हिंदू मुस्लमान के बीच नफरत बढ़ गई लेकिन क्यूँ

बात तो सही है के पिछले 4–5 सालों में हिंदू मुस्लमान के बीच नफरत बढ़ गई लेकिन क्यूँ ये सवाल मेरे मन में भी आया कि अचानक से ऐसा क्या हुआ जो इतनी नफरत बढ़ गई वर्ना पांच साल पहले देश में प्रेम भाव उच्च स्तर पर था।

1) कितना प्रेम भाव था जब कश्मीर से पंडितों को निकाल कर उसे एक मुस्लिम राज्य बना दिया गया ?

2) कितना प्रेम भाव था जब राजस्थान में श्रीनाथ जी के मंदिरों पे बेवजह हमले हुए और उसे बचाने के लिए जैन लोग हर तरफ भागे?

3) कितना प्रेम भाव था जब सलीम सिंह के कहने पर पूरी मुस्लिम फौज ने हिन्दू पालीवाल की बेटी से जबरदस्ती शादी करने के लिए पूरे गाँव को मार दिया गया जैसलमेर में ?आज भी वो गाँव बंजर पड़ा है कुल धारा नाम से।

4) कितना प्रेम था जब फतेहपुर सिकरी में 3 हिन्दू बच्चों को लटकाया क्यूंकि वो मस्जिद में बिना सर ढंके चले गए थे और उन्हें मंदिर मस्जिद चीज़ का नाम भी बोलना नहीं आता था?

5) कितना प्रेम था जब एकलिंग जी की इकलौती मूर्ति जो राजा नरेश स्थापित करने का रहे थे उन्हें बीच मे ही रोक कर मूर्ति को नष्ट कर दिया था ? आज भी स्थापित मूर्ति नष्ट अवस्था में एकलिंग जी मंदिर में है ।

6) कितना प्रेम था जब पूर्व प्रधानमंत्री के एक इशारे पर सारे सिक्खों के सर कलम कर दिए गए थे 1984 में ?

7) कितना प्रेम था जब गोधरा कांड में मरे हिन्दुओं की मौत पे कोई फर्क़ नहीं पड़ा पर जब हिन्दुओं ने बदला लिया तो उसकी नफरत आज तक दिलों में फैली है? मतलब तुम सिर्फ मरो, मारो मत।

8) कितना प्रेम था जब 2008 हमले के बाद कसाब के फोटो पे माला चढ़ा कर उसकी लंबी उम्र के नारे लगाए थे और एक मुस्लिम वकील ने उसका केस हाथ मे लिया और 5 साल तक रगड़ा ये कह के की इसमे उसका कोई हाथ नहीं ?

9) कितना प्रेम था जब अकबरुद्दीन ओवैसी बोला के 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो, हम सब मुस्लमान 100 करोड़ हिन्दुओ को देख लेंगे ?

10) कितना प्रेम था जब अमरनाथ में यात्री मरे तो महबूबा मुफ्ती और वहा के शांतिप्रिय लोग बोले, वो तो मरेंगे ही यहा आयेंगे तो क्यूंकि यहा इतनी भारी संख्या में आके कश्मीर का ट्राफिक बढ़ाते हैं ?

और आज भी कितना प्रेम है जब हिन्दू लड़किया धर्म ना देखते हुए किसी भी मुस्लमान से दोस्ती कर लेती हैं पर उनके यहा इसकी इजाजत नहीं है ?अपने ही धर्म का आदमी जूते पे रखे वो ठीक है पर हिन्दू से कोई रिश्ता नहीं।

और आज भी कितना प्रेम है जब निहत्थे अमरनाथ यात्री पर पत्थर फेंक फेंक कर हमला किया जाता है पर हिन्दू आजतक मक्का मदीना जा कर ऐसा कुछ नहीं किया ?

और आज भी कितना प्रेम है जब हिन्दू एक कदम आगे बढ़ कर सलाम बोल देता है पर एक मुस्लिम कभी जय श्री कृष्ण, जय भोले नहीं बोलता ?

इंसान की चुप्पी उसकी कमजोरी नहीं उसकी सभ्यता है।

1000 साल तक लाखो अरबी, तुर्क, अंग्रेज राज करके सिर्फ एक धर्म के लोगों के पीछे पड़े हैं पर फिर भी खत्म ना कर पाए।

हिन्दुस्तान में हो तो हिन्दुस्तानी बन कर रहो और शुरुआत पहले खुद से करो।

नफरत तब ही खत्म होगी जब धर्म से पहले देश होगा और दूसरे धर्म के लोग काफिर नहीं लगेंगे।

जय हिंद 

जय हिन्दुस्तान

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