मोदी सरकार ख़ासकर प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली देखिये। पहले मर्ज़ देना, उसको बढ़ाना और फिर उसका इलाज करना।

मोदी सरकार ख़ासकर प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली देखिये। पहले मर्ज़ देना, उसको बढ़ाना और फिर उसका इलाज करना। यानी पहले धक्का देकर चोट लगाना, फिर उस चोट को कुरेदना। और फिर उसकी दवा करके बहला देना। ऐसे में  चोट लगे व्यक्ति को सिर्फ यही याद रहता है कि मोदी ने मरहम लगाया। वो ये नही याद रख पाता कि चोट भी मोदी ने ही दी और उसपर बार बार ठोकर भी मोदी ने ही मारी। इस बात के कई उदाहरण जनता के सामने हैं। तीन तलाक, अनुच्छेद 370 के साथ ऐसा ही हुआ। पहले तीन तलाक को लेकर देशव्यापी बहस चलाई, उसको मर्ज़ बनाया।फिर प्रायोजित तरीके से टीवी, और सोशल साइट्स पर उसपर प्रोपोगंडा करवाया। उसके बाद बिल ले आये। इसी तरह अनुच्छेद 370 पर भी लगातार बहस चलाई गई। अपने आईटी सेल को इंटरनेट ,फेसबुक, व्हाट्सएप के जरिये लगातार जूझने के लिए कहा। लगातार टीवी पर गर्मागर्म बहस कराई, फिर अनुच्छेद 370 को हटा कर इलाज करने वाले डाक्टर की तरह वाहवाही बटोर ली। अब नए मर्ज़ को देने की तैयारी हो गई है। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने जनसंख्या नियंत्रण को हवा दी है। इसपर रोज के रोज बहस चल रही है । सोसल साइट के महारथी जुटे हुए हैं। टीवी एंकर चिल्ला रहे है, मोदी के पक्ष का समर्थन कर रहे है। या यूं कहिये डिबेट में आये मोदी विरोधी से लड़े पड़े हैं। इसको यूँ समझिये कि जनसंख्या नियंत्रण नाम की एक बीमारी पैदा की जा रही है, मर्ज़ बढ़ाया जा रहा है। ऐसे ही आरक्षण को लेकर भी मर्ज़ बनाने की कोशिशें जारी है। अब कब कौन सा मर्ज़ कब प्रगट हो जाये और डॉक्टर मोदी उसका इलाज करके अपने आगे के चुनावों का रास्ता साफ करते रहें ,ये देखते रहिये।

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