प्रदोष अइछ नामक एक भारतीय विद्वान ने आर्यन अफवाह उड़ाने वाले मैक्समुलर और उसके पूर्व के विलियम जोंस जैसे संस्कृतिज्ञों की के बारे में रिसर्च करके एक ग्रंथ लिखा है
#Truths
500 years
European Christians in history
War, Robbery, Murder, Genocide, Occupation Exploitation.
Churches Universities
DemiGods like Maxmuller prepare the ground.
जिसमे उन्होंने यह पता लगाने के लिए गंभीर रिसर्च किया कि यूरोप में आखिर संस्कृत भाषा कब, किस रूप में, और किसके द्वारा पहुंची ?
उनकी रिसर्च यह कहती है कि संस्कृत अभी भी यूरोप या अमेरिका में अपने मूल स्वरूप में नहीं पहुंची है।
विलियम जोंस और मैक्समुलर एक लुच्चे ( #Lumpen_Elements) किस्म के धोखेबाज और फरेबी लोग थे, जिन्होंने अफवाह, फेक न्यूज़ लिटरेचर की रचना किया और पूरे विश्व को भ्रमित किया।
भारत मे ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज द्वारा लिखा जाने वाला लिटरेचर भी उन्ही अफवाहों से उपजी अफवाहें हैं- जिनको अम्बेडकर, वामपंथियों, नेहरूवियन लेखकों और दलित चिन्तक लिखा और प्रचारित प्रसारित किया। यह दुष्कर्म आज भी निरंतर जारी है।
मैने पांच साल में यह बात आपको विस्तार से लिखकर बताया है।
पढिये प्रदोष अइछ का इसी विषय मे एक इंटरव्यू:
http://veda.wikidot.com/fundamentals-of-indology-wrong
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