन्ही के इन्ट्रेस्ट रोटी में समझे।
माना 100 रोटिया है। इनमे से 15 रोटी SC, 7 रोटी ST और 27.5 रोटी OBC अपने नीचे छुपा लेता है। मतलब ये 49.5 रोटिया उनके लिये सुरक्षित( आरक्षित ) है। और अब बची 50.5 रोटियों पर खाने के लिये सभी SC ST OBC और General के खाने के लिये है। जिसके लिये सभी को दौड लगानी है।
अब SC और ST को सरकार ने फैलोशिप, फ्री एजुकेशन, फ्री ट्युशन, फ्री फार्म और फ्री एग्जाम सेन्टर तक आना जाना के रूप में पेट्रोल डीजल वाली गाडी और खुली सडक भी दी हुई है।
OBC को भी साइकिल दी है।
और इस दौड के लिये General के पैर मेंहंगी फीस, फार्म, कोई सुविधा नही, ऐज, अटैम्पट, और कट ऑफ की रेस्ट्रिक्शन लगाकर बेडियो से बांध भी दिये है और नंगे पैर करके काटो कंकड भरी सडक बना दी है।
कई बार इससे ये भी होता है कि General वाला रोटियों तक पहुच ही नही पाता सभी आरक्षित लोग पहले पहुच कर खत्म कर देते है। ( जैसा कि अभी झुनझुनू, राजस्थान में ऑपन सीटो पर एक भी जरनल वाले बंदे या बंदी का सलेक्शन नही हुआ)
इन पचास रोटियों को खत्म करने के बाद SC ST OBC अपनी छुपाई रोटियों से अलग जाकर खाना चालू करते है। कई बार पेट जरूरत से ज्यादा भर जाता है और इन छुपाई रोटियों मे से कुछ रोटियां बच जाती है। जोकि सूख सड जाती है तब फेक दी जाती है। माना SC को 10 रोटीया फेकनी पडी।
अगली बार जब फिर 100 रोटिया इस तरह डिस्ट्रीब्यूट होती है तब ये आरक्षित अपनी पहले वाली फेकी रोटियों की गिनती बताकर चौडे होकर बची 50 रोटियों से 10 रोटी निकाल लेते है। अब ये रेस 40 रोटियों के लिये होगी।
ये जो निकाली गयी 10 रोटियां है इसे बैकलाॅग कहते है।
अब ये जो रोटियां SC ST और OBC के नाम पर छुपाई गयी थी इसमे और भी बडा खेल है। इन सभी मे हजारो जातियां है। पर SC के नाम पर जाटव और महार, ST के नाम पर मीणा और OBC के नाम पर यादव, कुर्मी आदि यही सभी रोटिया खा लेते है। जिससे कि इन वर्गो की अन्य जातिया कुपोशित सी दिखाई देती है। फिर इन कुपोशितो का फोटो दिखाकर उनके नाम पल फिर से यही दो चार जातियां सभी रोटिया हडप कर जाती है। और जिन्हे रोटी आरक्षण के नाम पर देनी थी उन्हे एक निवाला तक नही मिलता। इसलिये इन रोटियों को हडप करने वाली जातियों को वहा से हटाना बहुत जरूरी है।
ये बात 1965 में सरकार की बनाई लोकुर कमेटी ने भी कही थी। लोकुर कमेटी के अनुसार जब तक SC वर्ग से जाटव और महार नही हटाये जायेंगे अन्य SC जातियों तक आरक्षण का लाभ नही पहुचेगा।
लोकुर कमेटी ने ये 1965 मे कहा था
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