खुश होइए, बड़े दिनों बाद अबकी सावन बरसा है,,,
धारा 370 की समाप्ति मात्र एक संवैधानिक बदलाव नहीं है, युगों की परतंत्रता के बाद बाद महाराज ललितादित्य मुक्तपीड की धरा स्वतंत्र हुई है।
मुक्त हुआ है उनका बनवाया वह विश्व का सबसे बड़ा मार्तण्ड मंदिर, जिसे कुछ अभद्र अब "शैतान का घर" कहने लगे थे।
मुक्त हुई है हम सब के परदादा महर्षि कश्यप की वह भूमि, जो आधिकारिक रूप से हमारी 'पुस्तैनी घराड़ी' होने के बाद भी हमारी नहीं थी,,,,
मुक्त हुई है महान शैव दर्शन के प्रणेता वसुगुप्त की धरा,,,, किल्लट और सोमनन्द की माटी,,,, पतंजलि, क्षेमराज और कल्हण जैसे विद्वानों की धरा,,,,मुक्त हुआ है महाराजा रणजीत सिंह का कश्मीर,,,,
आज उन असंख्य कश्मीरी हिन्दुओं की आत्मा को शान्ति मिली होगी, जिन्हें 1989- 1992 में मार दिया गया था, जिनकी स्त्रियों को लूट लिया गया था।
आज उन असंख्य योद्धाओं की आत्मा को शान्ति मिली होगी जिन्होंने कश्मीर की सीमा को अपने रक्त से धोया था। आज उन असंख्य देवियों की वर्षों से जलती हुई छाती ठंढी हुई होगी जिन्होंने इसी कश्मीर की बलिवेदी पर अपना पति या बेटा चढ़ाया था,,,,
आज तृप्त हुई होगी कश्मीर में बलिदान होने वाले पण्डित श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा, आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी तृप्त हुए होंगे।
आज भारत की छाती ठंढी हुई है,,,,
बहुत पुरानी बात नहीं है, मात्र पाँच-छह सौ पीढ़ी पूर्व मेरे पूर्वज कश्मीर की नीलम घाटी के शारदा वन में "ॐ स्वस्ति नः इन्द्रो,,,," का पाठ करते थे।
आज तक उस परतन्त्र कश्मीर की अपनी डीह पर जाना तो दूर, हम जाने की सोच भी नहीं सकते थे, पर अब सोच सकते हैं।
अब सम्भव है कि कुछ वर्षों बाद कोई श्रीमुख शाण्डिल्य गोत्रीय व्यक्ति अपने पूर्वजों की माटी पर श्रद्धा के फूल चढ़ाने जा सके।
अब सम्भव है कि महर्षि कश्यप की संतति अपने पुरुखों की माटी पर माथा टेक सके,,,
आज खुश होने का दिन है। खुश होइए कि अब कश्मीर सचमुच हमारा है। खुश होइए इस विश्वास के साथ, कि कल डल झील के किनारे भी माथे से नाक तक सिंदूर लपेटे कोई स्त्री "उगीं ना सुरुज देव भइले अरघ के बेर,,,," गाती हुई छठ पूजा करेगी।
खुश होइए इस स्वप्न के साथ कि कुछ वर्षों के बाद कोई दूसरा ललितादित्य मुक्तापीड प्राचीन मार्तण्ड मंदिर के ध्वंसावशेषों पर नई ईंट रखेगा। और खुश होइए इस बात के लिए भी, कि आपने मोदी को चुना था,,,,
मेरे गाँव के बूढ़े बड़े गर्व से बताते हैं कि हमने वह दिन देखा है जब नब्बे हजार पाकिस्तानी सैनिक इंदिरा के आगे समर्पण किये थे।
हम जब बूढ़े होंगे तो उतने ही गर्व से अपने नाती-पोतों को बताएंगे
कि हमने मोदी-शाह को देखा है। हमने 5 अगस्त 2019 देखा है। हमने कश्मीर को स्वतंत्र होते देखा है, हमनें इतिहास बनते देखा है,,
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