धर्म विशेष का चरित्र
एक बार मेरठ से दिल्ली जा रहा था। रास्ते में एक हल्के हरे रंग की कार सबको जबरदस्त ओवरटेक कर रही थी। कार ड्राइवर ड्राइवर न होकर पतंगबाज़ ज्यादा लग रहा था। जबरदस्ती ओवरटेक के दौरान एक सफेद कार की ठोकर उनकी हरी कार पर लग गयी और मामला खराब हो गया। दोनों कारें तुरन्त रुक गयीं और हरी कार से दो लड़के आस्तीन चढ़ाते उतरे, उनके पीछे दो बुर्काधारी महिलाएं और दो छोटे बच्चे उतरे। वहीं सफेद कार से केवल दो लड़के उतरे। हरी कार से उतरे लड़कों ने गालियां दीं और मारने की मुद्रा में आगे बढ़े। बुर्काधारी महिलाओं ने भी उन्हें पीटने की हांक लगायी। इससे उत्साहित मुस्लिम लौंडों ने सफेद कार वालों पर आखिरकार हाथ डाल ही दिया।
ये हरकत उन सफेद कार वाले लौंडों के लिए सर्वथा अप्रत्याशित थी। पहले तो वो हड़बड़ाये, फिर पूरी ताकत से वो भी घूंसेबाज़ी करने लगे और हरी कार वाले लौंडों को दनादन कई घूंसे रसीद कर दिये। जब हरी कार वाले लौंडे ठुकने लगे तो दोनों बुर्काधारी महिलाएं सड़क पर चिल्लाने लगीं अरे कोई तो बचाओ इन्हें ये दो हिन्दू गुण्डे हमारे आदमियों को मार रहे हैं। पहले कार से ठोकर मारा और जब इन्हें रोका तो मारपीट करने आ गये। अर्थात जब मामला उल्टा पड़ गया तो मुस्लिम महिलाओं द्वारा बचाने की फरियाद होने लगी, अन्यथा ये महिलाएं तो अपने आदमियों को शक्तिमान समझकर लड़ने के लिए उकसा रही थीं। और फ़रियाद का तरीका देखिये तुरन्त पूरे मामले को हिन्दू मुस्लिम लड़ाई में कन्वर्ट कर दिया और गुंडागर्दी का ठीकरा भी उन्ही के ऊपर फोड़ दिया।
यही सब कुछ कश्मीर में हो रहा है। फारुख अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती जैसे लोगों ने अपनी जवानी के दिनों में असँख्य हिंदुओं की हत्या होते देखा है, हिन्दू महिलाओं का बर्बर बलात्कार होते देखा है। उस समय इन्हें असीम आनन्द आया। आज जब इन पर हल्का दबाव बढ़ा तो पहले महबूबा धमकी वाले अंदाज़ में आईं। कहने लगीं ...जम्मू कश्मीर से हिन्दू साफ हो जायेंगे.. भारत का झंडा उठाने वाला कोई नहीं मिलेगा वगैरह वगैरह। अब ये मजलूम फरियादी हैं ....हर कांग्रेसी नेता के दर पर जा रही हैं ...रो रोकर कश्मीरियत को बचाने की फरियाद कर रही हैं। यही हाल फारुख और उमर अब्दुल्ला का है 35ए पर हस्तक्षेप न करने के लिए मोदी के सामने हाथ तक जोड़ दिए।
यही मुस्लिम चरित्र है। इनकी स्थिति जब मजबूत होती है ये काफिरों पर बिल्कुल रहम नहीं करते और जब मार खाने लगते हैं तो मजलूम फरियादी बन जाते हैं।
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