सरकारे सिर्फ नारों तक ही सीमित है.. "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ "

निषेचन के चौथे दिन एक भ्रूण में धड़कन बन जाती है..
फिर माँ के कोख में एक जीवन आकार लेने लगता है....
गर्भ में... लड़का है या लड़की इसका पता तीन महीने बाद ही चलता है....
और जब तक लड़का लड़की का पता चलता है तब से ले के अबॉर्शन तक गर्भस्थ शिशु लगभग चार  महीने का हो जाता है.....
तब तक उसके सेंस ऑर्गन डेवलप हो चुके होते हैं...
वो मां का प्यार भरा स्पर्श तथा कैची की चुभन दोनों महसूस करने लगता है...
और अबॉर्शन सीधे नही होता..गर्भ में कैंची डाल के उसके छोटे छोटे पीसेज कर के निकालने पड़ते हैं....
डॉक्टर के साथ मां बाप को भी शारीरिक मानसिक तकलीफ होती होगी......

फिर ऐसा क्यों हो रहा है....??

इसमे कोई दो राय नही के हिंदुओं में पर्दा प्रथा....
"मजहबे शांति एवं भाईचारे" वालों की देन है...
जिन्होंने हिंदुस्तान पे सालों तक शासन और अत्याचार किया...

वरना...
कहीं भी लिखा नही मिलता की सीता ने घूंघट में से कहा.........
महारानी द्रौपदी राजसभा में महाराज युद्धिष्ठिर के साथ बैठती थीं......
कैकेई महाराज दशरथ के साथ युद्ध में भाग लेती थीं..।।
महान विदुषी गार्गी ने तब के महान विद्वान याज्ञवल्क्य से शास्त्रार्थ किया था....
किसी भी महिला से उसकी इच्छा के विरुद्ध उसका सानिध्य नही प्राप्त किया जा सकता था...
चक्रवर्ती सम्राट महाराज शांतनु ने एक मछुआरे की बेटी देवी सत्यवती से विवाह के लिए कहीं बल प्रयोग नही किया......
लड़कियों को योग्य वर चुनने की आजादी थी.....

जबसे आया शांति प्रिय कौम का शासन....
जिसने नारी मर्यादा को बुरी तरह रौंदा... बादशाहों नबाबों के हरम बनने लगे.... जिसमें लड़कियों को जानवरों की तरह कैद कर के रखा जाने लगा.......
जिससे हमारी माँ बहनो को मिला घूंघट ... बाल विवाह.. सती प्रथा... बहु विवाह.. अशिक्षा... असुरक्षा... जैसी कुरीतियां.....
और आज भी स्थिति नही बदली है...
आज भी विभिन्न शहरों से हिंदुओं के पलायन की जड़ में है.... शांतिदूतों द्वारा हमारी माताओं बहनो से छेड़खानी.... लव जेहाद..

सरकारे सिर्फ नारों तक ही सीमित है..
"बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ "
और न्यायपालिका....???
उसके लिए निर्भया,गुडिया जैसे अनेक केस देख लो..
जब इतने जघन्य केस में भी किसी को सजा नही हुई... तो छेड़खानी साबित कैसे करोगे...??
इसलिए लोग बड चले हैं कुदरती न्याय की तरफ..
यानी
कन्या भ्रूण हत्या....
उत्तराखण्ड के 33 गांवों में पिछले एक महीने में 150 बच्चे पैदा हुए जो सारे के सारे लड़के हैं....
हम बेटियों की सुरक्षा के लिए नहीं दे सकते तो उन्हें गर्भ में ही मार रहे हैं......

वास्तव मे हम न्याय विहीन समाज मे जी रहे हैं....

Comments